281 BNS in Hindi: सार्वजनिक मार्ग पर लापरवाही से वाहन चलाने पर अब होगी जेल और जुर्माना

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281 BNS in Hindi:  भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 281 सार्वजनिक सुरक्षा और सड़क अनुशासन से संबंधित एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्रावधान है। तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस (BNS) में इसके के बारे में क्या कहा गया है।

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धारा 281 क्या कहती है? BNS Section 281 in Hindi

जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस (BNS) की धारा 281 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 281…के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक सड़क पर इतनी लापरवाही या तेज़ी से गाड़ी चलाता है कि उससे इंसानी जान को खतरा हो या किसी दूसरे व्यक्ति को चोट या नुकसान पहुँच सकता है, तो इसे अपराध माना जाएगा।

BNS 281 Important Points

  • इस सेक्शन के तहत किसी को दोषी ठहराने के लिए, ये बातें मौजूद होनी चाहिए तभी आरोपी मुख्य रूप से अपराधी माना जायेगा…
  • सार्वजनिक सड़क –  गाड़ी अगर ऐसी जगह पर चलाई गयी है जहाँ आम जनता को आने-जाने का अधिकार हो, और इस बीच उस गाडी से आम जनता को कोई चोट पहुँचती है, तो वो व्यक्ति आरोपी माना जायेगा।
  • लापरवाही या गैर- जिम्मेदाराना ड्राइविंग –  ड्राइवर का व्यवहार सामान्य सावधानी के स्टैंडर्ड से ज़्यादा और स्वाभाविक रूप से खतरनाक होता है तो वो अपराधी कहलाये गा।
  • खतरे का जोखिम –  यह ज़रूरी नहीं है कि असल में कोई दुर्घटना हुई हो; अगर आपकी ड्राइविंग से दूसरों के लिए खतरा पैदा होता है, तो भी यह सेक्शन लागू हो सकता है।

बीएनएस धारा 281 का उदहारण 

  • For Example: गाड़ी की तेज़ रफ़्तार, गलत तरीके से ओवरटेक करना, मोबाइल देखते हुए चलाना, ट्रैफिक नियमों की अनदेखी, बिना देखे मोड़ना आदि।

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बीएनएस धारा 281 की और सजा

इसके अतिरिक्त, बीएनएस (BNS) की धारा 281 के तहत, यदि किसी व्यक्ति को दोषी (Guilty) ठहराया जाता है, तो उसके लिए सजा निर्धारित की गई है। यह तब लागू होता है जब कोई व्यक्ति लापरवाही से ऐसा कुछ करता है जिससे बीमारी फैलने की संभावना हो। इस सेक्शन के तहत, 6 महीने तक का साधारण कारावास और अपराधी को 1000 हजार रुपये जुर्माना लगाया जाता हैं। इसके अलवा आपको बता दें, यह एक गैर-संज्ञेय (non-cognizable) अपराध है, इसलिए पुलिस को जाँच के लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति चाहिए होती है।

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