Top 5 Dalit news: जंतर-मंतर पर बवाल, भीम आर्मी के प्रदर्शन में ‘मनुवादी’ रिपोर्टिंग या पत्रकार का अपमान?

Chandra Shekhar Azad, Monu Jatav vs Mohan Chauhan
Source: Google

Top 5 Dalit news:  अग्रेजों की एक नीति थी फूट डालो और राज करो, तब फूट अलग अलग रियासतों में डाली गई थी लेकिन अब अंग्रेज तो चले गए, मगर उनकी मानसिकता यहीं रह गई, और इस बार बंटवारा बहुजनों का किया जा रहा है, जाति के नाम पर बांट कर मनुवादी अपनी जीत का जश्न मनाते है, लेकिन मासूम लोगों को वो भगवान नजर आते है । तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में जानेंगे जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है।

जंतर मंतर पर आंदोलन खराब करने की बड़ी साजिश

1, दलितों से जुड़ा पहला मामला दिल्ली के जंतर मंतर पर होने वाले उग्र प्रदर्शन को लेकर है, जहां खुद भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद मौजूद है। लेकिन ये आंदोलन आजाद की वजह से नहीं बल्कि एक पत्रकार की वजह से वायरल हो रहा है। रुचि तिवारी नाम की ये वायरल महिला बड़े शान से माइक लेकर बहुजन लोगों के पास जाकर अपमानित करते हुए पूछती है कि वो लोग तो 100 सालों से प्यासे है… क्या पानी मिला है उन्हें पीने को। बस फिर क्या था, सबने मिलकर इन मनुवादी मोहतरमा को अच्छा सबक सिखाया। हैरानी की बात है कि अब रुचि तिवारी इसे जातिगत मुद्दा बता कर चीख चीख कर रह रही है कि ब्राह्मण होने के कारण उनके साथ ऐसा व्यवहार किया गया।

इतना ही नहीं जब बहुजन छात्रों ने रुचि तिवारी के सवालों का जवाब देने से इनकार किया तो मनुवादी मानसिकता को बढ़ावा देने के लिए बाबा साहब के महार सत्याग्रह का अपमान किया। जानबूझ कर ऐसी बाते कि जिससे लोगों का गुस्सा भड़क जाए, एक छात्रा का गला पकड़ कर नीचे गिरा दिया। और अब खुद को पीड़िता बता कर ब्राह्मण कार्ड खेल रही है। बहुजन समाज के लोगों ने इस लड़की के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है, जो जानबूझ कर सौहार्द बिगड़ने की कोशिश कर रही है, लेकिन ऐसा लगता है जैसे उनकी चाल उनपर ही भारी पड़ गई है। आपको क्या लगता है।

सवर्णों के साथ हो गया बड़ा धोखा

2, दलितों से जुड़ा अगला मामला एक ऐसी खबर है, जिसे जानने के बाद हर जातिवादी ये सोचने पर मजबूर हो जायेगा कि क्या वाकई में जाति के नाम पर आंदोलन करने वाले, और त्याग करने का नाटक करने वालों पर भरोसा करना चाहिए या नहीं। अभी हाल ही में यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ सवर्णों के आंदोलन का साथ देने के लिए इस्तीफा देने वाले SDM अलंकार अग्निहोत्री ने अब नई राजनीतिक पार्टी बनाने का ऐलान किया है। अलंकार अग्निहोत्री ने जनवरी में इस्तीफा दे दिया था, तब तक अटकलें ये लगाई जा रही थी कि वो समाजवादी पार्टी से जुड़ सकते है, लेकिन अब ख़बर आ रही है कि वो अपनी ही ब्राह्मणी और सवर्ण समाज की पार्टी बना रहे है।

इसे कहते है इस्तीफा तो केवल एक बहाना था असली मकसद तो राजनीति में आना था। यानि की इस्तीफा देकर सिर्फ हाइटलाइट होना था ताकि राजनीतिक की राह खुले.. मात्र राजनीति में आने के लिए सवर्णों के साथ खड़े होने का ढोंग करने वाले अलंकार अग्निहोत्री कितने दिन राजनीति में टिक पाते है, या ये खुद को आजाद समाज पार्टी के मुखिया के बराबर समझने लगे है। अब देखना होगा कि क्या ये आजाद के बराबर खड़े होने लायक भी बचेंगे, या फिर सवर्ण समाज के आंखों से पट्टी हटेगी।

दलित लड़की की शादी को मनुवादियों ने रूकवाया

3, दलितों से जुड़ा अगला मामला यूपी के बरेली से है, जहां एक दलित लड़की ने अपनी खुशी से एक मुस्लिम लड़के से शादी करने की कोशिश की तो भी, मनुवादियों को इतनी मिर्ची लगी कि उन लोगो ने इस मुद्दे को सीधे लव जिहाद का मुद्दा बता कर पूरी शादी ही रूकवा दी, इतना ही नहीं होने वाले दूल्हे के खिलाफ तक मामला दर्ज करा दिया। मेरठ की रहने वाली आकांक्षा गौतम ने अपनी आपबीति बताते हुए कहा कि वो बालिक है, अपनी खुशी से शाहवाज राणा से शादी करने जा रही थी, शादी और सगाई के लिए सारी तैयारी हो चुकी थी, घर में खुशी का माहौल था, मातापिता ने शादी का सारा सामान ले लिया था, लेकिन कुछ लोगो को यहां भी जातिगत मुद्दा बना कर हमारी खुशी बिगाड़नी थी।

जानबूझ कर अपना उल्लू सीधा करने के लिए इसे लव जिहाद का मुद्दा बना दिया.. शाहवाज पर आरोप लगाया कि उसने धर्म परिवर्तन करवाया है, जबकि ऐसा कुछ नहीं था। केवल दलित और साधारण परिवार से होने के कारण उनकी शादी को बर्बाद कर दिया गया। पीड़ित परिवार ने सचिन सिरोही नाम के एक व्यक्ति पर आरोप लगाया कि पहले हिंदू जागरण मंच के मेरठ ज़ोन के हेड था।

राजनीतिक प्रभाव के कारण उनकी खुशिया बर्बाद कर दी ताकि वो लाइमलाइट में रह सकें। इसमें अकांक्षा के चाचा प्रेम चंद ने भी सिरोही का साथ दिया है। आकंक्षा ने अभी भीम आर्मी चीफ से मदद मांगी है, कि उन्हें अपना पक्ष तक रखने नहीं दिया जा रहा है, जबकि वो कुछ भी असंवैधानिक नही कर रहे है। वो लोग बिना वजह चंद लोगों की राजनीति का शिकार हो गए है, उन्हें समझ ही नहीं आ रहा है कि अब इन्हें क्या करना चाहिए।

पतंग उड़ाने के रोकने को लेकर दलित युवक को पीटा

4, दलितों से जुड़ी अगली खबर यूपी के बहराइच से है, जहां चाइनीज मांझा से पतंग उड़ाने से रोकने को लेकर नाराज हुए जातिवादी दबंगो ने न केवल एक दलित के घर में घुसकर उससे मारपीट की बल्कि उसे जातिसूचक बातें भी कहीं। ये घटना बहराइच के दरगाह थाना क्षेत्र के बख्शीपुरा का है, पीड़ित दलित युवक सहजराम ने पुलिस को तहरीर दी कि उसके घर के बाहर कुछ लोग पतंग उड़ा रहे थे, सहजराम ने उनसे कहा कि वो चाइनीज मांझे से पतंग न उड़ाये क्योंकि उससे बिजली के तार कट जाते है जिससे बिजली चली जाती है।

इतना सुनने के बाद उन लोगो ने पीड़ित को गालियां देना शुरु कर दिया, जब पीड़ित ने इसका विरोध किया तो उसे लाठी डंडो से पीटने लगे, वो किसी तरह से जान बचा कर घर मे भागा तो भी आरोपियों ने उसके घर में घुसकर मारपीट की और घर में तोड़फोड़ मचाई। हंगामे को देखकर पुलिस को जानकारी दी गई, लेकिन पुलिस के आते ही आरोपी फरार हो गए। पुलिस ने 3 महिलाओं समेच 6 अज्ञात लोगो के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरु कर दी है। पुलिस सबकी तलाश कर रही है।

श्रावस्ती में दुष्कर्म पीड़िता को मिला 12 साल बाद न्याय

5, दलितों से जुड़ा अगला मामला यूपी के श्रावस्ती से है, जहां एक दुष्कर्म पीड़िता को आखिरकार 12 साल बाद न्याय मिला। ये घटना श्रावस्ती के गिलौला क्षेत्र की थी जो कि 2013 में घटित हुई थी। पीड़िता एक दलित जाति से है, और गांव के कुछ दबंगो के लिए दलितो का उत्पीड़न करना कोई गुनाह नहीं है… पीड़िता ने बताया कि वो अपने घर में अकेली थी, तभी गांव के ही छोटकऊ बाउर बेहना जबरन उसके घर में घुस आये, उसका अपहरण करके खेतों में उठा ले गए जहां दोनो ने उसका दुष्कर्म किया।

पीड़िता को जान से मारने की धमकी दे कर फरार हो गए, लेकिन पीड़िता किसी तरह से घर पहुंची और उसने अपने परिवार वालो को सारी आपबीति बताई। जिसके बाद पुलिस ने दोनो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया., मगर इन 12 सालों में मुकदमे की सुनवाई को दौरान ही एक आरोपी की मौत हो गई वहीं इतने साल कोर्ट के चक्कर लगाने के बाद पीड़िता को सही न्याय मिला और अतिरिक्त जिला सत्र न्यायधीश अवनीश कुमार गौतम ने छोटकऊ को 20 साल की सजा और 35 हजार रूपय का जुर्माना लगाया है। हैरानी की बात है कि आज भी न्याय व्यवस्था दलितों और पिछड़ो के लिए इतनी सुस्त है कि न्याय के इंतजार में पीड़ितो की आधी जिंदगी निकल जाती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *