BNS Section 226 in Hindi: भारतीय दंड संहिता (BNS) की धारा 226 के तहत, लोक सेवक की वैध शक्तियों के उपयोग को बाधित करने या उसे मजबूर करने के उद्देश्य से आत्महत्या के प्रयास से है। तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस (Bhaarateey dand sanhita) में व्यभिचार के बारे में क्या कहा गया है।
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धारा 226 क्या कहती है? BNS Section 226 in Hindi
जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस की धारा 226 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 226 यह प्रावधान उन स्थितियों पर लागू होता है जहां आत्महत्या का प्रयास मानसिक स्वास्थ्य संकट के कारण नहीं होता, बल्कि किसी लोक सेवक को उसकी कानूनी जिम्मेदारियों से हटाने के लिए तनाव उत्पन्न करने के एक तरीके के रूप में किया जाता है।
उदाहरण के लिए, “A” नामक एक व्यक्ति एक इमारत का मालिक है जिसे नगर निगम द्वारा अवैध घोषित किया गया है। नगर निगम के अधिकारी (जो लोक सेवक हैं) इमारत को गिराने के लिए कानूनी नोटिस जारी करते हैं और तोड़फोड़ की कार्यवाही शुरू करने वाले होते हैं। हालाँकि, तोड़फोड़ को रोकने के लिए, व्यक्ति “A” लोक सेवक के कार्यालय के बाहर ज़हर खाने या आत्महत्या करने का प्रयास करता है।
इस कृत्य में, व्यक्ति “A” स्पष्ट रूप से लोक सेवक को उसके वैध आधिकारिक कर्तव्य के निर्वहन से रोकने या उसे मजबूर करने का इरादा रखता है। यदि आत्महत्या का प्रयास सफल नहीं भी होता है, तब भी उसके कृत्य को सीआरपीसी की धारा 226 के तहत दंडनीय अपराध माना जाएगा।
बीएनएस धारा 226 की महतवपूर्ण बातें
- जब कोई व्यक्ति किसी लोक सेवक को उसके आधिकारिक कर्तव्यों के पालन में बाधा डालने या दबाव डालने के इरादे से आत्महत्या का प्रयास करता है, तो यह एक गंभीर अपराध है।
- यह अपराध असंज्ञेय है, अर्थात पुलिस बिना वारंट के व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं कर सकती। यह अपराध ज़मानतीय है, अर्थात किसी भी मजिस्ट्रेट के समक्ष इस पर विचार किया जा सकता है।
- यह धारा विशेष रूप से उन स्थितियों को संबोधित करती है जब कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी लोक सेवक को उसके कानूनी कर्तव्यों के पालन में बाधा डालने या दबाव डालने का प्रयास करता है।
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बीएनएस धारा 226 की और सजा
इसके अलवा आपको बता दें कि BNS की धारा (Section) 226 के तहत दोषी पाए जाने पर सजा का प्रावधान है कि, धारा 226 में इस प्रकार के दंड (Punishment) का प्रावधान है। इस अपराध की सज़ा साधारण कारावास है, जो एक वर्ष तक हो सकती है, या जुर्माना, या दोनों। इसके अलावा, सामुदायिक सेवा भी सज़ा में शामिल हो सकती है।



