Baba saheb rationalist: झाड़-फूँक से दूर थे बाबासाहेब, पर पत्नी रमाबाई ने नहीं छोड़ी आस्था की डोर

Baba Saheb Ambedkar and Ramabai, Ambedkar wife
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Baba saheb rationalist: बाबा साहब आंबेडकर के जीवन में अगर उन्हें वाकई में भारतरत्न बनाने में सबसे बड़ी भूमिका किसी की थी तो वो श्रेय जाता है उनकी पहली पत्नी रमाबाई आंबेडकर को। 14 अप्रैल 1891 में जन्मे बाबा साहब एक महार जाति से थे, जिसमें बाल विवाह होना काफी आम बात थी। फिर भला बाबा साहब कैसे छूट रहती मात्र 14 साल की उम्र में 1906 में उनका विवाह 9 साल की रमाबाई से कर दिया गया। बाबा साहब हमेशा अपनी पत्नी के प्रति संवेदनशील थे।

रमाबाई ने दी बाबा साहब के सपनों को उड़ान

हालांकि हमेशा बाबा साहब की सपनों का उनके ऊंची उड़ान के फैसलों का हमेशा सम्मान किया और उन्हें सपोर्ट किया था। बावजूद इसकी बाबा साहब के कारण उन्हें काफी समय तक एक एकाकी भरा जीवन जीना पड़ा था। लेकिन रमा बाई ने कभी भी बाबा साहब से कोई शिकायत नहीं की। बल्कि वो हमेशा उनका समर्थन करती रही थी। बाबा साहब जब पढ़ने के लिए विदेश जाना चाहते थे तब भी उन्होंने बाबा साहब को सपोर्ट किया था, बाबा साहब और रमा बाई की पांच संताने हुई, जिसके उनके 4 बेटे हुए और एक बेटी।

लेकिन बाबा साहब की मृत्यु के वक्त केवल एक पुत्र ही जीवित बचे थे। बच्चों को खोने के बाद एक संतान को कैसे बचाएं रखा बाबा साहब ने। गरीबी और लाचारी के कारण बच्चों को खोने वाले बाबा साहब ने क्या तंत्र मंत्र का उपयोग किया था अपनी संतान को बचाने के लिए क्या सच में बाबा साहब और उनकी पत्नी तंत्र मंत्र झड़फूंक पर विश्वास करते थे।

इकलौते बेटे की नाराजगी

दरअसल भले ही कभी भी बाबा साहब से उनके एकाकी जीवन के लिए शिकायत ना होती है लेकिन इकलौती बच्ची संतान यशवंतराव आंबेडकर ने अपने भाई बहनों को अपनी आंखों के सामने पैसों के अभाव में इलाज के बिना मारते हुए देखा उन्होंने अपनी मां की आंसू अपने पिता को दर्शक बनकर बच्चों को जाते हुए देखा था यह दृश्य उनके पटल पर इस कदर छा गया कि यशवंत राव ने अपने पिता से नाराजगी जाहिर करने के लिए चुप्पी साध ली थी। खासकर जब उनकी मां का टीबी के कारण देहांत हो गया लेकिन उनके पिता ही राजनीतिक व्यस्तता इतनी थी कि वो उनकी मां को समय तक नहीं दे सकें थे। जबकि बाबा साहब आंबेडकर तो नहीं लेकिन रमा बाई ने हमेशा अपने बेटे की सलामती के लिए भगवान की भक्ति की थी।

क्या तंत्र मंत्र को मानते थे बाबा साहब और रमा बाई

अब सवाल उठता है कि हिन्दू धर्म की ब्राह्मणवादी नीतियों के कारण बाबा साहब ने हिंदू धर्म से नफरत की थी। लेकिन क्या फिर भी उन्होंने अपनी संतान को बचाने के लिए पूजा पाठ तंत्र मंत्र का सहारा लिया था। तो इसका जवाब है नहीं। हालांकि रमा बाई ऐसी भी थी। बाबा साहब के उलट रमा बाई भगवान की आस्था पर बहुत भरोसा करती थी और हिन्दू धर्म को ही सर्वोपरि मानने वालों में थी। इसलिए जब उनको पांच संतानों में से एक के बाद एक गरीबी, लाचारी के कारण चार बच्चों को खो दिया तो भी उन्होंने इसकी शिकायत भगवान से नहीं की।

बाबा साहब की उदासीनता 

वो इसे भगवान की मर्जी मानकर स्वीकार कर लेती थी। हालांकि बाबा साहब की उदासीनता हिंदू धर्म के प्रति धीरे-धीरे बढ़ती ही चली गई और उत्पीड़न ने उन्हें हिंदू धर्म ब्राह्मणवाद और पूजा पाठ के प्रति उदासीन कर दिया शायद यही कारण था कि उन्होंने बौद्ध धर्म अपनाया था लेकिन रमाबाई हमेशा ही भक्ति और धर्म के राह पर चलती थी तंत्र-मंत्र जादू टोना यह सब करने की वजह है वह भक्ति भाव और पूजा पाठ पर भरोसा करती थी और उन्होंने आजीवन अपनी मृत्यु तक हिंदू धर्म के प्रति प्रतिबद्धता दिखाई थी।

इसलिए इस बात में कोई अतिशयोक्ति नहीं है कि बाबा साहब या फिर रमा बाई ने कभी भी जादू टोने तंत्र मंत्र का इस्तेमाल किया हो। न तो कभी अपनों बच्चों को बचाने के लिए और न ही आगे बढ़ने के लिए। बाबा साहब एक तरफ शिक्षा पर भरोसा करते थे, और अंधविश्वास के आंडबरों के भरोसा नहीं करते थे, वहीं रमा बाई भक्ति पूजा पर भरोसा करती थी। इसलिए दोनो ने ही कभी भी अनैतिक रास्ता नहीं अपनाया, जो शायद उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषता थी। आपको क्या लगता है हमें कमेंट करके जरूर बतायें।

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