क्या कहती है BNS की धारा 208, जानें इससे जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण बातें

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BNS Section 208 in Hindi: भारतीय दंड संहिता (BNS) की धारा 208, लोक सेवक के आदेश की अवज्ञा से संबंधित है। यह उस व्यक्ति पर लागू होती है जो किसी लोक सेवक द्वारा जारी समन, नोटिस, आदेश या उद्घोषणा के बाद जानबूझकर किसी विशेष स्थान और समय पर उपस्थित नहीं होता है, या समय से पहले उस स्थान को छोड़ देता है। तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस (Bhaarateey dand sanhita) में व्यभिचार के बारे में क्या कहा गया है।

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धारा 208 क्या कहती है? BNS Section 208 in Hindi

जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस की धारा 208 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। बीएनएस (BNS) की धारा 208, जो भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 174 के समान है, यह परिभाषित करती है कि किसी लोक सेवक द्वारा जारी समन, नोटिस, आदेश या उद्घोषणा का पालन न करना अपराध है।

यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी सक्षम लोक सेवक के वैध आदेश का पालन नहीं करता है, खासकर जब उसे स्वयं या अपने प्रतिनिधि के माध्यम से अदालत में उपस्थित होना आवश्यक हो, तो उसे छह महीने तक की कैद या दस हज़ार रुपये तक का जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है।

बीएनएस धारा 208 की महतवपूर्ण बातें  

  • इस धारा के अंतर्गत दो प्रकार के अपराधसाधारण गैर-हाजिरी – किसी लोक सेवक द्वारा जारी किसी भी आदेश का पालन न करना। इसके लिए एक महीने तक की साधारण कारावास या ₹5,000 तक का जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं।

    अदालत में गैर-हाजिरी – जब किसी व्यक्ति को अदालत में व्यक्तिगत रूप से या किसी प्रतिनिधि के माध्यम से पेश होने के लिए कहा जाता है और वह ऐसा करने में विफल रहता है। इस स्थिति में, छह महीने तक की साधारण कारावास या ₹10,000 तक का जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं।

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बीएनएस धारा 208 की और सजा

इसके अलवा आपको बता दें कि धारा (Section) 207 के तहत दोषी पाए जाने पर सजा का प्रावधान है कि अपराध के दोषी पाए जाने पर, यदि कोई व्यक्ति किसी सम्मन, नोटिस, आदेश या उद्घोषणा की तामील को रोकने या बाधित करने का प्रयास करता है, तो उसे साधारण कारावास (छह महीने तक) या जुर्माना (₹10,000 तक) या दोनों से दंडित किया जा सकता है।

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