Top 5 Dalit news: दलित चाहे कितना भी शिक्षित हो जायें, लेकिन मनुवादी मानसिकता वालों के लिए वो केवल दलित ही रह जाते है.. ऐसे लोग भला ये कैसे हजम कर पायेंगे कि सरकार दलितों से लिए कोई ठोस कदम उठाये, या फिर अगर किसी ने आवाज उठाने की कोशिश भी की तो बदले में केवल मिलता है शोषण..प्रताड़ना..समाजिक बराबरी आज भी केवल एक सपना ही है। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाले घटनाओं के बारे में बात करेंगे जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है।
कर्नाटक तकी राजनीति में गर्माहट
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला कर्नाटक से है, जहां की राजनीति में इस वक्त उथल पुथल मची हुई हुआ, और ऐसा करने वाले है एक दलित नेता और एक्साइज मिनिस्टर आर.बी. थिम्मापुर। जिन्होंने विपक्ष के खिलाफ संगीन आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें करप्सन जैसे संगीन मामलों में केवल इसीलिए फंसाया जा रहा है क्योंकि वो एक दलित समाज से आते है। इतना ही नहीं विपक्ष के रवैए से नाराज होकर उन्होंने ऐलान किया है कि वो चाहते है कि इसपर निष्पक्ष जांच हो और अगर उनपर लगे आरोप सही साबित होते है तो अपने पद से इस्तीफा दे देंगे।
कर्नाटक में इस वक्त कांग्रेस के सिद्धारमैया की सरकार है, ऐसे में विपक्ष में बैठी बीजेपी ने आबकारी मंत्री पर 6 हजार करोड़ का घोटाला करने और अवैध लाइसेंस जारी करने का आरोप लगाया है. लेकिन थिम्मापुर ने अपने ऊपर लगे आरोपो को लेकर बीजेपी पर पलटवार किया है, उन्होंने कहा कि CL 4 और CL 7 लाइसेंस को छोड़कर उन्होंने कोई लाइसेंस जारी नहीं किया है लेकिन कोविड 19 के दौरान बीजेपी ने 1,404 लाइसेंस जारी किए थे, तब पूर्व आबकारी मंत्री गोपालाया ने कितने पैसे रिश्वत लिये थे।
उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार रोकने के लिए और पारदर्शिता लाने के लिए आरक्षण के साथ ई-नीलामी शुरू की गई है। लेकिन फिर भी विपक्ष के नेता चालवडी नारायणस्वामी अपनी बात पर अड़े रहे है। ऐसे में थिम्मापुर ने सीधे तौर पर कहा कि केवल दलित नेता होने के कारण हील उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। अब देखना ये होगा कि इन आरोपो को लेकर क्या सरकार सीबीआई जांच की मांग स्वीकार करेगी।
बिहार के वैशाली में महादलित महिला का सड़क पर अंतिम संस्कार
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला बिहार के वैशाली जिले से है, जहां दलित जाति से होने के कारण मरने के बाद भी सवर्ण समाज ने शमशान घाट में भी अंतिम संस्कार के लिए जगह नहीं दी..जिससे मजबूरी में शव का अंतिम संस्कार बीच सड़क पर ही करना पड़ा। ये घटना वैशाली जिले के गोराउल इलाके के सोंधो-वासुदेव गांव की है, जहां महादलित समुदाय के आने वाली 91 साल की झपसी मांझी की मृत्यु हो गई थी, जब उनके परिवार वाले औऱ गांव वाले अंतिम संस्कार के लिए उन्हें शमशान घाट से जा रहे थे तो गांव के कुछ प्रभावशाली लोगो ने शमशान का रास्ता रोक लिया, जिससे गुस्सायें ग्रामीणों ने तय किया कि वो सड़क पर ही अंतिम संस्कार कर देंगे, और उन लोगो ने वैदिक मंत्रों के साथ सड़क पर ही अंतिम संस्कार कर दिया।
इस पूरी घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है, वहीं जब इसकी जानकारी प्रशासन ने तुरंत संज्ञान लिया और उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन कर के इस मामले की निष्पक्ष जांच करने का आश्वासन दिया है। वहीं इस घटना से गांव के दलित समाज काफी दुखी है, उन्होंने कहा कि हमारे पास न तो जमीन है, और न ही घर, अब तो अंतिम संस्कार के लिए शमशान जाने का हक भी छीन रहे है, ऐसे में कैसे दलितों का उत्पीड़न रूकेगा। सरकार को कुछ न कुछ उपाय तो करना ही चाहिए।
मुरादाबाद में भेदभाव करने वाले टीचर का कुटाई
3, दलितों से जुड़ा अगला मामला यूपी के मुरादाबाद से है, जहां जातिगत भेदभाव करने वाले एक स्कूल टीचर के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा भड़का औऱ गांव वालो ने भेदभाव करने वाले टीचर को जमकर कूटा.. ये घटना मुरादाबाद के एक स्कूल की है, जहां पढ़ाने वाले टीचर अशोक सूर्यवंशी पर स्कूल के बच्चों ने आरोपी लगाया था कि टीचर ने उनके सामने बाबा साहब का अपमान करते हुए उनके पोस्टर को फाड़ दिया औऱ एससी एसटी बच्चों को जातिसूचक बातें भी कहीं थी।
इस घटना की जानकारी जब बच्चों ने गांव वालो को दी तो गांव वालों ने गुस्सा जाहिर करते हुए टीचर को पकड़ कर अच्छी तरह से कुटाई कर दी,,, इस पूरी घटना का एक वीडियो भी शोसल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जिसमें जब गांव वाले टीचर से बात करने की कोशिश करते है तो वो उनसे ही बहस करने लगता है, बस फिर क्या था, गांव वालों का गुस्सा भड़क गया और सबने टीचर को बता दिया कि बाबा साहब का अपमान करने वालों के साथ क्या हश्र होना चाहिए…हालांकि अभी तक इस मामले में पुलिस कार्यवाई नहीं की गई है.. वीडियो के वायरल होने के बाद पुलिस का क्या रिएक्शन होगा ये भी देखने वाली बात होगी।
सोनभद्र में दलित युवक की आंखे फूटी
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला यूपी के सोनभद्र से है, जहां एक दलित युवक को रामलीला में रावण बनने की कीमत अपनी आंखे खो कर चुकानी पड़ी है। ये घटना 13 नवम्बर 2025 की है, पीड़ित सुनील कुमार के परिवार वालों ने पुलिस एफआईआर कराते हुए कहा कि सुनील पिछले कई सालों ने रामलीला में रावण का रोल प्ले कर रहा था, लेकिन 13 नवंबर को जब इसका समापन था, तब उस दौरान सवर्ण समाज से आने वाले नैतिक पांडे ने राम का किरदार निभाया है…समापन के दौरान रान को केवल एक ही तीर रावण को मारना था, चुंकि एक दलित रावण बना हुआ था..इसलिए जातिगत भेदभाव और जलन के कारण पीड़ित पर कई तीर चलाये, जिसमें एक तीर उसकी दाहिनें आंख में लगा था।
इस हमले के कारण सुनील कुनार की आंखे खराब हो गई और वो अंधा हो गया है। पीड़ित के भाई शिवमलाल कुमार ने नैतिक पांडे के साथ साथ रामलीला ऑर्गनाइज़र रामसनेही सिंह पर भी आरोप लगाया है कि सुनील कुमार की डिमांड के कारण उसे रावण का रोल दिया गया था, लेकिन ऑर्गनाइज़र नहीं चाहता था कि वो रावण बनें। पुलिस ने इस मामले में जांच शुरु कर दी है…और दोवो आरोपियो की तलाश शुरु कर दी है, हैरानी की बात है कि अब तक तो दलितों और पिछड़ों को मंदिरों में जाने से रोका जाता था, लेकिन अब तो वो उनसे जुड़े किरदार भी निभाने से कुछ लोगो को हर्ज होने लगा है।
कोयंबटूर में जातिगत भेदभाव का मामला
5, दलितों से जुड़ा अगला मामला तमिलनाडु के कोयंबटूर से है, जहां एक दलित जाति से ताल्लुक रखने वाले मैनेजर के ट्रांसफर होने के बाद DMK से जुड़े LPF यूनियन के सचिव एस ससिराज ने उसके पूरे ऑफिस को गाय के गोबर से पुतवा कर साफ करवाया.. वो भी मैनेजर के सामने ही.. इतनी ही नहीं सचिव ने मैनेजर को कीड़ा कहते हुए कहा कि अच्छा हुआ वो ब्रांच छोड़कर चला गया।
दरअसल तमिलनाडु स्टेट ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (TNSTC) मेट्टुपालयम ब्रांच-1 से जुड़े एक बस ड्राइवर ने सचिव के खिलाफ 23 जनवरी को आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी कि TNSTC में पिछले कुछ सालों से लगातार भेदभाव जारी है, खासकर जब ससिराज ने ट्रैफिक कंट्रोलर के तौर पर जातिगत भेदभाव करते हुए SC समुदाय के बस कर्मचारियों को लंबे रूट पर भेजा करता था, और न तो उन्हें छुट्टी दी जाती थी और छोटे रूट पर ड्यूटी लगाने के बदले रिश्वत लिया करता था।
उसका राजनीति प्रभाव इतना था कि वो किसी ब्रांच मैनेजर की बात तक नहीं सुनता था और इस कारण पिछे डेढ़ सालों में 6 ब्रांच मैनेजर बदल चुके है। लेकिन मौजूदा ब्रांच मैनेजर डी प्रकाशकुमार दलित जाति से आते है और उन पर भी ससिराज ने मनमानी करनी चाही, लेकिन मैनेजर ने इंकार कर दिया जिससे गुस्साये ससिराज ने मैनेजर का फिर ट्रांसफर करवा दिया। इस पूरी घटना के सामने आने के बाद उच्च अधिकारियों ने ससिराज को अस्थायी रूप से सस्पेंड कर दिया है। इसकी जांच जारी है। वहीं ससिराज ने अपने ऊपर लगे आरोपो को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वो केवल हाइजीन मेंटेन करने के लिए ये सब कर रहा था, उनपर लगे आरोप पूरी तरह से झूठे है। हालांकि जांच के बाद सब साफ हो ही जायेगा।



