सोमेंद्र तोमर के खिलाफ खुला मामला, 47 दलितों की जमीन कैसे बनी ‘शांति निकेतन’ की संपत्ति?

Somendra Tomar
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आपने राजनीतिक गलियारो में विपक्ष को अक्सर बीजेपी के बारे में कहते सुना होगा कि जो अपराधी है, जिन पर संगीन आरोप लगे है, मुकदमें दर्ज है, वो बस बीजेपी का दामन थाम लें और उनके गुनाह सारे बीजेपी की बहाई गंगा में धुल ही जायेंगे। अगर आकड़ो को उठा कर देखे तो छोटे मोटे स्तर पर कई जगहो पर बड़े घोटालों का पर्दाफाश हुआ ही है..लेकिन इसमें सबसे ज्यादा शिकार दलित समाज को ही बनाया जा रहा है। एक ताजा मामला अभी हाल ही में यूपी के मेरठ से सामने आया है जहां एक बीजेपी नेता के खिलाफ दलित समाज की करोड़ो की जमीन को धोखे से औने पौने दामों में खरीदने के मामले को लेकर घेरे जा रहा है।

धोखाधड़ी कर के ट्रस्ट ‘शांति निकेतन’ किया अपने नाम

इतना ही नहीं बेचारे दलितों को बीमार न होते हुए भी गंभीर रूप से बीमार बताया, या तो उन्हें विस्थापित बता कर नकली दस्तावेज बना कर उनकी जमीनों की हड़प लिया। अब इस मामले में अधिवक्ता शेरा जाट (सूर्य प्रकाश) ने यूपी के ऊर्जा राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर पर गंभीर आरोप लगाते हुए खुलासा किया कि दलितों की जमीनों को धोखाधड़ी कर के तौमर ने अपनी ट्रस्ट ‘शांति निकेतन’ के नाम करवा लिया।

इस मामले में करीब 100 करोड़ रूपय की जमीन की हेराफेरी सामने आई है। शेरा जाट ने तोमर के खिलाफ उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि मेरठ के कायस्थ गांवड़ी में लगभग 100 करोड़ रुपये की दलितों की पट्टेदार जमीन को मंत्री ने अपने ट्रस्ट के नाम करा लिया। यह जमीन मेरठ विकास प्राधिकरण (Meerut Development Authority) की कॉलोनी के पास है और आज इसकी कीमत पांच से सात गुना बढ़ चुकी है।

शेरा जाट ने इस जमीन के खरीद-बिक्री में प्यारे लाल शर्मा अस्पताल के डॉक्टर और एडीएम प्रशासन की भूमिका पर भी सवालिया निशान खड़े कर दिये। उन्होंने पूछा कि दलितों को अचानक एक ही दिन में लाइलाज बिमारियां कहां से निकल आई… ट्रस्ट ने पिछले तीन सालों में 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की जमीन खरीदी है..शांति निकेतन ट्रस्ट के पास इतनी बड़ी रकम आखिर आई कहां से।

एडीएम प्रशासन पर भी उठे सवाल

शेरा जाट ने एक ही दिन में सारी प्रकिया पूरी होने पर संदेह जताते हुए कहा कि जमीन बेचने की परमिशन मिलने के दिन, यानी कि 13 सितंबर 2024 को ही दस पट्टेदारों की जमीन के बैनामे हो गए। लेकिन इससे भी चौंकाने वाली बात यह है कि स्टाम्प खरीदने की प्रक्रिया 11 सितंबर 2024 से पहले ही पूरी हो चुकी थी। जो कि आधिकारिक पदों के दुरूपयोग का साफ संकेत है। दो दिनो के अंदर ही कैसे सब कुछ आसानी से हो गया।

आम आदमी पार्टी की प्रतिक्रिया

बड़ी मात्रा में दलितो की जमीनो को हथियाने को लेकर आप के राज्यसभा  (Rajya Shabha) सदस्य संजय सिंह ने तोमन पर निशाना साधते हुए कहा कि मंत्री ने परतापुर के कायस्थ गांवड़ी में 47 दलितों की जमीन साजिश के तहत कब्जा की है। जिसमें मंत्री ने राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल कर 37 लोगों के फर्जी बीमारी प्रमाण पत्र बनवाए और 10 को विस्थापित दिखाकर जमीन खरीदने की अनुमति ली गई, और हैरानी की बात है कि बिना किसी जांच के अनुमति दे भी दी गई।

यदि राजनीतिक दबाव और साजिश न होती तो सभी जमीनें एक ही खरीदार, यानी राज्यमंत्री के पास नहीं जातीं। उन्होंने चेतावनी दी कि आप सड़क से लेकर संसद तक इस लड़ाई को आगे बढ़ाएगी और मेरठ में बड़े पैमाने पर आंदोलन किया जाएगा ताकि दलितों के अधिकारो की रक्षा की जा सकें, उन्हें उनका हक मिल सकें।

जिला अध्यक्ष को भेजा 5 करोड़ का मानहानि नोटिस

इस विवाद में आप के मेरठ जिला अध्यक्ष अंकुश चौधरी भी फंसे हैं। उन्होंने राज्यमंत्री पर पहले ही दलितों की जमीन हड़पने का आरोप लगाया था लेकिन इन आरोपो को लेकर तोमर ने उल्टा 5 करोड़ रुपये का मानहानि का नोटिस भेज दिया। अंकुश चौधरी ने बताया कि डीएम की अनुमति नियमों के अनुसार तभी दी जाती है जब विक्रेता गंभीर रूप से बीमार हो या विस्थापित हो। लेकिन इस मामले में 47 लोगों की जमीन सिर्फ तीन दिनों में मंत्री के नाम कर दी गई।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि लोग गंभीर रूप से बीमार थे, तो प्रशासन ने उनकी मदद क्यों नहीं की, बल्कि उनकी जमीनों को इतने कम दामों में इतनी आसानी से कम समय में क्यों खरीद ली गई। जबकि सरकार की तरफ से तो दलितो के मदद होने का दावा किया जाता है। सच्चाई तो ये है कि दलितों के साथ अन्नाय हुआ है, जिसे खुद सरकार में बैठे नेताओं ने किया है तो भला वो कहां से उनके अधिकारों क रक्षा करेंगे। ऐसे में क्या दलितो को वाकई में न्याय मिल पायेगा.. ये सोच भी थोड़ी अटपटी लगने लगी है।

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