Buddhism in Cambodia: पूरी दुनिया में अगर किसी धर्म को जातिगत भेदभाव और धार्मिक बंधनो से परे माना जाता है तो वो है बौद्ध धर्म। बौद्ध धर्म को सीधे इश्वर के करीब जाने का रास्ता बताता है। जो शायद इकलौता ऐसा धर्म है जहां अलग अलग पद्दति मानी जाती है। जो जातपात से उपर उठ कर सबको बराबरी से देखता है। बौद्ध धर्म, जो पनपा तो भारत की भूमि पर है लेकिन आज भारत के कई पड़ोसी देशों में इसकी बोलबाला है। और इन्ही में से एक है कंबोडिया।
कंबोडिया, जो पूरे एशिया में सबसे बड़ा बौद्ध आबादी वाला देश है। लेकिन सवाल ये है कि आखिर क्यों कंबोडिया में बौद्ध धर्म की महत्ता है, और कैसे लोगो में बौद्ध धर्म का प्रचार प्रसार हुआ।
कंबोडिया में बौद्ध धर्म का इतिहास
तीसरी शताब्दी में जब भारत के सम्राट अशोक ने श्रीलंका में बौद्ध धर्म का प्रचार प्रसार शुरु किया तो उन्होंने श्रीलंका के साथ साथ उसके आसपास देश, जिसमें कंबोडिया, म्यांमार में भी बौद्ध धर्म का प्रचार प्रसार शुरु किया गया। इतिहासकारों की माने तो कंबोडिया में बौद्ध धर्म का विस्तार करीब पांचवी शताब्दी से शुरु हुआ था, लेकिन उस वक्त कंबोडिया में महायान बौद्ध समुदाय चलते थे। लेकिन मौजूदा समय में कंडोबिया में थेरवाद बौद्ध धर्म का बोलबाला है। 2024 के आकड़ो के अनुसार कंबोडिया की 97.2 प्रतिशत जनता बौद्ध धर्म को फॉलो करती है और वो भी थेरवाद बौद्ध धर्म को। थेरवाद बौद्ध धर्म कम्बोडियन संविधान में देश के आधिकारिक धर्म के रूप में मेंशन किया गया है।
कंबोडिया में बौद्ध धर्म कैसे पहुंचा
कंबोडिया में बौद्ध धर्म के आने से पहले असल में यहां हिंदू धर्म का प्रचलन था। यहां कई राजा हिंदू धर्म को मानने वाले थे, लेकिन हिंदू व्यापारियों के साथ साथ बौद्ध लोग फुनान राज्य में आए। फुनान में बौद्ध अनुयायियों ने राजा पर अपना प्रभाव डाला और फुनान के राजा जयवर्मन I, जयवर्मन VII इन सभी ने बौद्ध धर्म को अपनाया। लेकिन तब ये लोग महायान बौद्ध परंपरा को माने थे। धीरे धीरे कंबोडिया की धरती पर बौद्ध धर्म ने अपने पैर पसारने शुरु कर दिये। चीनी यात्री यिजिंग के मुताबिक सातवी सदी के वक्त कंबोडिया में बौद्ध धर्म काफी फल फूल गया था, जबकि पहली सदी से लेकर पांचवी सदी तक कंबोडिया में हिंदू धर्म का बोलबाला था जो कि शिव और विष्णु को पूजा करते थे।
बौद्ध ग्रंथो को दूसरी भाषाओं में अनुवाद
पांचवी सदी से बौद्ध धर्म फैलने लगा था लेकिन चेनला साम्राज्य जो कि 500 इसवी से 700 ईसवी तक था, उन्होनें बौद्ध धर्म को बढ़ने नहीं दिया। हालांकि बौद्ध धर्म के अवशेष बताते है कि चेनला ने बौद्धो का दमन नहीं किया था। सातवी सदी तक सब कुछ बदल चुका था। फुनान के दो बौद्ध भिक्षुओं, मंदरासेन और संघबारा ने बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए चीन तक की यात्रा भी की और कई बौद्ध ग्रंथो को दूसरी भाषाओं में अनुवाद किया था।
800 ईसवी में अंगकोर के आने से हिंदू भगवान-राजा से महायान बोधिसत्व-राजा में बदलाव होने लगा था, शिव विष्णु की पूजा बंद होने लगी और बुद्ध को पूजा जाने लगा। आठवीं सदी के आखिर और नौवीं सदी की शुरुआत में बौद्ध शैलेंद्र साम्राज्य ने बौद्ध धर्म को पूरी तरह से बढ़ावा दिया। आपको जानकार हैरानी होगी कि 11वी सदी तक कंबोडिया में श्रीविजय की ज़मीन पर फैला महायान बौद्ध धर्म बंगाल के पाल वंश के बौद्ध धर्म और उत्तरी भारत की नालंदा यूनिवर्सिटी जैसा ही था, यानि कि पूरी तरह से भारत से प्रभावित था।
थेरवाद की शुरुआत कब हुई
12 सदी के अंत में कंबोडिया को छोड़ कर सुमात्रा जावा में तंत्रयान और महायान का प्रभाव था, लेकिन कंबोडिया ने तंत्रयान को मानने से इंकार कर दिया। हालांकि राजा सूर्यवर्मन जो कि 1006–1050 तक कंबोडिया का शासक था वो खुद तो महायान परंपरा को मानता था लेकिन उसने थेरवाद को कभी रोका भी नहीं। 12वीं सदी में, अंगकोर के राजा जयवर्मन VII (1181–1215), जो सबसे अहम खमेर बौद्ध राजा माने जाते थे,उन्होंने बौद्ध धर्म को अंगकोर का राजधर्म बनाने के लिए बहुत मेहनत की।
तमालिंडा को थेरवाद बौद्ध धर्म के बारे में शिक्षा ग्रहण भेजा
थेरवाद परंपरा असल में सिंघली-बेस्ड थेरवाद बौद्ध ऑर्थोडॉक्सी सबसे पहले 11वीं सदी में दक्षिण-पूर्व एशिया में तालिंग (मोन) भिक्षुओं द्वारा फैलाई गई थी। इतिहास के मुताबिक 13 वी सदी में राजा जयवर्मन VII ने अपने बेटे तमालिंडा को थेरवाद बौद्ध धर्म के बारे में शिक्षा ग्रहण करने के लिए श्रीलंका भेजा था। जब प्रिंस तमालिंडा दस साल की दीक्षा के बाद लौटे, तो वे एक थेरा थे, एक सीनियर साधु, जो मज़बूत थेरवाद वंश में दीक्षा देने में काबिल थे, जो कट्टरता पर ज़ोर देते थे और तांत्रिक तरीकों जैसे महायान “इनोवेशन” को मना करते थे। उनके लौटने के बाद थेरवाद परंपरा को और ज्यादा बढ़ावा मिला।
थेरवाद के नियम महायान से अलग थे जिस कारण ये तेजी से लोकप्रिय हुआ। 13 वी सदी से लेकर आज तक कंबोडिया में थेरवाद परंपरा ही चल रही है। कंबोडिया की करीब 1 करोड़ 76 लाख 38,801 जनता में 97.1 प्रतिशत जनता बौद्ध धर्म तो मानता है। कंबोडिया पूरे विश्व में सबसे ज्यादा बौद्ध आबादी वाला देश है।



