Top 5 Dalit news: नूंह में दलित युवक से निकाह के बाद युवती को जान का खतरा, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल

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Top 5 Dalit news: दलितों का शोषण तब तक होता रहेगा जब तक वो खुद आपस में बंटे रहेंगे, जातिवादी आतंकियों के लिए दलितों में हर वो इंसान शामिल है जो एसी एसटी और ओबीसी है, लेकिन यहां विडंबना ये है कि दलितों को उनकी ही कैटिगरी में बांटा गया है, ताकि न तो वो कभी एकजुट हो पाए और न कभी वो मजबूत होंगे। तो चलिए आपको इस लख में पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में बतायेंगे जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है।

आजाद ने यूजीसी के नए नियमों के लिए की महारैली

1, दलितों से जुड़ा पहला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद को लेकर है, जिन्होंने यूजीसी के नए नियमों को लेकर आगरा के बाद अब कन्नौज में भी संवैधानिक अधिकार बचाओ, भाईचारा बनाओ” महारैली की है। यूजीसी के नियमों पर लगे रोक को लेकर देश भर में बहुजन छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है, ऐसे में अब आजाद भी इस लड़ाई में खुल कर कूद पड़े है।

उन्होंने पहले ही ये चेतावनी दी थी कि यूजीसी के नियमों में कोई बदलाव नहीं होगा, अगर हुआ तो 85 प्रतिशत बहुजन समाज के लोग अपनी ताकत दिखाने के लिए मजबूर हो जाएंगे, वहीं एक तरफ आजाद दलितों के अधिकारों की लड़ाई में दलितों के साथ खड़े है तो वहीं उनकी कथित एक्स प्रेमिका रोहिणी घावरी ने फिर से आजाद को जानकार लपेटा। घावरी ने सीधे आजाद पर संगीन आरोप लगाते हुए कहा कि आजाद बहुजन छात्रों से आंदोलन करवा कर केवल उनका भविष्य खराब कर रहे है।

जबकि घावरी चाहती है कि बहुजन समाज के छात्र पढ़ाई करें, इन आंदोलनों का हिस्सा न बने। आजाद किसी का भला नहीं चाहते है बल्कि अपने मतलब के लिए इस्तेमाल कर रहे है। हैरानी की बात है कि जब सावन यूजीसी का विरोध कर रहे थे तब रोहिणी घावरी को वो सही लग रहे थे, और जब बहुजन समाज अपने अधिकारों के लिए लड़ रहा है तो ये उन्हें राजनीति का हिस्सा लग रहा है। ये क्या सच में वाल्मीकि समाज से है भी या सवर्णों की वकील है। जवाब आप खुद दीजिए।

नूहं में दलित से शादी करने पर गांव से किया बहिष्कार

2, दलितों से जुड़ा अगला मामला हरियाणा के नूहं जिले है, जहां एक दलित युवक से शादी करने के बाद अब एक मुसलमान महिला को ऑनर किलिंग का डर सताने लगा है। पीड़ित मुस्लिम महिला ने खुद एक वीडियो जारी कर मदद की गुहार लगाई है। ये घटना नूंह जिले के फिरोजपुर झिरका क्षेत्र के एक गांव पाटला शाहपुरी का है। पीड़िता नजराना ने वीडियो जारी बताया कि वो बालिग है, और अपनी मर्जी से उसने मोहित से कोर्ट मैरेज की थी। लेकिन इंटरकास्ट शादी के कारण मोहित और उसके परिवार को जबरन गांव से बाहर निकल दिया गया।

इतना ही नहीं विधायन मामन खान और नजराना के घरवालों की तरफ से लगातार धमकियां मिल रही है। वहीं बालिग होते हुए भी एक फर्जी डाक्यूमेंट्स दिखा कर उसे नाबालिग साबित करने को कोशिश की जा रही है। पीड़िता ने वीडियो में अपील की है वो आरोपी पक्ष के खिलाफ कोई एक्शन ले और उसके पति और ससुराल वालों की सुरक्षा के लिए कोई पुख्ता इंतजाम किए जाए। साथ ही मोहित के परिवार को फिर से गांव में बसने की अनुमति दिलाए।

हालांकि नजराना के वीडियो के सामने आने के बाद एसडीएम फिरोजपुर झिरका लक्ष्मी नारायण का बयान सामने आया है, उन्होंने बताया कि वीडियो के आधार पर जब गांव में जांच की गई तो किसी ने सामाजिक बहिष्कार की बात स्वीकार नहीं की। केवल ये बताया कि मोहित का परिवार अचानक गांव छोड़कर चला गया। फिलहाल इस पूरे मामले पर नजर रखी जा रही है। अब देखना होगा कि विधायक का नाम सामने आने के बाद पुलिस इस वीडियो पर क्या एक्शन लेती है।

इंटरकास्ट शादी करने पर लड़की की हत्या

3, दलितों से जुड़ा अगला मामला तमिलनाडु के विल्लुपुरम से है, जहां एक दलित युवती को इंटरकास्ट शादी करने की कीमत अपनी जान दे कर चुकानी पड़ी, क्योंकि वो शादी में अपने साथ दहेज लेकर नहीं आई थी। मृतका देवाजेसी प्रिया के परिवारवालों ने उसके पति और ससुराल वालों पर संगीन आरोप लगाते हुए कहा कि प्रिया एक दलित क्रिश्चियन थी, और उसने साथ पढ़ने एम वसंत कुमार से तीन महीने पहले ही शादी की थी, जो कि हिंदू वन्नियार समुदाय से है।

इस शादी की खबर लड़के के परिवार वालो को थी लेकिन लड़की के परिवार वालो से छिपा कर रखा गया था, प्रिया के बड़े भाई ए रिचर्ड ने शिकायत दर्ज कराते हुए कहा कि प्रिया को दहेज के लिए लगातार उसका पति, उसका भाई भक्तवचलम, उसके सास ससुर मुरुगन और लक्ष्मी प्रताड़ित कर रहे थे।

31 जनवरी को खुद प्रिया ने अपनी चाची को फोन करके ससुराल वालों की करतूत बताई थी, और उसके एक घंटे बाद ही उसकी मौत की खबर आई। प्रिया के भाई ने अपनी बहन की हत्या किये जाने का आरोप लगाया है। वहीं पुलिस ने इस मामले में काफी लचर रवैया अपनाया और दहेज उत्पीड़न और जातिगत दुर्व्यवहार के लिए कार्यवाई करने के बजाये BNS की धारा 194 (3) के तहत मामला दर्ज करके उसके पति को गिरफ्तार कर लिया, जिससे नाराज प्रिया के मायके वालो ने शव लेने से ही इंकार कर दिया है। अब देखना ये होगा कि मामले को तूल पकड़ता देख पुलिसा का क्या एक्शन होता है।

मैनपुरी में दलित महिला घरेलू सहायिका के साथ प्रताड़ना

4, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के मैनपुरी से है जहां मेहनत के पैसे मांगने पर दलित महिला पर चोरी का आरोप लगा कर उससे मारपीट की गई। ये घटना मैनपुरी के भोगांव थाना क्षेत्र के मोहल्ला शहीद की रहने वाली रेखा देवी ने तहरीर दी कि वो घरेलू सहायिका के रूप में कई घरों में काम करती है। जिसमें वो अपने ही मोहल्ले में राज किशोर शाक्य के यहां भी झाड़ू पोछा का काम करती थी, राज किशोर ने पिछले 5 महीनों से उसे पैसे नहीं दिए थे, पीड़िता ने अपने मेहनत के करीब 20 हजार रुपए मांगे तो राज किशोर की पत्नी ने उसपर गहने चोरी करने का आरोप लगा कर उसे जातिसूचक गालियां दी और उसे मारपीट कर भगा दिया।

पीड़िता ने पुलिस में भी शिकायत दर्ज करानी चाही तो वहां भी उसकी जाति को लेकर उसके साथ दुर्व्यवहार किया गया। जिसके बाद पीड़िता ने एसपी ऑफिस में अर्जी दी। शिकायत मिलते ही एसपी ने तुरंत इस मामले की जांच के आदेश दिए है। भोगांव थाना प्रभारी निरीक्षक प्रदीप पांडे इस मामले की जांच में जुट गये है। जांच के बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी।

कर्नाटक में आबकारी मंत्री के पक्ष में आये डिप्टी सीएम

5, दलितों से जुड़ा अगला मामला कर्नाटक के बैंगलुरु से है, जहां एक दलित आबकारी मंत्री के इस्तीफे के लिए BJP-JD(S) के मंत्रियों ने उनके घर के बाहर राज भर प्रदर्शन किया..जिसे लेकर कर्नाटक के डिप्टी सीएम शिवकुमार ने आवाज उठाते हुए विपक्ष की मंशा पर सवाल उठाये है। उन्होंने कहा कि केवल दलित होने के कारण आबकारी मंत्री आर.बी. थिम्मापुर पर भ्रष्टाचार जैसे संगीन आरोप थोपे गए है, इतना ही नहीं सफाई देने के बाद भी विपक्ष लगातार हमलावर हो रहा है, जो कि लोकतंत्र की हत्या के बराबर है। उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि “BJP के कार्यकाल में PSI भर्ती में अनियमितताएं हुई थीं।

तब किसने इस्तीफा दिया था? BJP नेता अब सिर्फ एक दलित मंत्री को परेशान करने के लिए ऐसे काम कर रहे हैं।” क्योंकि वो दलित मंत्री को आगे बढ़ते हुए देख ही नहीं सकते है। बीजेपी का ये हंगामा केवल दलितो के खिलाप BJP महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) के नए नियमों पर चर्चा न करना पड़े उसके लिए किया जा रहा है। ताकि मूल मुद्दों से ध्यान भटकाया जा सकें।

जबकि बीजेपी के पास दलित नेता के खिलाफ कोई सबूत नहीं है.. केवल शोर शराबा कर अपनी गलतियों को छिपाने की कोशिश की जा रही है। बता दे कि थिम्मपुर पर त 6,000 करोड़ रुपये के एक्साइज घोटाले का आरोप लगा है, लेकिन आबकारी मंत्री ने भी खुल कर कहा है कि दलित होने के कारण उन्हें निशाना न बनाया जाये, अगर सबूत है तो दिखाया जाये, वो खुद इस्तीफा दे देंगे। ऐसे में देखना ये होगा कि विपक्ष अब इसका क्या जवाब देती है।

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