Top 5 Dalit news: मेरठ में दलित युवती के अपहरण से मचा हड़कंप, अखिलेश यादव ने सरकार को घेरा

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Top 5 Dalit news: दलितों और पिछड़ों को जीवन जीने के लिए हर दिन एक लड़ाई लड़नी पड़ती है, लेकिन इसमें सबसे बड़ी लड़ाई सम्मान के लिए ही है लेकिन बावजूद इसके जातिवादी दबंगों के हौसले इतने बुलंद है कि वो सरेआम दलित बहु बेटियों को अपमानित करते है, और कानून मूक बनी रहती है।

मेरठ में दलित महिला को तेजधार हथियार से हमला

1, दलितों से जुड़ा पहला मामला उत्तर प्रदेश के मेरठ से है जहां खेतों ने जा रही एक दलित महिला सुनीता की पहले तो तेजधार हथियार से हत्या की गई और फिर उसकी 20 साल की बेटी रूबी का अपहरण कर लिया गया। ये घटना मेरठ के सरधना थाना क्षेत्र के कपसाड गांव की है। जहां किसी पुराने विवाद से गुस्साए  गांव के ही पारस सोम और सुनील ने दोनों मां बेटी को अकेला पाया तो अपने कई साथियों के साथ मिलकर महिला पर तेजधार हथियार बलकटी से सिर पर हमला कर दिया। ये हमला इतना घातक था कि दलित महिला की मौके पर ही मौत हो गई वहीं महिला पर हमला करने के बाद आरोपी उसकी बेटी को जबरन बाइक पर उठा ले गए।

इस घटना से पूरे गांव में काफी तनाव फैल गया है। ग्रामीणों ने मृतक महिला के शव का पोस्टमार्टम तक कराने से इनकार कर दिया और महिला को लेने आई एंबुलेंस के साथ तोड़फोड़ की। पीड़ित परिवार का कहना है कि जब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती तब तक वो पोस्टमार्टम नहीं कराएंगे। उन्होंने जल्द से जल्द अपहृत लड़की की तलाश करने की मांग की है। इस जघन्य अपराध को लेकर एक तरफ भीम आर्मी भी खुद पड़ी है तो वहीं सपा पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इस हमले को बेहद गंभीर बताया तो वहीं बसपा सुप्रीमो ने बेहद शर्मनाक हमला कहा। इस मुद्दे पर ग्रामीणों का गुस्सा देखने हुए पुलिस की 5 टीम गठित कर गांव में तैनात की गई है, वहीं पुलिस आरोपियों की तलाश में जुट गई है।

ग्वालियर के दलित vs ब्राह्मण विवाद के आई अन्य जातियां

दलितों से जुड़ा अगला मामला मध्य प्रदेश के ग्वालियर से है, जहां अब दलित वर्सेस ब्राह्मण विवाद अब अन्य जातियों के लिए भी जातिगत विवाद बनता जा रहा है। एक तरफ बाबा साहब का अपमान करने वाले है ब्राह्मण समाज के लोग है तो वहीं दूसरी तरफ बाबा साहब के सम्मान के लिए लड़ते बहुजन समाज। लेकिन अब ये लड़ाई सम्मान से ज्यादा जातिगत होती जा रही है। दरअसल बीते साल फरवरी महीने में ग्वालियर हाई कोर्ट परिसर में बाबा साहब की मूर्ति स्थापित करने के एक ज्ञापन सौंपा गया था जिसपर अनुसूचित जाति, ठाकुर, पिछड़ी जाति और ब्राह्मण समेत कई और जातियों के वकीलों के हस्ताक्षर थे, लेकिन जब मूर्ति स्थापित होने का समय आया तो इसपर राजनीति शुरू कर दी गई।

जो मामला कोर्ट के अन्दर निपट सकता था उसे इतना बड़ा बना दिया गया, इसपर राजनीति शुरू हो गईं । वहीं दलित समाज के वकील का कहना है कि इस मुद्दे को जानबूझ कोर्ट के बाहर लाया गया ताकि सबका ध्यान बाबा साहब की प्रतिमा स्थापित करने से हट जाएं। वहीं रही सही कसर हाईकोर्ट के वकील अनिल मिश्रा ने पूरी कर दी है जब उनसे बाबा साहब पर संविधान निर्माता होने को लेकर ही विवादित टिप्पणी की, उनका पोस्टर जलाया, जिसने मूर्ति विवाद को तो जैसे लगभग भुला ही दिया है। हैरानी की बात है ये सबूत है कि कैसे दलितों को एजेंडा तैयार करके उन्हें अलग थलग करने की साजिश की जा रही है।

विदिशा में जिला कलेक्टर के बिगड़े बोल

दलितों से जुड़ा अगला मामला मध्य प्रदेश के विदिशा से है जहां एक जिला कलेक्टर सरेआम लोगों के सामने अनुसूचित जाति से आने वाले अधीक्षक को जूते से मारने की बात कर रहे हैं। इस पूरी घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें विदिशा जिले के कलेक्टर अंशुल गुप्ता सरेआम लोगों की भीड़ में अधीक्षक चैन सिंह चिढ़ार को गुस्से में जूता से मारने की बात कर रहे है। इस घटना तो लेकर बहुजन समाज के लोगों ने काफी गुस्सा है। भीम आर्मी  के लोगों ने कलेक्टर को निलंबित करने की मांग करते हुए कहा कि एक ऊंचे पद पर बैठा व्यक्ति अगर जातिवादी मानसिकता रखता है तो वो सबसे बड़ा खतरा है।

इस तरह की भाषा का प्रयोग वो भी एक दूसरे अधिकारी के लिए केवल एक असंवैधानिक बयान नहीं, बल्कि एक अधिकारी की कुर्सी पर बैठी हुई खुली जातिवादी मानसिकता का प्रदर्शन है। कलेक्टर को माफी मांगनी चाहिए। इसे संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 17 का अपमान बताया गया जिसके तरह दलितों की भावनाओं को ठेस पहुंचाया गया। इस तरह से एक दलित अधिकारी का अपमान सबूत है कि सरकारी पदों पर बैठे दलित कर्मचारियों को भी जातिगत भेदभाव से होकर गुजरना ही पड़ता है। जो सिस्टम में दलितों की स्थिति का आईना दिखा रही है।

बिहार में हॉनर किलिंग का मामला आया सामने

दलितों से जुड़ा अगला मामला बिहार के दरभंगा से है, जहां एक दलित लड़के को एक ब्राह्मण लड़की से प्रेम विवाह करने का खामियाजा अपनी जान दे कर चुकाना पड़ा। दरअसल सोशल मीडिया पर एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है वीडियो में नजर आ रही महिला तनुप्रिया झा है जो कि दरभंगा मेडिकल कॉलेज (DMCH) की छात्रा है और उसने दलित समाज से आने वाले युवक राहुल मंडल से लव मैरेज की थी। लेकिन ये रिश्ता तनुप्रिया के परिवार को जरा भी मंजूर नहीं था और 5 अगस्त 2025 को तनुप्रिया के पिता प्रेम शंकर झा ने सरेआम राहुल के सीने में गोली मार दी जिससे राहुल ने तनुप्रिया की गोद में ही दम तोड़ दिया।

तनुप्रिया अब अकेली रहती है, और अपने पिता, और इस जातिवादी सिस्टम के खिलाफ अकेले लड़ाई लड़ रही है। हैरानी की बात है कि तनुप्रिया का सुहाग उजड़ गया और पुलिस के कानो पर जूं नहीं रेंगी। जातिवाद की बेड़ियों से जकड़ी मानसिकता अब कानून के अंदर भी घुस चुकी है, तनुप्रिया अपने साथ हुए अन्याय के लिए पूरे सिस्टम से लड़ रही है लेकिन कानून भी उसके साथ खड़ा नहीं है। ऐसे में उसे न्याय कब मिलेगा ये कोई नहीं जानता।

अयोध्या में दलित महिला का अपमान

5, दलितों से जुड़ा अगला उत्तर प्रदेश के अयोध्या से है, जो आए दिन दलित उत्पीड़न की खबरों के लिए प्रचलित होता जा रहा है। ताजा मामला अयोध्या जिले के बाबा बाजार थाना क्षेत्र के कसारी गांव का है जहां मामूली कहासुनी होने पर एक दलित महिला को दिनदहाड़े न केवल जातिसूचक गालियां दी गई बल्कि महिला को बुरी तरह से पीटा भी गया। पीड़ित महिला कृष्णा ने रुदौली थाना में तहरीर दी कि तहसील दिवस कार्यक्रम के दौरान जब महिला भी कार्यक्रम में शामिल होने गई तो गांव के ही बिजेंद्र बहादुर सिंह उर्फ बब्बन महिला को काफी उल्टा सीधा कहना शुरू कर दिया, जिससे महिला ने उसका विरोध किया।

लेकिन इस विरोध से तिलमिला कर आरोपी ने महिला के साथ बुरी तरह से मारपीट की। पीड़िता ने कहा कि इतने सारे लोगों के सामने इस तरह से अपमानित किए जाने से  उसे मानसिक और शारीरिक रूप से आघात पहुंचा है। इस मामले में पुलिस ने केस दर्ज करके मामले की जांच शुरू कर दी है। क्षेत्राधिकारी रुदौली ने पीड़िता को आश्वासन दिया है कि वो आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर लेंगे। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच में जुटी हुई है।

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