जातिगत उत्पीड़न का शिकार मासूम! गौशाला में कैद दलित बच्चे की मौत, न्याय पर गहरा सवाल

Dalit Girl suicide, Mainpuri News
Source: Google

Shimla news: हाल ही में हिमाचल प्रदेश (Himachal) के शिमला (Shimla) से एक हैरान और परेशान करने वाली खबर सामने आई है। जहाँ एक नाबालिग दलित युवक ने ज़हर खाकर आत्महत्या कर ली। जिसके बाद से मृतक के परिवार में सनाटा छाया हुआ है। वही मृतक के माता-पिता का आरोप है कि गाँव की तीन “उच्च जाति” की महिलाओं ने उनके बेटे की पिटाई की और उसे गौशाला में बंद कर दिया क्योंकि उसने कथित तौर पर उनके घर को छूकर उसे “अपवित्र” कर दिया था। तो चलिए आपको इस लेख में पूरे ममाले के बारे में विस्तार से बताते हैं।

दलित बच्चे ने ज़हर खाकर आत्महत्या करी

दलित उत्पीड़न के मामले लगातार जारी हैं। हर दिन दलित उत्पीड़न का कोई न कोई मामला सामने आता है, लेकिन ज़मीनी हकीकत कोई नहीं जानता। आखिर कब दलितों के साथ उत्पीड़न खत्म होंगे आज भी ऐसी ही एक खबर सामने आई है। जहाँ शिमला के रोहड़ू (Rohru) के लिम्बारा (Limbara) गांव में एक 12 वर्षीय दलित लड़के ने कथित तौर पर ज़हर खाकर आत्महत्या कर ली। लड़के के माता-पिता का आरोप है कि गाँव की तीन “उच्च जाति” की महिलाओं ने उनके बेटे की पिटाई की और उसे गौशाला में बंद कर दिया क्योंकि उसने कथित तौर पर उनके घर को छूकर उसे “अपवित्र” कर दिया था। महिलाओं ने कथित तौर पर परिवार से एक बकरी की भी माँग की।

पीड़ित परिवार का आरोप है कि इस उत्पीड़न से आहत लड़के ने ज़हर खा लिया, जिससे उसकी मौत हो गई। पुलिस ने आरोपी महिलाओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है, हालाँकि एक स्थानीय अदालत ने उन्हें अग्रिम ज़मानत दे दी है। वही इस घटना और मामले में अग्रिम ज़मानत मिलने के बाद, कई संगठन और राजनीतिक दल सोशल मीडिया पर उनकी कथित चुप्पी पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं।

दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग

वही इस घटना को लेकर दलित शोषण मुक्ति मंच ने इस गंभीर घटना की कड़ी निंदा की है और दोषियों के खिलाफ तत्काल और सख्त कार्रवाई की मांग की है और आरोपियों के खिलाफ SC-ST ACT के तहत मुक़दमा दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार करने की भी मांग की है। इसके अलवा उन्होंने मांग की है कि पीड़ित परिवार को पर्याप्त मुआवजा और पूरी सुरक्षा प्रदान की जाए ताकि उन पर केस वापस लेने या सबूतों से छेड़छाड़ करने का दबाव न डाला जाए।

वही मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकरी के अनुसार इस घटना को लेकर मंच ने कांग्रेस (Congress) और भाजपा (BJP) जैसे प्रमुख राजनीतिक दलों की चुप्पी पर भी गहरी निराशा व्यक्त की। मंच का मानना ​​है कि ये दल सामाजिक न्याय की बजाय वोट बैंक की राजनीति को प्राथमिकता देते हैं। जाति-आधारित अत्याचारों को रोकने के लिए ठोस उपाय सुझाते हुए, मंच ने कहा कि धूम्रपान के खिलाफ जागरूकता अभियानों की तरह ही एससी/एसटी अधिनियम के प्रावधानों के बारे में भी व्यापक अभियान चलाने की आवश्यकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *