Top 5 Dalit news: सरकार कहती है कि उनकी नजरो में सब एक समान है,. लेकिन क्या वाकई में ऐसा है। तमाम वादों और दावो के बाद भी अगर सबसे पहले किसी को निशाना बनाया जाता है तो वो केवल दलित और पिछड़े समाज के लोग ही है। उन्हें आर्थिक रूप से इतना कमजोर कर दिया जाये कि वो कभी आवाज उठाने की हिम्मत ही न कर सकें, फिर उनका हनन भी होगा तो वो क्या ही कर लेंगे। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितो के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में बतायेंगे, जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है।
हरियाणा में कांग्रेस का धोखा
दलितों से जुड़ा पहला मामला हरियाणा से है, जहां दलितों को लेकर कांग्रेस पार्टी की मानसिकता पर अब तीखे सवाल फिर से उठने लगे है। हरियाणा में महिला कांग्रेस की जनरल सेक्रेटरी ने इस्तीफा देते हुए कांग्रेस पर पैसे लेकर टिकट न देने का संगीन आरोप लगाया है। कांग्रेस से मिले धोखे के कारण महिला ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। महिला ने बताया कि चुंकि वो एक दलित परिवार से आती है और एक शहीद आर्मी ऑफिसर की बेटी है, इसलिए उनके पति के साथ भेदभाव किया गया, जबकि उनके पति से करोड़ो रूपय ऐंठे गए थे केवल टिकट देने के नाम पर।
पीड़ित गौरव कुमार ने जोर देते हुए कहा कि उनका परिवार 56 सालों से कांग्रेस पार्टी से जुड़ा है, लेकिन कांग्रेस के नेताओं ने उसका भी मान नहीं रखा। गौरव ने बताया है कि उनके पास सबूत मौजूद है पैसे देने का.. लेकिन फिर भी केवल दलित औऱ पिछड़े समुदाय से आने के कारण पैसे लेकर भी उन्हें टीकट नहीं दिया गया। महिला के इस खुलासे के बाद कांग्रेस पार्टी सवालों के घेरे में आ गई है, वहीं दलितों के प्रति कांग्रेस की मानसिकता का एक बार फिर से पर्दाफाश हो गया है।
करणी सेना ने दी भीम आर्मी को धमकी
2, दलितो से जुड़ा अगला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद को लेकर है, जैसे जैसे उनकी लोकप्रियता बढ़ रही है, मनुवादियों को अपने इरादों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। जिसके कारण वो उनके कार्यक्रमों को खराब करने और उन्हें की धमकी देने की कोशिश कर रहे है। जाता वीडियो आजाद के 15 मार्च को बाराबंकी में होने वाले प्रोग्राम को लेकर है, जिसे लेकर करणी सेना के प्रदेश महामंत्री अभिनव सिंह ने आजाद को वहां ना आने की धमकी दी है, अभिनव सिंह ने आजाद को खुली चुनौती देते हुए कहा कि वो भले ही बाराबंकी अपने दोनों पैरो पर आयेगा लेकिन जायेगा नहीं।
इसलिए करणी सेना के लोग तैयार रहे आजाद को रोकने के लिए.. वहीं आजाद ने भी इस चुनौती को स्वीकार करते हुए कहा कि जब भी कहीं प्रोग्राम होते है तो उन्हें धमकियां दी जाती है, ये कोई नई बात नहीं है। उन्हें इसकी परवाह नहीं है, एक ही जान है, एक ही बार जायेगी तो फिर डर कर क्या जीना.. आजाद ने अपने ऐलान से साफ कर दिया है कि चंद मुट्ठीभर जातिवादी आतंकियों के डर से वो अपनी लड़ाई बंद नहीं करने वाले है। अब देखना ये होगा कि करणी सेना वाकई में बाराबंकी में क्या कर लेती है।
रोहतक में आंध्र प्रदेश की महिला के साथ धोखाधड़ी
3, दलितों से जुड़ा अगला मामला हरियाणा के रोहतक का है, जहां एक आंध्र प्रदेश की दलित महिला को पहले तो मेट्रीमोनी साइट से फसाया, औऱ फिर उससे झूठी शादी करके उसका यौन शोषण करके उससे लाखों रूपय लूटे। पीड़िता ने बताया कि आरोपी रोहतक के तिलक नगर में रहता है। मेट्रीमोनी साइट पर उसकी मुलाकात हुई थी और दोनो ने करीब 7 महीनों तक बातचीत की थी, आरोपी पीड़िता से मिलने आंध्र प्रदेश गया था, जहां उसने पहले पीड़िता से आर्य समाज होने का दावा कर के झूठी शादी की थी, और उसका यौन शोषण किया था।
वो वहां करीब 4 महीनों तक रहा और फिर रोहतक में घर बनवाने के नाम पर पीड़िता से लाखों 40 लाख रूपय लेकर वापिस लौट आया लेकिन उसके बाद से उसने पीड़िता से कोई कॉंटेक्ट नहीं किया। जिसके बाद मजबूरी में पीड़िता को दलित संगठन से मदद मांगनी पड़ी। सिविल लाइन थाने ने इस मामले को दर्ज कर जांच शुरु की तो आरोपी ने पुलिस के सामने अपनी गलती मानी और महिला को पत्नी स्वीकार कर मामले को रफा दफा करने की कोशिश की, लेकिन वो पीड़िता को अपने घर ले जाने के बजाये एक होटल में ले गया, जहां उसने पीड़िता का यौन शोषण किया औऱ फिर उसे एक बस स्टॉप पर छोड़ कर फरार हो गया।
पीड़िता ने कहा कि एससी एसटी एक्ट मामले में केस दर्ज होने के बाद भी आरोपी अभी तक गिरफ्त में नहीं आया है, ऊपर से पुलिस भी मामले को संगीनता से नहीं ले रही है। वहीं अब भारत मुक्ति मोर्चा महिला संघ से मनीषा बिरला बोहत ने पुलिस को चेतावनी दी है कि अगर जल्द से जल्द आरोपी गिरफ्तार नहीं हुआ तो आगे जो भी होगा उसके लिए पुलिस तैयार रहे। अब देखना ये होगा कि पुलिस क्या कदम उठाती है।
दलित परिवार को मिला 17 साल बाद न्याय
4, दलितो से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से है, जहां एक दलित परिवार को अपने साथ हुई बर्बरता के लिए आखिरकार 17 सालो के बाद न्याय मिला है, लेकिन हास्यस्पद ये है कि आरोपियों को 17 साल बाद सजा तो हुई है लेकिन केवल 3-3 साल की। ये मामला मुरादाबाद से थाना छजलैट क्षेत्र के लदावली गांव का है, पीड़ित मैराजी ने 2009 में की अपनी शिकायत मे कहा था कि 4 अगस्त 2009 को उनके बेटे रवि की कमथपुरी गांव के कुछ लोगो से बहस हो गई थी, उस दौरान गांव में मेला लगा हुआ था।
लेकिन दिन में तो मामला शांत हो गया मगर अचानक रात के वक्त 4 लोग उसके घर में जबरन घुस गए और पूरे परिवार के साथ मारपीट की। इस मामले में पुलिस को जानकारी दी गई, जिसके बाद से इस मामले में सुनवाई जारी है, और आखिरकार 17 सालो के बाद पीड़ित दलित परिवार को न्याय मिला और विशेष न्यायधीर एससी एसटी अधिनियम सुरेंद्र कुमार की अदालत ने चारों आरोपी को 3-3 साल की सजा औऱ 24 हजार रूपय जुर्माना लगाया है। हैरानी की बात है कि आधी उम्र निकल गई पीड़ितो को न्याय के इंतजार में और न्याय भी ऐसा मिला.. वैसे क्या ये न्याय सही था हमें कमेंट करके जरूर बतायें।
आरटीआई की शॉकिंग रिपोर्ट
5, दलितो से जुड़ा अगला मामला तमिलनाडु से है, जहां से दलितों के कल्याण के लिए इस्तेमाल होने वाले पैसो को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। दरअसल आरटीआई की रिपोर्ट ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि राज्य में दलित और आदिवासी कल्याण के लिए इस्तेमाल होने वाले फंड में पिछले 5 सालो में करीब 80 प्रतिशत कटौती कर दी है। जिसके कारण दलितो के कल्याण और उनके विकास के लिए चला रही योजनाओं पर काफी बुरा असर पड़ा है, खासकर Tamil Nadu Adi Dravidar Housing and Development Corporation Ltd द्वारा बनाये जा रहे दलितो के लिए पक्के मकानो की योजनाओं पर।
इतना ही नहीं केंद्र सरकार पर दलितो के लिए इस्तेमाल होने वाले फंड को किसी दूसरी योजनाओं में स्थानांनतरिक करने का भी मामला सामने आया है। आरटीआई की रिपोर्ट सामने आने के बाद केंद्र सरकार की दलितो के प्रति विकास की भावनाएं उजागर होने लगी है। अब सवाल ये है कि आखिर केंद्र सरकार ने किस आधार पर इसमें कटौती की है, और क्या इस रिपोर्ट को लेकर सरकार से कोई सवाल करेगा।



