252 BNS in Hindi – भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 252 मुख्य रूप से चोरी की गई संपत्ति की वसूली में सहायता के लिए उपहार या रिश्वत लेने से संबंधित है।तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस (BNS) में इसके के बारे में क्या कहा गया है।
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धारा 252 क्या कहती है? BNS Section 252 in Hindi
जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस (BNS) की धारा 252 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 252 के तहत उन व्यक्तियों को दंडित किया जाता है जो चोरी की गई संपत्ति के पुनर्प्राप्ति में मदद के लिए रिश्वत लेते हैं, जब तक कि वे अपराधी को पकड़कर उसे दोषी साबित नहीं कर देते। इस धारा के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अपराधी को पकड़ने और उसे दोषी ठहराने के लिए गंभीर प्रयास नहीं करता है, तो उसे दंड का सामना करना पड़ सकता है।
For Example: रोहन की घड़ी चोरी हो जाती है। मोहन (मध्यस्थ) रोहन से वादा करता है कि वह उसे ₹5,000 में वापस दिला देगा। रोहन पैसे चुकाता है और घड़ी वापस ले लेता है। अगर मोहन ने रोहन से पैसे (उपहार/उपहार) ले लिए, लेकिन चोर को पकड़ने या पुलिस को सूचित करने में मदद नहीं की, तो मोहन दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 252 के तहत दोषी होगा।
BNS 252 Important Points
- यह प्रावधान तब लागू होता है जब कोई व्यक्ति रिश्वत लेता है और उस स्थिति में वह अपराधी को पकड़ने और उसे सजा दिलाने के लिए अपनी पूरी कोशिश नहीं करता है।
- यदि व्यक्ति अपने सभी संसाधनों का इस्तेमाल कर अपराधी को पकड़वाने और उसे दोषी ठहराने की पूरी कोशिश करता है, तो वह इस प्रावधान के अंतर्गत दंड से बच जाएगा।
- बता दें, इस धारा का उद्देश्य झूठे वादों के आधार पर चोरी की गई संपत्ति की वसूली के लिए रिश्वत लेने से रोकना है, ताकि पीड़ितों को धोखाधड़ी से बचाया जा सके और एक ईमानदार समाज को बढ़ावा दिया जा सके।
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बीएनएस धारा 252 की और सजा
इसके अतिरिक्त, बीएनएस (BNS) की धारा 252 के तहत, यदि किसी व्यक्ति को दोषी ठहराया जाता है, तो उसके लिए सजा निर्धारित की गई है। यदि झूठा आरोप किसी ऐसे अपराध से संबंधित है, जिसके लिए आजीवन कारावास (life imprisonment), या 2 साल या उससे अधिक की सजा का प्रावधान नहीं है, तो दोषी को 2 वर्ष के कारावास (imprisonment) से दंडनीय है, या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।



