Dr. Ambedkar Buddhism Principles: बाबा साहब और बौद्ध धर्म, वे 3 नियम जिन्होंने बदला आधुनिक भारत का वैचारिक इतिहास

Dr. Ambedkar Buddhism
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Dr. Ambedkar Buddhism Principles: बाबा साहब आंबेडकर ने भले ही धर्म परिवर्तन करने का ऐलान 1935 में किया था लेकिन तब उन्होंने ये तय नहीं किया था कि वो बौद्ध धर्म के अनुयायी बनेंगे। लेकिन जैसे बाबा साहिब ने बौद्ध धर्म को जाना वैसे वैसे वो बुद्ध के कायल हो गए। उन्होंने बौद्ध धर्म अपनाने से पहले बुद्ध के बारे में जाना और उनके धम्म पर किताब भी लिखी थी।

बाबा साहब ने बौद्ध धर्म कोई जल्दबाजी में नहीं अपनाया था बल्कि सालों की जांच परख और खोजबीन के बाद अपनाया था लेकिन बौद्ध धर्म से जुड़ी 3 ऐसी महत्वपूर्ण बातें थी जिसने बाबा साहब को प्रेरित किया बौद्ध धर्म के लिए। जिसके कारण ही वो आकर्षित हुए थे। बौद्ध धर्म को अपनाने और उसे पसंद किए जाने को लेकर खुद बाबा साहब ने एक बार इन प्रश्नों का उत्तर दिया था। अपने इस वीडियो में हम जानेंगे कि आखिर क्यों बाबा साहब को बौद्ध धर्म पसंद था और कौन से वो 3 कारण थे जिसके कारण बाबा साहब ने बौद्ध धर्म अपनाया था।

बौद्ध अपनाने से पहले लिखी किताब

बाबा साहब को बौद्ध धर्म ने कितना प्रभावित किया होगा, इस बात का अंदाजा आप केवल इसी बात से लगा सकते है कि उन्होंने कई धर्मो के बारे में रिसर्च की थी लेकिन बौद्ध धर्म को करीब से जानने के लिए उन्होंने श्रीलंका, बर्मा जैसे बौद्ध देशो की यात्रा की थी। उन्होंने बुद्ध और उनके ज्ञान को लेकर किताब लिखना शुरू किया था, उन्होंने ये समझा था कि बौद्ध धर्म को लेकर उनके जो भी विचार थे वो उसे दुनिया के सामने लाकर ही अपमे बौद्ध धर्म को अपनाने के मत को समझा सकते थे। इसके लिए पहले उन्होंने बुद्धा एंड हिज धम्मा किताब लिखी थी। बाबा साहब ने बौद्ध धर्म को पसंद करने के पीछे 3 मुख्य कारण बताये थे..

बौद्ध धर्म को क्यों पसंद करते थे बाबा साहब

जब बाबा साहब ने बौद्ध धर्म अपनाया था तब भारत में बौद्ध धर्म का लगभग पतन ही हो गया था, ऐसे में बाबा साहब और उनके साथ करीब पौने 4 लाख लोगो ने बौद्ध धर्म अपनाया था, जो कि अभी तक के इतिहास में सामूहिक रूप से धर्म परिवर्तन करने का सबसे बड़ा मुद्दा है। बाबा साहब ने बौद्ध धर्म को पसंद किये जाने के पीछे 3 मुख्य कारण बताये थे। बाबा साहब बीबीसी के दिल्ली के आकाशवाणी केंद्र में 12 मई 1956 को बीबीसी के इंटरव्यू में पहुंचे थे, तब तक बाबा साहब ने बौद्ध धर्म तो नहीं अपनाया था लेकिन वो मन बना के थे, ऐसे में अपने इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि उन्होंने बौद्ध धर्म को ही क्यों चुना और बौद्ध धर्म उन्हें क्यों पसंद है।

बौद्ध धर्म के वे 3 क्रांतिकारी नियम

दरअसल बाबा साहब ने बताया कि जहां लगभग सभी धर्मों में जातिगत भेदभाव, उंचनीच की अवधारणा भरी पड़ी है वहीं बौद्ध धर्म एक ऐसा धर्म है जो तीन अलग अलग मुख्य सिद्धांतो पर चलता है। जिसमें पहला है प्रज्ञा, दूसरा समता और तीसरा करूणा। प्रज्ञा जिसका मतलब है सर्वोच्च ज्ञान अथवा बुद्धि के आधार पर आकलन, यानि की जाति से नहीं बल्कि बौद्धिक ज्ञान के आधार पर व्यक्ति का आकलन होता है।

दूसरा है समता.. समता जो कि ये बताता है कि हर एक व्यक्ति समान है, सभी को एक जैसा समझा जाना चाहिए.. वहीं तीसरा सिद्धांत है करूणा..यानि की दया.. जिसमें दया है वहीं ज्ञान को प्राप्त कर सकता है, दया आपको विवेकशील बनाती है। जो आपको मनुष्य हो या पशु सबके लिए एक सामना भावना देता है, इसलिए बौद्ध धर्म का पालन करने वाला इन तीन सिद्धांतो का पालन करके ही खुद के जीवन को सार्थक बना  सकता है।

प्रज्ञा अपना कर बुद्धि का इस्तेमाल

वहीं बाबा साहब ने कहा कि हर धर्म मरने के बाद उनके आत्मा के बारे में सोचने में लगे है, मुत्यु में उलझे हुए है, परमात्मा के अस्तित्व के बारे में सोचते रहते है वहीं बौद्ध धर्म में इन सबको अंधविश्वास कहा गया है, बुद्ध ने कहा कि व्यक्ति को किसी की बात मानकर उनका अनुसरण करने से बेहतर है कि अपने विवेक का इस्तेमाल करें, प्रज्ञा अपना कर बुद्धि का इस्तेमाल करें, घृणा करने के बजाये सबसे करूणा रखिये वहीं उंची नीच जातिवादी मानसिकता से ऊपर उठिये और बराबरी की भावना अपनाइये। समाज की रक्षा के लिए ईश्वर खुद नहीं आते, न किसी की आत्मा समाज की रक्षक बनेगी..बल्कि ये सिद्धांत ही रक्षक बनेंगे।

बाबा साहब ने कहा कि आज दुनिया परिवर्तन की ओर बढ़ रही है लेकिन ये बदलाव खूनी बहा कर लाने की कोशिश की जा रही है जबकि खून के बदले खून ही बहेगा.. खूनी क्रांति के जरिये आप स्थाई शांति की कल्पना भी नहीं कर सकते है। इसलिए केवल बौद्ध धर्म के सिद्धांत ही विश्व में शांति ला सकते है। लोगो को सुरक्षित रख सकते है, और यहीं कारण है कि बाबा साहब को बौद्ध धर्म सबसे प्रिय हो गया था।

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