धार्मिक कट्टरता का प्रहार, तालिबान ने क्यों तोड़ी बामियान की विशाल बुद्ध प्रतिमाएं?

Buddhism in Taliban, Buddhism Religion
Source: Google

जब आप तालिबान का नाम सुनते है तो सबसे पहले आपके जेहन में हथियार थामे, मासूमों का खून बहाते, और आतंकवाद को बढ़ावे देने वाले लोगो का नाम आता होगा। खासकर अफगानिस्तान पर कब्जा करने के लिए तालिबान ने जितनी तबाही मचाई उसके बाद तालिबान को एक आंतकी संगठन ही माना जायेगा। तालिबान एक आंदोलनकारी संगठन है, जो कि एक सुन्नी इस्लामिक आधारवादी आन्दोलन है जिसकी शुरूआत 1994 में दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान में हुई थी। जो कि इस्लामिक कट्टपंथी राजनीतिक आंदोलन भी हैं।

जिसकी सदस्यता केवल पाकिस्तान तथा अफ़ग़ानिस्तान के मदरसों में पढ़ने वाले छात्रों को ही दी जाती है। लेकिन हैरानी की बात ये है कि तालेबान आन्दोलन को सिर्फ पाकिस्तान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने ही मान्यता दे रखी थी, और 2021 में तालीबान ने सबसे ज्यादा अफगानिस्तान में तबाही मचाई। लेकिन सबसे ज्यादा उन्होंने बौद्ध धर्म के बामियान बुद्ध  को नुकसान पहुंचाया। उनकी मूर्तियों को तोड़ा गया। आइये जानते है कि आखिर तालिबान ने क्यों बामियान बुद्ध को सबसे ज्यादा ध्वस्त किया।

क्या है बामियान बुद्ध की कहानी

दरअसल अफगानिस्तान में चीन जाने के रास्ते पर मौजूद रेशम मार्ग में पड़ता था बामयान, बामियान घाटी में बसा था, पांचवी शताब्दी में ये स्थाब प्रमुख बौद्ध विहार हुआ करता था। अफगानिस्तान के इस हिस्से में बौदध धर्म काफी मजबूत रूप से व्याप्त था। पांचवी शताब्दी में एक विशाल बलुआ पत्थर की चट्टानों से काटकर दो विशाल बुद्ध की मूर्ति बनवाई गई। दो अलग-अलग मुद्राओं के साथ बनी ये दो मूर्तियाँ कभी सबसे उंची प्रतीमा था जो कि गुप्त, ससैनियन एवं हेलेनिस्टिक कलात्मक शैलियों के संगम के महान उदाहरण थीं। स्थानीय लोग इन्हें  ‘साल्सल’ जो कि 55 मीटर की थी और ‘शमामा जो कि 38 मीटर की मूर्ति थी, नामों से बुलाते थे। बता दे कि साल्सल का मतलब होता है “प्रकाश ब्रह्मांड के माध्यम से चमकता है”, जबकि शमामा का मतलब “रानी माँ” होता है।

बामियान बुद्ध की प्रतीमा नष्ट करने की मंशा

जब तालिबान आंदोलन ने अफगानिस्तान में पैर पसारने शुरु किये तो इस्लामिक कट्टरपंथी सोच का प्रभाव बढ़ाने के लिए सबसे पहले तालिबान ने 27 फरवरी, 2001 को अफगानिस्तान में मौजूद ऐतिहासिक मूर्तियों को नष्ट करने की अपनी मंशा की घोषणा कर दी। जिसमें सबसे पहले  बामिया घाटी में बनी दोनो बुद्ध की मूर्ति के चेहरे को नष्ट कर दिया गया। हैरानी की बात है कि नौवी शताब्दी तक बामियान घाटी में बौद्ध धर्म था लेकिन धीरे धीरे इस्लामिक ताकते बढ़ी, 12 सदी में जब चंगेज खान ने हमला किया तब भी उसने केवल लूटपाट मचाई, हत्याएं की लेकिन बौद्ध धरोहरो को नुकसान नहीं पहुंचाया।

लेकिन मार्च 2001 में तालिबान ने इस्लामिक बुत परस्ति के खिलाफ अपनी नीतियो को सही ठहराने के लिए   डायनामिट, तोपखाने, रॉकेट और एंटी-एयरक्राफ्ट बंदूक का उपयोग करके बामियान बुद्धों को नष्ट कर दिया। हालांकि एक 2500 हजार साल पुरानी धरोहरो को नष्ट करने का सही कारण तालिबान ने कभी नही बताया।

बामियान मूर्तियों को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन

हालांकि जब तालिबान के पुराने रिकॉर्ड को खंगाले तो ये साफ है कि तालिबान  साल 2000 तक भी ऐतिहासिक धरोहरो को बचाने और पर्यटन को बढ़ावा देने के बारे में बात करता था. तालिबान बामियान मूर्तियों को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन को बढ़ावा देने का प्रमुख स्त्रोत मानता था। मूर्तियो को नष्ट करने के पीछे कई तर्क दिये गए, जिसमें अफागानिस्तान के सूखे की तरफ ध्यान केंद्रित करने के लिए, तो वहीं आतंकी ओसामा बिन लादेन को सौंपने के लिए मजबूर करने के लिए, या फिर बौद्धो के मन में हजारा शिया के लिए जो हमदर्दी थी उसके चिढ़ निकालने के लिए, बुद्ध की मूर्ति तोड़ी गई।

हजारा शिया समुदाय पर अपना अधिकार

हालांकि कभी भी तालिबान की तरफ से इन धरोहरों को नष्ट करने का सटीक कारण नही बताया गया। हालांकि सटीक कारणो के बारे में चर्चा की जायें तो कहीं न कहीं बामियान घाटी में रहने वाले  हजारा शिया समुदाय पर अपना अधिकार करने के लिए ये तबाही मचाई गई है। तालिबान सुन्नी मुस्लिम और पश्तून मुसलमानों का संगठन है वो हजारा शिया से बैर रखते हैं। उन्हें अपने अधिकार में रखने के लिए ही बामियान बुद्ध की प्रतिमाओं को नष्ट कर दिया गया।

आज अफगानिस्तान से बौद्ध धर्म पूरी तरह से नष्ट ही हो गया है। लेकिन बावजूद इसके कट्टरपंथियों की बौद्ध धर्म के अवशेषों को भी नष्ट करने की कुनीति जारी है। दोनो बामियान बुद्ध की प्रतीमा को फिर से बनाने की मांग तो जारी है लेकिन लड़ाई अभी लंबी है। हालांकि 2003 में ये दोनो प्रतीमा यूनेस्को में विश्व धरोहरों में शामिल की गई है। लेकिन इनका जिर्णोधार कब होगा, इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *