Battle of Galwan: अभी हाल ही में 27 दिसंबर को सलमान खान की मोस्ट अवेटेड फिल्म बैटल ऑफ गलवान की टीजर लॉंच हुआ है। इस टीजर में सलमान भारत माता की जय, बजरंगबली की जय के साथ साथ बिरसा मुंडा की जय के नारे लगा रहे है, फिल्म के टीजर से ज्यादा बिरसा मुंडा का नाम लेना चर्चा का विषय बना हुआ है। जय श्री राम, जय बजरंगबली तो उससे पहले भी कई बार आपने सलमान खान को बोलते हुए सुना होगा लेकिन ये पहली बार हुआ है जब सलमान ने बिरसा मुंडा का जिक्र किया है, उनकी जयकार के नारे लगाये है। ऐसे में सवाल ये उठता है कि गलवान हिंसा का बिरसा मुंडा से क्या कनेक्शन है, और क्या है बैटल ऑफ गलवान।
बैटल ऑफ गलवान क्या है
भारत का पड़ोसी देश चीन के साथ होने वाला सीमा विवाद कोई नया नहीं है। कभी सिक्किम पर, तो कभी अरूणाचल प्रदेश की सीमा पर…चीन अक्सर भारत की जमीन पर अपना दावा करता ही रहता है, लेकिन लद्दाख के गलवान क्षेत्र में चीन ने सारी हदें पार कर दी। भारत के मना करने के बाद भी चीन ने घुसपैठ करने की कोशिश की। दोनो देशों के बीच समझौता था कि गलवान में हथियार इस्तेमाल नहीं कर सकते थे, इसलिए ये लड़ाई लाठी डंडो और बाहुबल से हुई थी। दरअसल ये घटना 15 जून 2020 को घटित हुई थी, जब कई हफ्तों के तनाव के बाद चीन ने अपनी असलियत दिखाते हुए बफर जोन में अपना कैंप लगा दिया था, जिसे भारतीय सैनिको ने विरोध दर्ज कराया था, नतीजा गलवान घाटी में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) के पास रात के समय चीन ने हमला कर दिया था।
माइनस डिग्री से भी कम के तापमान
गलवान घाटी असल में 14,000 फीट की ऊंचाई पर जमा देने वाले शून्य से नीचे के तापमान वाला क्षेत्र है, जहां झड़प के कारण भारत के 20 सैनिक शहीद हो गए थे। रिपोर्ट्स की माने तो कुछ सैनिक लगभग 80 किलोमीटर तक बहने वाली तेज़ बहने वाली गलवान नदी में गिर गए थे, तो वहीं माइनस डिग्री से भी कम के तापमान में ठंड के कारण उनकी मौत हो गई थी। पिछले 45 सालों में चीन और भारत के साथ होने वाली सबसे बुरी हिंसक झड़प थी। जिसने भारत औऱ चीन के रिश्तों को और ज्यादा खराब कर दिया।
क्या है आदिवासी समाज से रिश्ता
फिल्म बैटल ऑफ गलवान के टीजर में आपने बिरसा मुंडा की जय का नारा लगाते हुए सलमान को सुना होगा, बिरसा मुंडा जो कि आदिवासियों के भगवान माने जाते है, उनके बारे में आखिर क्यों जिक्र किया गया इसका क्या रिश्ता है। तो आपको बता दें कि इस वॉर में जवानों का नेतृत्व करने वाले थे 16 बिहार रेजिमेंट की कमान संभालने वाले 37 साल के कर्नल बिक्कुमल्ला संतोष बाबू। जो इस हमले में लड़ते हुए शहीद हो गए थे। दरअसल सलमान खान ने संतोष बाबू के रोल को ही जीवंत करने की कोशिश की है लेकिन ये उनकी बायोग्राफी नहीं कहीं जा सकती है, हालांकि सलमान के बिरसा मुंडा की जय बोलने के पीछे के वजह संतोष बाबू के जन्म स्थान को कहा जा सकता है।
बिरसा मुंडा की बहादुरी की किस्से
संतोष बाबू किसी आदिवासी समुदाय से नहीं थे, और न ही कहीं भी उनके आदिवासी होने का जिक्र है, लेकिन संतोष बाबू का जन्म 13 फरवरी 1983 को आंध्र प्रदेश के सूर्यापेट में हुआ था, जो अब तेलंगाना में आ चुका है। सुर्यापेट तेलांगाना का एक ऐसा जिला है जहां करीब 12 प्रतिशत आबादी आदिवासी समाज से है, संतोष बाबू की परवरिश आदिवासी समाज के साथ ही हुई, बिरसा मुंडा की बहादुरी की किस्से सुनकर ही बड़े हुए थे। इसलिए आदिवासियो के भगवान कहलाने वाले बिरसा मुंडा के व्यक्तित्व का उन पर असर था।
वहीं इन 20 जवानों में 2 जवान, गणेश हंसदा जो कि झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के रहने वाले थे, औऱ दूसरे थे सूबेदार नंदूराम सोरेन जो कि उड़िसा के मयूरभांज जिले के रहने वाले थे, ये दोनो ही आदिवासी समाज से आते थे। शहीद होने वाले 20 जवानों में अलग अलग राज्य से आने वाले जवान थे, जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों को न्योछावर कर दिया। एक सिपाही के लिए जाति धर्म समुदाय मायने नहीं रखता, अगर कुछ मायने रखता है तो वो है केवल देश की रक्षा। गलवान में हुए बैटल में हमेशा आदिवासी समुदाय के वीर सिपाहियों की वीरता को याद रखा जायेगा।



