Maharajganj News: बौद्ध धर्म का अनमोल खजाना, महराजगंज में छिपा है बुद्ध से जुड़ा 2500 वर्ष पुराना इतिहास

Lord Buddha, Gautam
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Maharajganj News: बौद्ध धर्म की पहचान आज पूरी दुनिया में है…दुनिया के तमाम देशों में बौद्ध समुदाय के लोग बहुसंख्यक हैं और पूरी दुनिया आज भगवान बुद्ध के विचारों को अपने भीतर समाहित करने के प्रयास में लगी हुई है. भारत से निकले इस धर्म को दुनिया ने सिर माथे पर बिठाया है. देश के कई हिस्सों में भगवान बुद्ध और बौद्ध विरासत से जुड़ी चीजें हैं लेकिन भारत के ही एक हिस्से में एक ऐसा बौद्ध स्तूप भी है जो 1000 सालों से भी ज्यादा समय से नहीं खुला है…जी हां, यूपी टूरिज्म की वेबसाइट के मुताबिक यह स्तूप कभी नहीं खुला.

कोलिय समुदाय से भगवान बुद्ध का गहरा संबंध

दरअसल, उत्तर प्रदेश का महाराजगंज जिले के धारमौली गांव और उसके आसपास के इलाके को वहां के लोग रामग्राम के नाम से बुलाते हैं. इस क्षेत्र में ज्यादातर कोल के पेड़ हुआ करते थे, जिसके कारण ही यहां रहने वाले लोगो को कोलिय कहा जाता है. कोल को कई जगहों पर साल का पेड़ भी कहा जाता है. इसी रामग्राम में एक स्तूप भी मौजूद है, जिसे आज तक खोला ही नहीं गया है लेकिन अब आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया यानी ASI ने इस स्तूप के आसपास उत्खनन का फैसला किया है.

कुछ इतिहासकारों का कहना है कि रामग्राम असल में कोलिय गणराज्य की राजधानी थी. कोलिय समुदाय से भगवान बुद्ध का गहरा संबंध था. उनकी मां महामाया और मौसी महाप्रजापति गौतमी कोलिय वंश से ही संबंध रखते थे. कहा जाता है कि जब भगवान बुद्ध का महापरिनिर्वाण हुआ तो उनके अवशेषों को 8 अलग अलग हिस्सों में बांटा गया था.

भगवान बुद्ध से जुड़ा यह एकमात्र ऐसा स्तूप

इन अवशेषों को मगध के अजातशत्रु, वैशाली के लिच्छवी, कपिलवस्तु के शाक्य, कुशीनगर के मल्ल, अल्लकप्पा के बुली, पावा के मल्ल, वेठद्वीप के एक ब्राह्मण और आठवें हिस्से को रामग्राम के कोलिय को दिया गया, जिसे रामग्राम में बने स्तूप में संरक्षित किया गया. भगवान बुद्ध से जुड़ा यह एकमात्र ऐसा स्तूप है, जो कभी खोला नहीं गया था. सम्राट अशोक भी इसे नहीं खोल पाए थे, इसलिए यह स्तूप पूरी तरह से अक्षुण्ण और अखंडित है.

ध्यान देने वाली बात है कि जब सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म अपनाया तो उन्होंने बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए अपने गुरु की आज्ञा पर भगवान बुद्ध के अवशेषों को इकठ्ठा करना शुरु किया था. इसके लिए वो रामग्राम के स्तूप पर भी आये थे लेकिन यहां रहने वाले नागों यानी रामग्राम के राजाओं ने अशोक को स्तूप खोलने ही नहीं दिया. क्योंकि भगवान बुद्ध के वो अवशेष नागों के लिए भी पूजनीय थे.

सम्राट अशोक ने करीब 84,000 स्तूप बनवाये

सम्राट अशोक बौद्ध धर्म के प्रचार प्रसार के लिए करीब 84,000 जगहों पर भगवान बुद्ध के अवशेष को पहुंचाना चाहते थे. इतिहासकारों की मानें तो सम्राट अशोक ने करीब 84,000 स्तूप बनवाये थे, जिनमें से कई को बाद के मनुवादी राजाओं ने ध्वस्त कर दिया. हालांकि, अभी भी भारत के कई कोनों में बौद्ध धर्म के प्रतीक के रूप में स्तूप खड़े है.

आपको बता दें कि रामग्राम में स्थित स्तूप को खोलने के खिलाफ बौद्ध अनुयायी लगातार लड़ाई लड़ रहे थे. लेकिन फिर भी बौद्ध धर्म से जुड़े इतिहास को जानने और समझने के लिए ASI द्वारा इसका उत्खनन शुरु किया गया है. इसे एक बड़ी उपलब्धि भी माना जा रहा है. विभाग का कहना है कि अगर यहां भगवान बुद्ध से जुड़े अवशेष मिलते हैं तो यह एक बड़ी क्रांति की तरह होगी. साथ ही यह बौद्ध अनुयायियों के लिए काफी महत्वपूर्ण उपलब्धि भी होगी.

भारत में भले ही बौद्ध धर्म का विकास काफी धीमा है लेकिन दुनिया के तमाम देशों में बौद्ध धर्म काफी मजबूती से अपनी पकड़ बना रहा है और वह दिन दूर नहीं, जब भारत में भी फिर से बौद्ध धर्म का बोलबाला होगा. रामग्राम के स्तूप की खुदाई में कौन सी नई जानकारी मिलेगी..इसका इंतजार अब सभी को है.

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