Dr Ambedkar and constitution: 299 सदस्य, पर अंबेडकर ही क्यों? जानिए संविधान निर्माण के वो 5 अनकहे सच

Ambedkar and Constitution, Article 370
Source: Google

Dr Ambedkar and constitution: हम सभी जानते है कि संविदान सभा का सदस्य बनने के लिए बाबा साहब को काफी पापड़ बेलने पड़े थे, उन्हें विश्वास था कि देश का संविधान लिखने के लिए उनकी उपस्थिति बेहद जरूरी है क्योंकि सामाजिक मुद्दो और बराबरी को लेकर जो विचार उनके थे वो किसी के नहीं थे, पहले महाराष्ट्र में फेल हुए तो बंगाल गए, ताकि उन्हें संविधान सभा का हिस्सा बनाया जा सकें.. आजादी के बाद बंटवारा और फिर से सभा की सदस्यता के भंग होने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी, वो अपनी जिद पर अड़े रहे.. और ऐसे समय में महात्मा गांधी ने उनका समर्थन किया था।

जिसके लिए बाबा साहब काफी शुक्रगुजार भी रहे.. आजादी के बाद पूरे संविधान सभा में करीब 299 सदस्य थे, तीन अलग अलग समिती थी, वहीं ड्राफ्टिंग कमिटी में भी बाबा साहब के अलावा 6 और सदस्य थे, लेकिन फिर भी केवल बाबा साहब को ही क्यों संविधान निर्माता कहा जाता है। वो ही क्यों भारत के संविधान के जनक कहलाते है। इसके 5 बड़े कारण थे। अपने इस वीडियो में हम जानेंगे कि आखिर वो कौन से पांच कारण है जिसके कारण बाबा साहब अकेले संविधान निर्माता कहलाते है।

मसौदा समिति के अध्यक्ष (Chairman of the Drafting Committee)

जब संविधान सभा का गठन हुआ तब तीन समिती बनी थी, जिसमें पहली समिती संविधान सभा समिति थी जिसके अध्यक्ष डॉ राजेंद्र प्रसाद थे, दूसरी समित थी संविधान सलाहगार समिति जिसके अध्यक्ष सरदार वल्लभ भाई पटेल थे, और तीसरी थी मसूदा समिती.. जिसे ड्राफ्टिंग कमिटी भी कहा गया, उस समिती के अध्यक्ष थे बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेडकर। मसूदा समिति का काम था कि वो संविधान की रिट्टेन ड्राफ्टिंग करेंगे। इस समिती में बाबा साहब को मिलाकर 7 सदस्य थे। लेकिन हैरानी की बात है कि सबसे ज्यादा काम बाबा साहब को ही करना पड़ता था। खुद प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने कहा था कि वो दिन रात अकेले अंबेडकर को संविधान की ड्राफ्टिंग तैयार करते हुए देखते थे।

बाबा साहब ने अपने हाथों से 141 दिनों तक संविधान का मसौदा तैयार

जो कि बिना रूके काम किया करते थे, जबकि बाकि सदस्य गायब रहते थे। इसमें दूसरे सदस्य थे एन. गोपालस्वामी अय्यंगार, जिन्होंने  उन्होंने आर्टिकल 370 का ड्राफ्ट बनाने में अहम भूमिका निभाई, अगला नाम है अल्लादी कृष्णास्वामी अय्यर का, कानूनी ढांचे और संवैधानिक स्पष्टता को तैयार करने में अहम भूमिका निभाई, चौथा नाम डॉ. के. एम. मुंशी  है, सैयद मोहम्मद सादुल्ला , बी. एल. मित्तर, जिन्होंने स्वास्थ्य को लेकर इस्तीफा दे दिया था, और बाद में नकी जगह एन. माधवा राव ने ली, जिसके बाद आते है डी. पी. खेतान, जिनकी 1948 में मौत हो गई थी, जिसके बाद . उनकी जगह टी. टी. कृष्णामाचारी ने ली थी। बाकि के सदस्य उनकी मदद तो करते थे, लेकिन इनकी भूमिका पूरी तरह से सक्रिय कभी भी रही ही नहीं थी, और बाबा साहब ने अपने हाथों से 141 दिनों तक संविधान का मसौदा तैयार किया था।

 संविधान बनाने के लिए सबसे योग्य व्यक्ति

संविधान बनाने के लिए सबसे योग्य व्यक्ति माने गए थे बाबा साहब.. दरअसल संविधान बनाने का दायित्व ऐसे हाथों में दिया जाना था जो कानून से लेकर राजनीति तक की सटीक जानकारी रखता हो.. दुनिया अलग अलग देशों के संविधान की पेचिदिगियों को समझ कर उसमें जो जरूरी है उन्हें मसौदे में शामिल कर सकें, जो कि भारतीय संस्कृति और सामाजिक व्यवस्था के आधार पर हो। ऐसे में इस बात पर भी विचार हुआ कि किसी विदेशी संविधान एक्सपर्ट को बुला कर उनसे तैयार करवाया जाये, लेकिन देश कि स्थिति को भावनात्मक तरीके से समझने के लिए किसी भारतीय का होना जरूरी था, और ऐसे में बाबा साहब से ज्यादा काबिल उन्हें कोई नजर नहीं आया।

सामाजिक न्याय का समावेश (Inclusion of Social Justice)

तीसरा कारण था कि दुनिया के संवैधानिक मसौदे को बेहतर तरीके से समेटा था, दरअसल संवैधानिक सलाहकार बीएन राव ने अलग अलग देशों के संविधान पर गहन रिसर्च की थी और उनसे लेकर एक कच्चा मसौदा तैयार किया था, लेकिन वो केवल एक रफ काम था, बाबा साहब ने इस मसौदे को फाइनल रूप देने का काम किया था। इस मसौदे को लेकर बाबा साहब ने संविधान सभा में 17 दिसंबर 1948 में चर्चा की थी, जिसके बाद ही बाबा साहब ने इसमें बदलाव करके पूर्ण रूप दिया था।

बाबा साहब को थी सबसे ज्यादा जानकारी 

एक बेहतर कानून एक्पर्ट- बाबा साहब एक बेहतर वकालत के ज्ञाता भी थे, उन्होंने ब्रिटेन से कानून की पढ़ाई पूरी की थी, और वो ही अकेले एक ऐसा संविधान बना सकते थे, 10 से ज्यादा लेबर कानून ड्राफ्ट किये थे। संविधान सभा की कार्यवाई में भी सारे जवाब बाबा साहब ही दिया करते थे, यानि कि उन्हें सबसे ज्यादा जानकारी थी।

2473 संशोधनो को मंजूरी दी थी, 5162 संशोधनो को रिजेक्ट

जब बाबा साहब ने इसका फाइनल ड्राफ्ट तैयार कर लिया तब राष्ट्रपति के साथ साथ देश की जनता के सामने भी उनकी अनुमति के लिए ये ड्राफ्ट रखा गया था, तब इसमें जनता के किये गए करीब 7635 संशोधन पारित हुए थे, जिसमें बाबा साहब ने 2473 संशोधनो को मंजूरी दी थी, 5162 संशोधनो को रिजेक्ट कर दिया था। बाबा साहब असल में संविधान के वास्तुकार थे, जिन्हें खुद संविधान सभा ने माना था। बाबा साहब कई ऐसे मुद्दों में सर्वसम्मति बनाने की कोशिश करते थे।

सबके अधिकारों को बराबरी का हक़

जिन्हें लोगो बाकि के लोगों में वैचारिक मतभेद हो जाता था, लेकिन बाबा साहब शांति से सवालों का जवाब देते और समस्याओं का निपटारा करते थे। पूरे संविधान को फाइनल रूप देने में 2 साल 11 महीने और 18 दिनों का समय लगा था, बाबा साहब ने एक ऐसा संविधान तैयार किया था जो किसी भी तरह के भेदभाव के ऊपर था, जिसमें सबको कानूनी हक मिले और सबके अधिकारों को बराबरी दी गई। इन 5 कारणों से आप भी समझ गए कि आखिर क्यों सिर्फ बाबा साहब अंबेडकर ही भारतीय संविधान के जनक क्यों कहलायें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *