Top 5 Dalit news: भदोही हत्याकांड पर भड़के चंद्रशेखर आजाद, प्रशासन से की दोषियों को फांसी देने की मांग

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Top 5 Dalit news: दलितों के साथ सदियों से अत्याचार होता आ रहा है लेकिन जब भी किसी ने उसके खिलाफ आवाज उठाने की कोशिश की, या तो उन्हें समाज से बाहर होना पड़ा, या फिर उन्हें हमेशा के लिए मौत की नींद सुला दिया गया। समय भले ही बदल गया हो लेकिन लोगो की विकृत मानसिकता में कोई खास बदलाव नहीं आया है। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितो के साथ होने वाली घटनाओ के बारे में बतायेंगे जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है।

भदोही में दलित युवक के साथ क्रूरता की हद पार

1, दलितो से जुड़ा पहला मामला उत्तर प्रदेश के भदोही जिले से है, जहां मानवता को शर्मसार करने वाली घटना एक दलित युवक के साथ हुई है। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ राज्य में दलितों के लिए कितनी भी योजनाओं का ऐलान कर लें लेकिन न तो दलितो को शोषण रूक रहा है और न ही उनके लिए यूपी का जंगलराज। ताजा मामला भदोही के ज्ञानपुर क्षेत्र के पिपरगांव का है, जहां जातिवादी दबंगो ने एक दलित चौकीदार जैसलाल सरोज को केवल अपनी जाति का दंभ दिखाने के लिए कैरोसीन डालकर जिंदा जला दिया। इस आग से जैसलाल 80 प्रतिशत झुलस गए थे जिसके बाद इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

एक दलित युवक के साथ ऐसी अमानवीय घटना के सामने आने के बाद पूरे इलाके में सनसनी का माहौल है, वहीं इस मुद्दे पर भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद ने भी अपना रोष व्यक्त करते हुए कहा कि दलित .युवक के साथ इस तरह की घटना क्रूरता की पराकाष्ठा है, जो पूरे दलित समाज और कानून व्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी है। उन्होंने पीड़ित परिवार के साथ संवेदनाय व्यक्त करते हुए पीड़ित परिवार के लिए न्याय की मांग करते हुए आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने पीड़ित परिवार के लिए सुरक्षा और उचित मुआवजे की भी मांग की है।

ग्वालियर में दलित संगठन ने निकाला मार्च

2, दलितो से जुड़ा अगला मामला मध्य प्रदेश के ग्वालियर से है, जहां हाईकोर्ट में जातिवादी विकृत मानसिकता को बढ़ावा देते हुए कोर्ट परिसर में बाबा साहब की मूर्ति लगाने पर रोक लगा दी गई थी, लेकिन अब दलित संगठन ने बाबा साहब के अपमान को लेकर डबरा से ग्वालियर तक मोर्चा खोलते हुए एक विरोध मार्च निकालने की कोशिश की थी, लेकिन ग्वालियर की पुलिस प्रशासन ने अपना ताकत प्रदर्शन करने हुआ मार्च को न केवल रास्ते में ही रोका बल्कि सैकड़ों लोगो पर लाठियां बरसाई और उन्हें गिरफ्तार कर लिया..ताकि मार्च ग्वालियर हाइकोर्ट तक जा ही न सकें। इस मार्च का नेतृत्व नेता दामोदर सिंह यादव  कर रहे थे।

उन्होंने सीधे तौर पर कहा है कि कोर्ट परिसर में बाबा साहब की मूर्ति होनी चाहिए, उनका विरोध किया जाना बताता है कि बाबा साहब के प्रति उनके अंदर सम्मान नहीं है, जबकि कानून व्यवस्था उन्ही की देन है। वो तब तक शांत नहीं होंगे जब कर परिसर में मूर्ति स्थापित न हो। वहीं पुलिस के रवैये के बाद से दलित समाज के लोगो का कहना है कि पुलिस को शांत करने के लिए उन्हें भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद को ही मार्च करने के लिए ग्वालियर बुलाना पड़ेगा। अब देखना ये होगा कि क्या आजाद दलित संगठन की पुकार पर ग्वालियर जाते है या फिलहाल उनका सारा ध्यान यूपी चुनाव पर ही है।

यूपी में दलित परिवार का पलायन

3, दलितों से जुड़ा अगला मामला .यूपी के शहाजहांपुर से है, जहां जातिगत उत्पीड़न और दिनदहाड़े घर में घुस कर मारपीट और महिलाओं के साथ होने वाले छेड़छाड़ से तंग आकर एक दलित परिवार गांव छोड़ने को मजबूर हो गया है। ये घटना शाहजहांपुर जिले के करौंदा गांव की है, अछूत कहलावे वाले रामलाल ने पुलिस को तहरीर देते हुए बताया कि गांव में ऊंची जाति वाले अक्सर पिछड़ो और अछूतो को काफी प्रताड़ित करते है।

रामलाल ने पुलिस को जानकारी दी कि 3 मार्च को अचानक गांव के कुछ ऊंची जाति के लोग लाठी डंडो के साथ उसके घर में घुस गए, और जातिसूचक गालियां देते हुए पुरुषों के साथ साथ महिलाओ के साथ भी मारपीट की, इतना ही नहीं महिलाओं पर अश्लील टिप्पणी भी की, और घर में काफी तोड़फोड़ की। रामलाल को काफी गंभीर चोटे आई है, वहीं जब पुलिस को इसकी जानकारी दी गई तो आरोपी फरार हो गये, लेकिन अब जब पुलिस ने छानबीन शुरु कर दी है तो आरोपी पीड़ित परिवार पर केस वापिस लेने का दवाब बना रहे है।

पीड़ित परिवार का साफ कहना है कि वो अब गांव छोड़ कर चले जायेंगे, क्योंकि अगर आरोपी पकड़े नहीं जाते तो उनका गांव में रहना नामुमकिन है। उन्हें अपनी जान और अपने घर की महिलाओं की इज्जत की फिक्र है, और दलित होने के कारण न्याय में देरी हो रही है। उन्होंने पुलिस ने मदद मांगते हुए कहा कि वो गांव से सुरक्षित अपना सामान लाना चाहते है ताकि वो कहीं और जाकर बस सकें। हैरानी की बात है यूपी की कानून व्यवस्था इतनी लचर हो गई है कि दलितों को अपना पुश्तैनी मकान तक छोड़कर जाना पड़ रहा है, और सरकार उनका पलायन तक रोक नहीं पा रही है। फिर भला कैसे उन्हें न्याय मिलेगा।

दलित ईसाई को भी मिले SC ST एक्ट का लाभ

4, दलितो से जुड़ा अगला मामला तमिलनाडु से है, जहां ईसाई धर्म अपना चुके दलितो के लिए भी सरकारी लाभ की मांग लेकर आवाज उठाई जा रही है। दरअसल राज्य में दलितो के प्रति बढ़ रहे हमलो को लेकर मदुरई के ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट और NGO एविडेंस के CEO विंसेंट कथिर ने उन दलितों के हक में आवाज उठाई है जिन्होंने हिंदू धर्म छोड़ कर ईसाई धर्म अपना लिया है। उन्होंने कहा कि धर्म बदलने के बाद भी लोगो की पहचान नहीं बदल पाती, ऐसे में दलित इसाइयों को भी SC कम्युनिटी में लिस्ट किया जाना चाहिए, ताकि जब भी उनके साथ जातिगत अत्याचार हो तो उन्हें भी SC/ST (अत्याचार निवारण) एक्ट के तहत ही मुआवजा और न्याय मिल सकेँ।

ये मुद्दा उन्होनें तब उठाया जब 2 मार्च को नांगुनेरी में दरांती से हुए हमले में दो लोगो की मौत हो गई थी जिसमें से जॉन दलित ईसाई परिवार से था, लेकिन दलित ईसाई पिछड़े वर्ग (BC) में होने के कारण उसके परिवार को मुआवजा नहीं दिया गया, जबकि ये अन्नायपूर्ण कदम था। उन्होंने ये भी खुलासा किया कि जॉन पर हमला दरअसल जातिगत भेदभाव के कारण हुआ था, और उसके परिवार को भी उचित मुआवजा मिलना चाहिए।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही घोषणा कर दी है जो दलित दूसरे धर्म में कंर्वट होंगे, उन्हें एससी एसटी एक्ट का लाभ नहीं मिलने वाला है। जिससे दलित ईसाइयो को लाभ नहीं मिल रहा है। हालांकि इस बात को झुठलाया नहीं जा सकता है कि धर्म बदलने के बाद भी उन्हें जातिगत भेदभाव का सामना करना पड़ता है। ऐसे में आपकी क्या राय है क्या उन्हें भी एससी एसटी एक्ट का लाभ मिलना चाहिए।

सोनभद्र में दुष्कर्म पीड़िता को मिला 12 साल बाद न्याय

5, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के सोनभद्र से है, जहां एक सामूहिक दुष्कर्म पीड़िता को न्याय मिलने में 12 साल का लंबा समय लग गया। ये खबर शाहगंज थाना क्षेत्र के राजपुर गांव की है। पीड़िता ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि उसके पति तीनो आरोपी के साथ किसी काम से बाहर गए हुए थे, लेकिन करीब एक महीने बाद तीनो उसके घर आये और बताया कि उसके पति का एक्सीडेंट हो गया और उसे करमा अस्पताल में भर्ती कराया गया, पीड़िता पति के एक्सीडेंट की बात सुनकर बिना कुछ सोचे समझे तीनों के साथ चली गई, लेकिन वो तीनो उसे करमा के एक स्कूल में ले गये।

जहां पीड़िता को जब आरोपियों के इरादो का भान हुआ तो वो वहां जाने लगी, लेकिन तीनो ने उसे जातिसूचक गालियां दी और फिर उससे सामूहिक दुष्कर्म करके उसके पास से पैसे और गहने लूट लिये। पीड़िता ने किसी तरह से पुलिस को इसकी जानकारी देने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने उल्टा उसे ही डांट कर भगा दिया, जिसके बाद सीओ को अर्जी दी। करीब 12 सालो तक कोर्ट में मामला चलने के बाद विशेष न्यायधीश एससी एसटी एक्ट आबिद शामिम की अदालत ने तीनो दोषियो को उम्रकैद की सजा सुनाई है और साथ ही 60-60 हजार रूपय का जुर्माना भी लगाया है, अगर जुर्माना नहीं दिया जाता तो आरोपियो की सजा 6 महीने और बढ़ा दी जायेगी।

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