राजस्थान में दलित आईएएस टीना डाबी ने रचा इतिहास, जल संचय संरक्षण के लिए बाड़मेड़ के लिए जीता 2 करोड़ रूपय

Tina Dabi, Tina Dabi me history
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IAS Tina Dabi: साल 2015, ये वो साल है जब दलित समाज की एक बेटी ने अपनी सफलता का परचम लहराया और आईएएस परिक्षा में प्रथम स्थान हासिल किया था, जो आलोचको के चेहरे पर करारा तमाचा जड़ते हुए जहां भी पोस्ट हो रही है वहां उन्होंने उस क्षेत्र के लिए जो कार्य किये है, उससे जनता उनकी वाहवाही करते नहीं थक रही है। जी हां, ये आईएएस ऑफिसर है टीना डाबी। दरअसल टीना डाबी का नाम एक बार फिर से सुर्खियों में छाया हुआ है। जिसका कारण है उनकी वो जीत जिसके लिए उनका साथ पूरी बाड़मेड़ की जनता ने भी दिया.। और बदले में टीना ने बाड़मेड़ की जनता की झोली में 2 करोड़ रूपय का इनाम जीत कर रखा। आईये जानते है क्या है पूरा मामला।

जल संचय जन भागीदारी परियोजना की शुरुआत

दरअसल केंद्र सरकार ने देश भर में बारिश के पानी को संचय करने के लिए जल संचय जन भागीदारी परियोजना की शुरुआत की थी। जिसके तहत भारत के सभी जिलों में आदेश जारी किए गए थे कि जल संचय करने के लिए सबकी क्या क्या नीतियां है औऱ उन्हें कैसे फिर से संचालित किया जा सकता है… इस परियोजना के तहत राजस्थान के बाड़मेड़ जिला की कलेक्टर के तौर पर काम कर रही टीना डाबी ने भी अपने क्षेत्र के लोगो के लिए वर्षा जल को एकत्रित करने के लिए योजना पर काम शुरु किया। यहां उन्होंने बाड़मेड़ की आम जनता को अपने साथ मिल कर हजारों पारंपरिक ‘टांक’ यानी भूमिगत जल संरचनाओं और जल स्त्रोतो को फिर से शुरु करवाया।

टीना को जल संचय जन भागीदारी में मिला प्रथम स्थान

टीना डाबी की इस योजना का नतीजा ये हुआ कि जल संरक्षण की ये मुहीम एक जल संरक्षण आंदोलन की तरह बन गई है। टीना डाबी के इस योगदान का नतीजा ये हुआ कि पूरे देश भर में टीना डाबी और बाड़मेड़ को जल संचय जन भागीदारी में प्रथम स्थान हासिल हुआ। 18 नवंबर को देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मू ने खुद टीना डाबी को 2 करोड़ रूपय की राशि और जीत का सर्टिफिकेट दिया था। बता दे कि केंद्र सरकार ने वर्षा जल के संरक्षण को लेकर कैच द रेन अभियान शुरु किया है, जिसके तहत  पूरे देश को 10,000 से ज़्यादा जल भंडारण संरचनाएँ बनाने और उनका पुर्णनिर्माण करने की योजना बनाई गई है।

दक्षिण भारत में भी एक दलित बेटी ने परचम लहराया

इस लक्ष्य को टीना डाबी की अगुवाई में सबसे पहले पूरा कर लिया गया और उतत्र क्षेत्र में प्रथम स्थान हासिल किया, और जिले की उन्नति के लिए जीत के 2 करोड़ रूपयों को काम में लगाने का लक्ष्य तय किया है। वहीं टीना डाबी की उपलब्धियों के बीच दक्षिण भारत में भी एक दलित बेटी ने परचम लहराया। दरअसल दलित समाज से आने वाली बैंगलुरू की क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र और क्षमता निर्माण एवं ज्ञान केंद्र की प्रिंसिपल डायरेक्टर दीपना नेत्रपाल को GST ऑडिट में नई पहल और बेंगलुरु में ट्रेनिंग सिस्टम के बड़े बदलाव करने के लिए राष्ट्रीय CAG पुरस्कार दिया गया है। दीपना दलित समाज से आने वाली पहली महिला है जिन्हें राष्ट्रीय CAG पुरस्कार से नवाजा गया है।

दलित समाज से आने वाली महिलाओं की ये बड़ी उपलब्धियां बता रही है कि अगर उन्हें मौका मिले तो वो आसमान की बुलंदियों तक ही नहीं अंतरिक्ष में भी जाकर बड़ी उपल्बधियां हासिल कर सकती है। बस जरूरी है कि जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न से ऊपर उठकर सोचने की।

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