Barabar Caves: एक दौर था जब भारत में बौद्ध धर्म अपने चरम पर था. भारत के सबसे बड़े मगध साम्राज्य के सम्राट ने बौद्ध धर्म को अपना लिया था लेकिन नास्तिकों को लेकर उनके मन में काफी श्रद्धा थी. जी हां, मौर्य काल में भी नास्तिक थे और इसी काल में नास्तिकों का पहला संप्रदाय भी स्थापित हुआ. बौद्ध और जैन संप्रदाय के समकालीन रहा यह संप्रदाय, सम्राट अशोक के दिल के करीब था. सम्राट अशोक ने इस संप्रदाय के लिए गुफाएं भी बनवाई, जो आज भी दुनिया से छिपी हुई है.
बौद्ध धर्म के वैश्विक विस्तार के सूत्रधार
भारत के बाहर अगर बौद्ध धर्म को ले जाने का श्रेय अगर किसी को जाता है तो वो हैं सम्राट अशोक. चंद्रगुप्त मौर्य के पोते सम्राट अशोक ही वह शख्स हैं, जिन्होंने केवल बौद्ध धर्म अपनाया बल्कि बौद्ध धर्म के प्रचार प्रसार के लिए दुनिया के कई कोनों में भगवान बुद्ध को समर्पित किए गए ऐतिहासिक स्मारक स्थापित किया, स्तूप बनवाएं और शिलालेख लिखवाएं. उनके द्वारा स्थापित स्तूप और शिलालेखों ने बौद्ध धर्म के बारे में जानने में सबसे ज्यादा सहायता की.
बराबर की पहाड़ियों में गुफाओं का निर्माण
कहा जाता है कि बौद्ध धर्म अपनाने के बाद भी अशोक कई सालों तक राजा के तौर अपनी प्रजा की देखभाल करते रहे थे. इसी दौरान उन्होंने लोगों की भलाई के लिए कई बड़े कार्य किए और उन्हीं में से एक है बराबर की पहाड़ियां, जिन्हें बराबर पहाड़ियां भी कहा जाता है. उन्होंने बराबर की पहाड़ियों में गुफाओं का निर्माण करवाया था. इन गुफाओं में आज भी अशोक के समय के शिलालेख मौजूद हैं. इन गुफाओं को आज के समय में करण चौपड़, विश्वकर्मा, सुदामा और लोमस ऋषि के नाम से भी जाना जाता है.
लोमस ऋषि नाम की गुफा
ये गुफाएं बिहार (Bihar) के जहानाबाद जिले (Jehanabad district) में बोधगया (Bodhgaya) से लगभग 40 मील की दूरी पर है…गया से इसकी दूरी मात्र 24 किलो मीटर है. ये गुफाएं रॉक कट का बेहतर नमूना है और ग्रेनाइट नक्काशी का जीवंत प्रतीक भी है. इतिहासकारों का मानना है कि सम्राट अशोक ने इन गुफाओं को आजीविक संप्रदाय के तपस्वियों के निवास करने के लिए बनवाया था. इन गुफाओं में सबसे खास है लोमस ऋषि. यहां एक गुफा का नाम ही लोमस ऋषि है. इसकी नक्काशी काफी बेहतरीन है. इसके अंदर जाने पर ऐसा प्रतीत होता है जैसे आप कांच की चमकदार महल में आ गए हो.
जुड़वा पहाड़ी पर 3 गुफा
सम्राट अशोक के बनवाए इन गुफाओं से करीब 2 किलो मीटर की दूरी पर नागार्जुनी गुफाएं है, जिन्हें अशोक के पोते दशरथ मौर्य ने बनवाई थी. इन गुफाओं को सतघर कहा जाता है. सम्राट अशोक ने एक पहाड़ी पर चार गुफाओं का निर्माण कराया था और दशरथ ने वहीं जुड़वा पहाड़ी पर 3 गुफाओं का निर्माण कराया, जिसे गोपी-का-कुभा, वदिथी-का-कुभा और वापिया-का-कुभा गुफा के नाम से जाना जाता है.
इन गुफाओं को भी आजीविक संप्रदाय के संतों को समर्पित कर दिया गया था. ज्यादातर दो कक्षों में बंटी इन गुफाओं में जैन धर्म के अनुयायियों के होने के भी कई साक्ष्य मिले हैं. कहा जाता है सम्राट अशोक ने अपने राज्य में बौद्ध धर्म के साथ-साथ जैन धर्म को भी फलने फूलने का मौका दिया था.
संन्यासियों के लिए बराबर गुफाओं का निर्माण
आपको बता दें कि आजीविक संप्रदाय की स्थापना मक्खलि गोसाल ने की थी और वो बौद्ध धर्म के संस्थापक भगवान बुद्ध और जैन धर्म के अंतिम और 24वें तीर्थंकर महावीर के समकालीन थे. उनके ही संन्यासियों के लिए अशोक ने बराबर गुफाओं का निर्माण कराया था. कहा जाता है कि आजीविक संप्रदाय पहला नास्तिकवादी या भौतिकवादी सम्प्रदाय था. ऐसा माना जाता है कि आजीविक श्रमण नग्न रहते थे और परिव्राजकों की तरह घूमते थे. यह ईश्वर, पुनर्जन्म और कर्म में भरोसा नहीं करने वाला पहला साम्प्रदाय था.
वहीं, इन गुफाओं की बनावट बनाती है कि सम्राट अशोक के काल में आधुनिकता का भी संगम था. यह कलाएं ऐसी हैं, जिसे आज के दौर में भी कोई नहीं बना सकता…इससे यह भी साबित होता है कि सम्राट अशोक के काल में भी काफी कुशल और आधुनिक कारीगर थे. शायद यहीं कारण रहा कि अशोक अपने काल में सबसे ज्यादा आधुनिक विद्याओं के ज्ञाता थे.



