BNS Section 196 in Hindi: भारतीय दंड संहिता (BNS) की धारा 196 धर्म, जाति, भाषा या समुदाय के आधार पर विभिन्न समुदायों के बीच घृणा या शत्रुता को बढ़ावा देना, या सार्वजनिक शांति भंग करने वाला कोई भी कार्य करना अपराध बनाती है, तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस (Bhaarateey dand sanhita) में व्यभिचार के बारे में क्या कहा गया है।
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धारा 196 क्या कहती है? BNS Section 196 in Hindi
जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस की धारा 196 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। बीएनएस (BNS) की धारा 196, यह धारा मानहानि को परिभाषित करती है। इसके अंतर्गत यदि कोई व्यक्ति शब्दों, संकेतों या चित्रों के माध्यम से किसी अन्य व्यक्ति की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाता है, तो उसे मानहानि माना जाता है। जिसके लिए तीन वर्ष तक का कारावास, अपमान या दोनों हो सकते हैं। यह धारा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध नहीं लगाती, बल्कि सामाजिक संस्थाओं को प्रभावित करने वाले कृत्यों का निषेध करती है।
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बीएनएस धारा 196 की महतवपूर्ण बातें
- शत्रुता को बढ़ावा देना – यह धारा उन व्यक्तियों को दंडित करती है जो भाषण या लिखित भाषा, संकेतों या किसी अन्य तरीके से धर्म, मूलवंश, भाषा, जाति या समुदाय के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच घृणा या दुर्भावना को बढ़ावा देते हैं।
- सार्वजनिक शांति भंग करने वाले कार्य – ऐसे कार्य जो सार्वजनिक शांति भंग करते हैं, या किसी समूह को दूसरे के विरुद्ध हिंसा करने के लिए उकसाते हैं, भी इस धारा के अंतर्गत अपराध हैं।
- धार्मिक स्थलों पर अपराध – यदि अपराध किसी पूजा स्थल पर होता है, तो सज़ा और भी कठोर हो सकती है।
- आधुनिक मीडिया का उपयोग – यह धारा न केवल पारंपरिक मीडिया पर लागू होती है, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक संचार सहित सभी आधुनिक मीडिया के माध्यम से किए गए ऐसे कृत्यों को भी आपराधिक बनाती है।
- उद्देश्य – इस धारा का मुख्य उद्देश्य भारत की एकता और सामाजिक सद्भाव की रक्षा करना है, विशेष रूप से भारत जैसे विविध जनसंख्या वाले देश में, जहाँ ऐसे कृत्य गंभीर संघर्षों का कारण बन सकते हैं।
बीएनएस धारा 196 की सजा
इसके अलवा आपको बता दें कि धारा (Section) 196 के तहत दोषी पाए जाने पर सजा का प्रावधान है कि अगर दोषी ने हमला, बाधा या बल प्रयोग किया तो उसे तीन वर्ष तक का कारावास या जुर्माना या दोनों हो सकता है।



