मायावती का दलित दांव, कांशीराम जयंती पर BSP का सबसे बड़ा शक्ति प्रदर्शन

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BSP Chief Mayawati comeback: पिछले कुछ समय से मायावती ने चुनाव प्रचार, चुनावी रैलियों और किसी भी तरह की राजनीतिक बैठक से दूरी बना रखी है। लेकिन अब दलित समुदाय और बहुजन समाज के खुशखबरी है कि बसपा सुप्रीमो मायावती एक बार फिर दलितों में अपनी पैठ की ताकत दिखाने जा रही हैं। इसके लिए मायावती ने एक खास तरीख को चुना है। तो चलिए आपको इस लेख में पूरे मामले के बारे में विस्तार से बाते हैं।

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लखनऊ में एक बड़ी रैली का आयोजन

पिछले कुछ समय से बसपा प्रमुख मायावती का रुख कुछ अलग ही रहा है। लेकिन समय-समय पर मायावती ने सभी राजनितिक पार्टियों के खिलाफ निशाना सदा है चाहे फिर वो दलित हिंसा से जुड़ा मुद्दा हो या फिर सामाजिक गतिविधि क्यों ही ना हो…वही अब पूरे डेढ़ साल बाद,  बसपा प्रमुख मायावती (BSP Supremo Mayawati) उत्तर प्रदेश (UP) में दलितों के बीच अपनी पैठ दिखाने जा रही हैं। इसके लिए मायावती ने एक खास तारीख चुनी है जी हाँ  9 अक्टूबर, कांशीराम (Kanshi Ram) की पुण्यतिथि के दिन यानी  9 अक्टूबर को, बसपा (BSP) लखनऊ में एक बड़ी रैली का आयोजन कर रही है। इसमें 5 लाख लोगों की भीड़ जुटाने की योजना है।

मायावती करेगी रैली को संबोधित 

ध्यान देने वाली बात बसपा की प्रमुख मायावती इस रैली को संबोधित करने वाली हैं। यह रैली बसपा के लिए अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने का एक सुनहरा अवसर माना जा रहा है। इसे मायावती की ‘कमबैक’ रैली के रूप में भी देखा जा रहा है।
इसके अलावा, यह बात भी काफी चर्चा में है कि इस रैली के माध्यम से मायावती उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (Uttar Pradesh Assembly Elections) 2027 की तैयारी की शुरुआत करेंगी। वही लखनऊ में रैली के दौरान बसपा के समर्थकों को यूपी के विभिन्न हिस्सों से लाने की व्यवस्था की जा रही है।

बसपा कार्यकर्ता और समर्थक होंगे शामिल 

रैली में विभिन्न जातियों और धर्मों के लोगों को आमंत्रित किया गया है। पार्टी के सूत्रों के अनुसार, बसपा कार्यकर्ता और समर्थक राज्य के विभिन्न हिस्सों से बसों, ट्रेनों और निजी वाहनों के माध्यम से लखनऊ पहुँच रहे हैं। नेता और कार्यकर्ता इसे 2027 के चुनावों की तैयारी के रूप में देख रहे हैं।
उनकी आशा है कि पार्टी 2007 में किए गए प्रदर्शन को पुनः दोहरा सकेगी। 2024 के लोकसभा चुनावों में बसपा को निराशाजनक परिणाम का सामना करना पड़ा था, जिसमें वह किसी भी सीट पर जीत हासिल नहीं कर पाई थी। मायावती अब पार्टी के कार्डधारी समर्थकों का समर्थन दोबारा हासिल करने की कोशिश कर रही हैं।

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