Kanwal Bharti: अगस्त 2013 में उत्तर प्रदेश में आईएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल के मस्जिद की दीवार गिरवाने में संलिप्ता का आरोप लगा तक उन्हें पद से निलंबित कर दिया गया था, जबकि दुर्गा नागपाल ने दावा किय़ा था उन्होंने नोएडा में जमीन घोटाले मामले को लेकर जांच शुरु की थी, इसलिए उन्हें फंसाया जा रहा है,.. इस सारे प्रकरण में एक नाम और सामने आया था।
कंवल भारती एक दलित समाज से आने वाले कंवल भारती को अचानक सुबह 7.30 बजे उनके घर से बनियान और पजामा और बाथरूम चप्पल में ही गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस वालों ने कहा कि उनके खिलाफ शिकायत हुई, लेकिन ऐसा व्यावहार किया जैसे कोई पेशेवर मुजरिम हो। पूरे कपड़े भी नहीं पहनने दिए।
सुप्रीम कोर्ट ने भी यूपी सरकार को जमकर लताड़ लगाई
दो धारायें लगाई गई थी धारा 153 ए और 295 आई. पी.सी, यानि की दोनों मामले में मिलाकर 5 साल की सजा होती लेकिन व्यवहार ऐसे किया गया कि वो कोई पेशेवर अपराधी है। हालांकि कसूर उनका केवल इतना था कि दुर्गा नागपाल के हुए निलंबन पर उन्होंने फेसबुक पोस्ट किया था। जिसमें पुलिस ने आरोप लगाया कि कंवल भारती ने पोस्ट में सपा नेता आजम खान के खिलाफ कहा था- आज़म खान रामपुर में कुछ भी कर सकते है क्योंकि यह उन का क्षेत्र है और खुदा भी उन्हें नहीं रोक सकता है”।
जबकि सच्चाई ये थी कि कंवल ने अपने पोस्ट में ऐसा कुछ नहीं कहा और इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने भी यूपी सरकार को जमकर लताड़ लगाई थी, कंवल छूट गए थे, लेकिन इस गिरफ्तारी ने कंवल को दलित लेखक और उनके क्रांतिकारी लेखन के लिए प्रचलित कर दिया। अपने इस वीडियो में हम कंवल भारती की कुछ रचनाओं के बारे में जानेंगे।
कांशीराम के जीवन को दो अलग अलग पहलु
काशीराम कुंजी दो चेहरे, जो कि 2013 में लिखि गई थी। इस रचना में कंवल भारती ने कांशीराम के जीवन को दो अलग अलग पहलुओ में बांट कर लिखा है। कबीर एक विष्लेषण – ये रचना 2015 में आई थी। बहुजन साहित्य का मामला – इस रचना को 2017 में लिखा गया था। आरएसएस और बहुजन चिंतन, पेरियार दशान चिंतन सच्ची रामायण, डॉक्टर अंबेडकर और वाल्मीकी समाज, दलित चिंतन में इस्लाम, दलित धर्म की अवधारणा और बौद्ध धर्म, मदर इंडिया, त्रेता विमर्श और दलित चिंतन, हिंदी क्षेत्र की दलित राजनीति और साहित्य जैसी कई कहानियां, कविताएं और रचनाये कंवल भारती की लिखी हुई है।
कंवल भारत दलितों के प्रखर सपोर्टेर
उनकी रचनायें दलित समाज में क्रांति लाने का, उन्हें जागरूक करने का कार्य करती रही है। कंवल भारत एक मोची जाति से आते है जो कि उत्तर प्रदेश के रामपुर के रहने वाले है। कंवल भारत दलितों के लिए लड़ने वाले लड़ाई के प्रखर सपोर्टेर है। जो दलितों के लिए बखूबी आवाज उठाते है। उनसे जुड़े विवाद के बाद वो ज्यादा प्रचलित हुए और दलितो के लिए एक बड़ा चेहरा बन गए। फिलहाल वो 72 साल के हो चुके है और अपने पैतृक स्थान रामपुर में ही रहते है, जहां वो दलितों के हक के लिए कॉलम और किताबें लिखते है।


