Bareilly: 12 मकानों पर मंडराया बुलडोजर का खतरा, नगर निगम ने 15 दिन में मकान खाली करने का नोटिस जारी किया

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Bareilly news: उत्तर प्रदेश (UP) के बरेली (Bareli) से एक दिल-दहला देने वाली खबर आई है। नगर निगम (Nagar Nigam) ने दलित और पिछड़े वर्ग के निवासियों को 50-60 सालों से क़ब्ज़े में रहे 12 मकान खाली करने का नोटिस जारी किया है। प्रभावित परिवार अपने घरों को बचाने के लिए राजनेताओं से न्याय की गुहार लगा रहे हैं, क्योंकि उन्हें कहा गया यदि अगर 25 october तक आवास खली नहीं किए गए तो उनके घरो पर बुलडोज़र चलवा दिया जायेगा। तो चलिए आपको इस लेख में पूरे ममाले के बारे में विस्तार से बताते हैं।

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15 दिनों के अन्दर घर खाली करना होगा

बाबा साहब आंबेडकर ने जब संविधान का निर्माण किया था तो उन्होंने भले ही ये क्लॉज डाला था कि भले ही 100 दोषी छूट जाए लेकिन एक निर्दोष को सजा नहीं होनी चाहिए, लेकिन आज देश की न्याय व्यवस्था इतनी लचर और धीरे हो गई है कि एक व्यक्ति को न्याय मिलने में उसकी पीढ़ी निकल जाती है और अगर पीड़ित दलित है, तो फिर तो न्याय की उम्मीद ही टूट जाती है। ऐसा ही एक मामला बरेली सामने आया हैं। जहां बरेली (Bareli) के डेलापीर तालाब (Delapierre Pond) के पास रहने वाले 12 दलित और OBC परिवारों को कोर्ट का नोटिस गया है, जिसके तहत उन्हें 15 दिनों पर घर खाली करना होगा, वर्ना उनके घरों पर बुल्डोजर चलवा दी जायेगी।

सरकार और प्रशासन से मदद की गुहार

सभी दलित परिवारों को 25 अक्टूबर तक घर खाली करना होगा, जिसे लेकर दलित महिलाओं ने सरकार और प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है। पीड़ित परिवार का कहना है वो करीब 50-60 सालों से इस स्थान पर रह रहे है, पहले वहां केवल जंगल हुआ करता था, लेकिन उसे अवैध बता कर खाली करने की धमकी दी जा रही है। सभी दलित परिवार हाउस टैक्स, वाटर टैक्स और बिजली के बिल नियमित रूप से भरते आये हैं।

परिवार में तनाव का माहौल

वही मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कई लोग कहते हैं कि जिन नेताओं को हमने बरसों से वोट दिया है, वही अब हमारे घरों पर बुलडोज़र चला रहे हैं। हम दिहाड़ी मज़दूर हैं, अगर हमारे साथ ऐसा हुआ तो हम कहाँ रहेंगे? दूसरी और पीड़ित लोगो जब से उनको ये नोटिस मिला उनके घरो में चूल्हा तक नहीं जाला हैं। हर किसी के परिवार में तनाव का माहौल बना हुआ हैं।

सरकारी योजनाओं का लाभ

उन्होंने कहा कि हमें सभी सरकारी योजनाओं के लाभ भी मिल रहे है तो फिर ये अवैध कैसे हो सकता है। सबके पास राशन कार्ड है। पीड़ित परिवारों ने अपनी गुहार कई बार मेयर और स्थानीय विधायकों से भी लगाई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। वहीं लखनऊ और गोरखपुर जाकर उन्होंने मुख्यमंत्री से मिलने की भी कोशिश की थी, लेकिन कहीं से कोई उनकी गुहार नहीं सुन रहा है।

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