Bihar election: पीएम मोदी ने कांग्रेस-आरजेडी पर साधा निशाना, पर बढ़ती क्राइम रेट पर चुप्पी क्यों?

Bihar Election, PM Modi attacks on RJD
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Bihar election: बिहार में पहले चरण के चुनाव केवल 2 दिन दूर हैं। हाल ही में, चुनाव प्रचार का समय बीते दिन शाम 5 बजे समाप्त हो गया। इस दौरान, सभी राजनीतिक दल सक्रियता से प्रचार गतिविधियों में जुटे थे और उन्होंने विभिन्न स्थानों पर बड़े पैमाने पर रैलियाँ आयोजित कीं। प्रधानमंत्री मोदी ने भी बिहार में एक बड़ी रैली को संबोधित किया, जिसमें उन्होंने कांग्रेस और RJD पर तीखे हमले किए और जंगल राज समाप्त करने की बात कही। लेकिन ‘जंगल राज’ का अर्थ क्या है, और इसके पीछे की कहानी क्या है? तो चलिए इस लेख में विस्तार से जानते हैं।

चुनाव प्रचार में ‘जंगल राज’ पर वार

आपने “जंगल राज” शब्द तो सुना ही होगा, इस शब्द का इस्तेमाल मुख्य रूप से 1990 से 2005 तक लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) और उनकी पत्नी राबड़ी देवी (Rabri Devi) की राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के शासन के दौरान बिहार में बिगड़ती कानून-व्यवस्था, अपराध, भ्रष्टाचार और अराजकता का वर्णन करने के लिए किया जाता है।

वास्तव में, 1990 से 2005 के बीच बिहार में लालू यादव और राबड़ी देवी के शासन के दौरान, राज्य में लूट, हत्या, नरसंहार और अपहरण जैसे अपराधों ने एक उद्योग का रूप ले लिया था। इस दौरान आम जनता भयभीत और परेशान थी, जबकि उन नेताओं का परिवार संपत्ति जोड़ने में व्यस्त था। चारा घोटाला, भूमि के बदले नौकरी घोटाला, सरकारी बंगले विवाद और आय से अधिक संपत्ति जैसे मामले आज भी लोगों को याद हैं।

दलितों के साथ अत्याचार और हिंसक घटनाएँ

लालू यादव और राबड़ी देवी के शासनकाल में दलितों के खिलाफ कई गंभीर अत्याचार और हिंसक घटनाएँ घटित हुईं। अनेक दलित परिवारों के घरों और गांवों में आग लगा दी गई, और कई स्थानों पर ठाकुर रणवीर की सेनाएं दलित बच्चों और महिलाओं का बेरहमी से नरसंहार करने लगीं। इस बीच, बिहार में लालू राज और नीतीश कुमार के शासन के दौरान अपराध दर में क्या अंतर आया, यह समझना महत्वपूर्ण है। ऐसे कई मुद्दे थे, जिन्होंने बिहार की छवि को खराब करने में योगदान दिया।

लालू यादव का दौर (1990-2005) 1992 में कुल अपराध: 1,31,000, हत्याएँ: 5,743, बलात्कार के मामले: 1,120, अपहरण के मामले: 2,700+ राबड़ी देवी के कार्यकाल (2000-2004) तक अपराध कुछ कम हुए, लेकिन स्थिति अभी भी गंभीर थी। 2004 में कुल अपराध: 1,15,000, हत्याएँ: 3,800, बलात्कार के मामले: 1,000+, अपहरण: 2,500+

नीतीश-भाजपा सरकार में अपराध दर बढ़ा

हालांकि, इस संदर्भ में न तो मोदी सरकार ने ध्यान दिया और न ही बिहार की सरकार ने इन मुद्दों को गंभीरता से लिया। वही हाल ही में, पीएम मोदी ने बिहार (Bihar) के कटिहार (Katihar) और आरा जैसे क्षेत्रों में रैलियां कीं, जहाँ उन्होंने कांग्रेस (Congress) और आरजेडी (RJD) पर निशाना साधा और उनकी आलोचना की। लेकिन पर उन्होंने बिहार में बढ़ रहे क्राइम रेट को लेकर उन्होंने कुछ नहीं कहा…वही राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) रिपोर्ट्स के मुताबिक देखा जाये तो बिहार में 2005-2024 नीतीश-भाजपा सरकार में अपराध दर में दोगुना बढ़ोतरी देखी गयी हैं।

NCRB के आंकड़े

दरअसल, नीतीश-भाजपा सरकार बिहार की सत्ता में आने के बाद शुरूआती वर्षों में बिहार में फिरौती के लिए अपहरण और जातीय नरसंहार जैसी संगठित आपराधिक गतिविधियों में गिरावट तो नज़र आई, जिससे जनता की सोच बदलने लगी और जनता को लगाने लगा कानून-व्यवस्था के सुधार हो रहा है लेकिन दलितों कि सिथ्ती जस की तस ही बनी रहीं।

वही राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े बताते हैं कि 2005 के बाद बिहार में संज्ञेय अपराधों की कुल संख्या में वृद्धि हुई है। उदाहरण के लिए, 2004 में राज्य में कुल अपराधों की संख्या लगभग 1.15 लाख थी, जो कि 2019 तक बढ़कर 2.69 लाख (दोगुना से अधिक) हो गई। इसके बाद 2022 में यह आंकड़ा लगभग 3.47 लाख तक पहुँच गया।

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