Gautama Buddha Enlightenment: जब आप हिंदू धर्म में देवों के देव महादेव के बारे में जानते है तो आपने उन्हें अक्सर ध्यान की अवस्था में देखते है। पुराणों के अनुसार वो युगो युगो तक ध्यान की मुद्रा में रहते है, कहा तो ये जाता है कि वो अपने ध्यान के दौरान श्री हरि विष्णु के अवतार श्रीराम का ध्यान करते है, ऐसे ही ईश्वर की प्राप्ति के लिए हिंदू धर्म में तो किसी न किसी देव देवी का ध्यान करने की कई कहानी प्रचलित है।लेकिन क्या आपने ये सोचा है कि जब गौतम बुद्ध ने बोधि वृक्ष के नीचे साधना शुरु की थी, और सालो के तप के बाद उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ था तब उन्होंने वाकई में किसका ध्यान किया था।
अक्सर हम उनके ध्यान और ज्ञान प्राप्ति के बारे में चर्चा करते है लेकिन क्या आप ये जानते है कि गौतम बुद्ध ने बोधि वृक्ष के नीचे किसकी साधना करते ज्ञान को प्राप्त किया था, अपने इस वीडियो में हम इसी सवाल का जवाब जानेंगे, बुद्ध के कौन थे आराध्य, जिन्होंने उन्हें परम ज्ञान प्राप्त करने में सहायता की थी।
बुद्ध का ध्यान
बुद्ध 29 साल की उम्र में कपिलवस्तु का महल छोड़ कर केवल ये जानने के लिए कि मनुष्य के दुखो का क्या कारण है, मनुष्यों को दुख क्यों होता है… काफी समय तक कई संतो और महात्माओं से मिल कर ये जानने की कोशिश में वो दर दर भटके थे। लेकिन कहीं भी उन्हें वो सफलता नही मिली जिसके लिए उनका मन विचलित था। जिसके बाद बुद्ध बिहार के बोधगया पहुंचे और वहां पीपल के एक पेड़ के नीचे तप करने लगे।
बुद्ध ने अपनी यात्राओं के दौरान ये समझ लिया था कि अगर उन्होंने जीवन का सबसे बड़ा रहस्य जानना है तो उसकी तलाश उन्हें खुद ही करनी पड़ेगी.. उन्होंने पीपल के पेड़ के नीचे 531 ईसा पूर्व में बोध यानि की ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। बुद्ध ने ज्ञान की प्राप्ति के लिए करीब 6 सालो तक कठोर तप किया था, और छठे साल के पूर्णिमा के दिन उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। पीपल के पेड़ को बोधि वृक्ष कहा गया यानि की ज्ञान का वृक्ष।
तप के दौरान किसे करते थे ध्यान
अब सवाल ये है कि बुद्ध ने बोधि वृक्ष के नीचे जो 6 साल की कड़ी तपस्या की थी, इस दौरान वो किसका ध्य़ान किया करते थे। तो आपको बता दें कि असल में गौतम बुद्ध ने अपने तप के दौरान किसी देव या देवी की साधना नहीं की थी, औ न ही किसी अदृष्य ताकत का ध्यान किया था, दरअसल बुद्ध ने विपश्यना ध्यान किया था, जिसका अर्थ है जिसमें उन्होंने आत्म निरिक्षण करके शरीर और मन की सभी संवेदनाओं का अवलोकन किया था।
जिससे वो दुखो के मूल कारणों और उसे समाप्त करने के कारणों का पता लगाया था। अपने ध्यान के दौरान बुद्ध ने अपनी सांसो और शरीरिक संवेदनाओं को जाना, उसे देखा और उसकी शुद्धि की थी। उन्होंने अपने तप के दौरान ये जाना कि जीवन का मूल सिद्धांत सत्य और अहिंसा ही है, मुक्ति का मार्ग यहीं है, उन्होंने अपने विकारों से मुक्ति पाई।
क्या है विपश्यना ध्यान
भगवान बुद्ध विपश्यना ध्यान के जरिए ही ज्ञान की प्राप्ति की थी, विपश्यना ध्यान गौतम बुद्ध के समय से ही नहीं बल्कि उनके पहले से ही भारत में मौजूद है। इस वीधि के जरे ध्यान करने वाले सभी चीजो को उनके असली पहचान के साथ देख और समझ सकते है।
विपश्यना ध्यान के जरिये मन के सभी विकारों से मुक्ति पा कर आत्म निरिक्षण करके मन और शरीर को शुद्ध किया जाता है। ये व्यक्ति में भावनात्मक रूप से स्थिरता लाता है, मनुष्य के पूरे शरीर को खुद स्कैन करने जैसा ही है, जो अपने आप को जान सकता है।
भूतकाल पर शोक करने का कोई अर्थ
इस साधना के जरिय व्यक्ति बिना मानसिक और शारीरिक परिवर्तन से विचलित हुए सुख और दुख दोनों के प्रति समान भाव महसूस करने लगता है। ये प्रेरणा देती है कि वर्तमान में जो है वहीं एक सत्य है, भविष्य की चिंता से कोई बदलाव नहीं होने वाला है, औऱ भूतकाल पर शोक करने का कोई अर्थ नहीं है।
यानि कि भगवान बुद्ध ने ईश्वर का ध्यान नही किया बल्कि स्वंय आत्म अवलोकण करके जीवन के उस रहस्य को जाना जिसमें उन्होंने ये पाया कि जीवन के सभी दुखो का कारण हमारा अपने इस नश्वर शरीर से मोह है, केवल मोह के कारण ही हम गलत कार्य करते है, हिंसा करते है, असत्य कहते है।
साधारण व्यक्ति विपश्यना ध्यान कर सकता?
एक बार व्यक्ति इस सत्य को जान लें कि सबकुछ असल में टेम्पेरेरी है, तो वो इसका स्वयं ही त्याग कर के मोक्ष के रास्ते पर चलने लगता है। ऐसा नहीं है कि विपश्यना ध्यान केवल बुद्ध ने ही किया था, बल्कि उनसे पहले भी ये ध्यान किया गया था और कोई भी साधारण व्यक्ति विपश्यना ध्यान कर सकता है, बस जरूरत है तो एकाग्रचित मन की। शायद यहीं कारण था कि बुद्ध ने कभी खुद को ईश्वर का रूप नहीं माना, वो खुद को एक साधारण व्यक्ति मानते थे और तप के बल पर कोई भी इस रहस्य को जान सकता है।



