Bihar Chunav: 90 के दशक में जब पहली बार बिहार में लालू यादव और आरजेडी की सरकार बनी तो सबसे पहला काम इन्होंने बिहार में जातिवाद को बढ़ावा देने और कानून व्यवस्था को खत्म करने का किया. बिहार के इसी काले दौर में ऐसी कई घटनाएं हुई, जिसे लेकर बिहार आज भी शर्मिंदा है. इसी दौर में तमाम बड़े नरसंहार हुए. ज्यादती हुई. पिछड़ों को निशाना बनाया गया. सत्ताधारी पार्टी के नेताओं को तो जैसे लूट, रेप और हत्या का अधिकार ही मिल गया था.
उस दौर में आरजेडी नेताओं ने पूरे बिहार में तांडव मचाया. यहां तक कि दलित आईएएस अधिकारियों तक को नहीं बख्शा गया…इसी दौर में एक दलित आईपीएस अधिकारी की एक ऐसी कहानी सामने आई, जिसने पूरे देश को हिला कर रख दिया था. यह कहानी है चंपा विश्वास की. तो चलिए आपको इस लेख में दलित आईएएस अधिकारी की बीबी चंपा विश्वास (Bibi Champa Biswas) के बारे में बताते हैं, जिनके साथ लालू की करीबी ने इतनी ज्यादती की कि उन्हें नसबंदी करानी पड़ी थी.
सरकारी क्वार्टर में शिफ्टिंग और जिंदगी का तूफान
दरअसल, 8 जुलाई 1990 को दलित समाज से आने वाले 1982 बैच के आईएएस अधिकारी बीबी विश्वास की शादी चंपा विश्वास से हुई…उस वक्त बिहार में लालू यादव की सरकार थी और यह जंगलराज का दौर था. 1995 तक दोनों की शादीशुदा जिंदगी काफी अच्छी चल रही थी…लेकिन 2 नवंबर 1995 को बिहार के समाज कल्याण विभाग में बीबी विश्वास का ट्रांसफर हो गया…वो इस विभाग के सेक्रेटरी बन गए…बिहार सरकार की ओर से पटना के बेली रोड पर इस आईएएस फैमिली को सरकारी क्वार्टर अलॉट हुआ और यही से इनकी जिंदगी में तूफान आ गया…बीबी विश्वास इस सरकार क्वार्टर में अपनी फैमिली के साथ शिफ्ट हुए…फैमिली में उनकी पत्नी चंपा विश्वास, उनकी पत्नी की भतीजी और उनकी मां थीं…वहीं, 2 नौकरानियां भी थीं, जो घर का काम काज संभालती थीं.
आरजेडी नेता के बेटे द्वारा दो साल तक लगातार दुष्कर्म
इसी सरकारी कॉम्प्लेक्स में उस दौर की आरजेडी की ताकतवर नेता और समाज कल्याण विभाग समिति की अध्यक्ष हेमलता यादव अपने बेटे मृत्युंजय यादव के साथ रहती थीं. 2 सालों बाद चंपा विश्वास ने पुलिस में एक शिकायत दी, जिसने बिहार में हलचल मचा दी थी. अपनी शिकायत में चंपा विश्वास ने बताया था कि आरजेडी नेता हेमलता यादव के बेटे मृत्युंजय यादव ने लगातार 2 सालों तक चंपा विश्वास का दुष्कर्म किया था. इतना ही नहीं, उसने चंपा की भतीजी, उनकी सास और 2 नौकरानियों का भी दुष्कर्म किया था.
पुलिस का इनकार और राज्यपाल तक शिकायत
चूंकि उस समय आरजेडी के जंगलराज का दौर था और हेमलता यादव एक ताकतवर नेता थी. ऐसे में पुलिस ने इस दलित आईएएस अधिकारी की पत्नी का कंप्लेन तक दर्ज नहीं किया. बिहार में उस समय की हालत क्या थी, इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि पुलिस ने आईएएस की बीबी का मामला दर्ज करने से इनकार कर दिया था. काफी कोशिशों के बाद भी जब पुलिस के कान पर जूं नहीं रेंगा तो थक हार कर चंपा विश्वास ने बिहार के तत्कालीन गवर्नर सुंदर सिंह भंडारी से शिकायत की, जिसमे चंपा विश्वास ने अपनी आपबीती बताई थी.
बार-बार गर्भपात और नसबंदी
राज्यपाल को दिए इस शिकायत में चंपा विश्वास ने बताया था कि पिछले 2 सालों में होने वाले बार-बार बलात्कार के कारण वह कई बार गर्भवती हुई थीं और कोलकाता जाकर उन्होंने अबॉर्शन कराया था. उन्हें अंदर डर इस कदर बैठ गया था कि उन्होंने डर के मारे अपनी नसबंदी तक करा ली थी. बिहार के गवर्नर सुंदर सिंह भंडारी ने इस शिकायत को बेहद ही सीरियस लिया और इसकी जांच की अपील की. जिसके बाद पटना के तत्कालीन डीजीपी नियाज अहमद को मामले की जांच दी गई. लेकिन कानून व्यवस्था पर सत्ता का प्रभाव ऐसा था कि पूरा का पूरा केस ही पलट गया. और सबूत के अभाव में कोर्ट ने इस केस को पूरी तरह से रिजेक्ट कर दिया.
चंपा का जबरन बलात्कार
इस दौरान चंपा विश्वास ने पुलिस को भी अपनी आपबीती बताई थी. जिसमें उन्होंने इस मामले की शुरुआत से लेकर तब तक की सारी बातें बताई थी. उन्होंने बताया था कि 7 सितंबर 1995 को पहली बार हेमलता यादव ने चंपा को यह कहकर अपने घर बुलाया था कि उसका नौकर बीमार है और उसे मदद की जरूरत है. जब चंपा उसके घर पहुंची तो उस वक्त मृत्युंजय यादव के अलावा हेमलता यादव और आरजेडी के 2 और नेता वहां मौजूद थे. यहां मृत्युंजय ने पहली बार चंपा का जबरन बलात्कार किया. इतना ही नहीं, उसकी अश्लील पिक्चर भी ली गई.
बदहवास हालत में जब चंपा अपने घर की ओर जाने लगी तो हेमलता यादव ने उसे धमकी दी कि अगर इस बारे में उसने किसी को भी बताया तो उसके परिवार को इसका अंजाम भुगतना पड़ेगा और उसकी अश्लील तस्वीरें लोगों तक पहुंच जाएगी. अब चंपा करती तो करती क्या चंपा ने अपना मुंह बंद रख लिया लेकिन इससे मृत्युंजय यादव के हौसले बुलंद हो गए. वो अक्सर उसके घर आ जाता और उसके साथ दुष्कर्म करता था. इतना ही नहीं इस दौरान उसने चंपा की सास, उसकी भतीजी और घर की नौकरानी के साथ भी बलात्कार किया था. जब बीबी विश्वास को इस घिनौने अपराध के बारे में पता चला तो उन्होंने हर किसी के सामने गुहार लगाई लेकिन किसी ने उनकी अर्जी नहीं सुनी.
विपक्ष का दबाव और गिरफ्तारी
उस समय के बिहार में तत्कालीन विपक्ष के नेता सुशील कुमार मोदी ने पहली बार प्रेस कांफ्रेंस कर चंपा विश्वास की शिकायत को सार्वजनिक तौर पर मीडिया के सामने रखा और आईएएस ऑफिसर की फैमिली की सुरक्षा की मांग की थी. जब इस मामले में गवर्नर के साथ-साथ विपक्ष ने भी दवाब बनाया तो पहली बार 1997 में मृत्युंजय यादव को गिरफ्तार किया गया. जबकि पुलिस ने 2 महीने के बाद हेमलता यादव को पकड़ा था, जो फरार चला रही थी. साल 2002 में पटना के लोअर कोर्ट ने मृत्युजंय यादव को 10 साल की सजा सुनाई और हेमलता यादव को 3 साल की सजा सुनाई गई. लेकिन ट्रायल में हुई देरी से पहले ही 3 साल गुजर गए थे, इसीलिए हेमलता यादव को बेल दे दी गई.
जांच का आदेश और फिर पलटा हुआ केस
वहीं, 3 सालों तक जेल में बिताने के बाद मृत्युंजय यादव ने लोअर कोर्ट के फैसले को पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी और जमानत पर बाहर आ गया. मामला चलता रहा और दलित आईएएस अधिकारी बीबी विश्वास पर कई तरह के भ्रष्टाचार के आरोप लगा दिए गए, जो बाद में आरोपियों के लिए हथियार साबित हुए. 2010 में कोर्ट में आरोपियों ने चंपा विश्वास पर ही कई आरोप लगा दिए. उनकी ओर से कहा गया कि जो भी हुआ वह म्यूचुअल कंसेंट से हुआ था. वहीं, कोर्ट में यह भी दलील दी गई कि चंपा विश्वास अपने पति बीबी विश्वास को भ्रष्टाचार के मामले से बचाने के लिए इस तरह के घिनौने आरोप लगाए. हाईकोर्ट ने मृत्युंजय यादव और हेमलता यादव को रिहा कर दिया…जंगलराज में एक बार फिर से कानून की हार हुई थी, न्याय हार गया था और ताकत जीत गई थी.
दलित आईएएस दंपति के साथ हुई इस घटना ने पूरे देश को हिला कर रख दिया था…कानून और न्यायव्यवस्था के नकारेपन ने हर किसी को सोचने पर मजबूर किया…कोर्ट के फैसले ने चंपा विश्वास को अंदर तक तोड़ दिया…जिसके बाद उन्होंने बिहार छोड़ कर दिल्ली बसने का फैसला लिया…चंपा विश्वास दिल्ली चली गईं और बीबी विश्वास का ट्रांसफर झारखंड हो गया, जहां उनकी मौत हो गई.
न्याय की हार और गुमनामी में जीवन
इसके बाद चंपा विश्वास हमेशा के लिए कोलकाता चली गई और आज भी गुमनामी के अंधेरे में जीने को मजबूर हैं. 1990 से लेकिन 2005 तक बिहार में आरजेडी की सरकार में जंगल राज का कानून चलता था. बिहार के इस काले दौर में राजनीतिक शह पर और प्रशासन की नाक के नीचे अनगिनत अपराध हुए. दलित आईएएस के परिवार के साथ हुई इस घटना की चीख आज भी बिहार की राजनीति में सुनने को मिलती है…उस दौर में जब एक दलित आईएएस अधिकारी का परिवार सुरक्षित नहीं रह पाया तो सोचिए कि उस दौर में आम लोगों का क्या हश्र हुआ होगा…



