Ambedkar and Buddhism: धर्मांतरण से पहले बाबा साहेब का गहन शोध, जानें किन-किन धर्मों का किया था उन्होंने अध्ययन

Ambedkar and Buddhism
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Ambedkar and Buddhism:  ये तो हम सभी जानते हैं कि बाबा साहब आंबेडकर ने हिंदू धर्म के जातिगत भेदभाव से त्रस्त होकर बौद्ध धर्म अपना लिया था। इतना ही नहीं बाबा साहब ने बौद्ध धर्म अपनाने से पहले कई देशों की यात्रा की थी, उस पर अपनी एक किताब बुद्ध एंड हिज धम्म भी लिखी थी। उनकी किताब बताते है कि बाबा साहब ने बौद्ध धर्म को लेकर कितनी गहन जांच की थी। लेकिन क्या अपने कभी ये सोचा है कि बाबा साहब ने केवल बौद्ध धर्म ही क्यों अपनाया, जबकि भारत में बौद्ध धर्म की वैल्यू धीरे धीरे घट रही थी तो उन्होंने बौद्ध धर्म अपनाने का क्यों सोचा, जबकि भारत में बौद्ध धर्म के अलावा की कई मुख्य धर्म थे।

यहां तक कि सिख धर्म या ईसाई धर्म भी जातिगत भेदभाव के खिलाफ ही रहे है, फिर उन्होंने उन धर्मों को क्यों नहीं चुना। अपने इस वीडियो में हम जानेंगे कि बाबा साहब ने अपना धर्म परिवर्तन करने से पहले किन किन धर्मों के बारे में जानकारी हासिल की थी, और क्यों उन धर्मों को चुनने के बजाय उन्होंने बौद्ध धर्म ही चुना।

बाबा साहब ने किस किस धर्म का किया अध्ययन –Ambedkar’s analysis of world religions

बाबा साहब आंबेडकर ये मानते थे कि हिन्दू धर्म का ही भी जातिवाद से ऊपर नहीं उठ पाएगा, और यहीं कारण है कि हिन्दू धर्म से कभी भी जातिगत भेदभाव छुआछूत खत्म नहीं होगा। ब्राह्मणवाद सोच और सत्ता के कारण हमेशा दलित, शूद्र और पिछड़े लोग पीड़ित ही रहेंगे। हालांकि उन्होंने तमाम कोशिश की कि वो दलितों के लिए बराबरी और सम्मान के लिए लड़ाई लड़े और उन्हें बराबरी का हक दिलाए, जिसके लिए उन्होंने महार सत्याग्रह किया था, लेकिन उल्टा सवर्णों ने इस सत्याग्रह के बदले दलितों के खून से होली खेली। नतीजा बाबा साहब की दलितों को सम्मान दिलाने के आखिरी कोशिश भी नाकाम साबित होती गई, और उन्होंने तय कर लिया कि वो अब किसी कीमत पर हिंदू धर्म से खुद को अलग कर लेंगे और वहां से शुरू हुई बाबा साहब की हर धर्म को जानने और समझने की यात्रा ।

ईसाई धर्म को लेकर बाबा साहब की सोच – Why did Ambedkar study Islam and Christianity?

बाबा साहब अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों में रहे, जहां उन्होंने देखा था कि ईसाई धर्म में जातिगत भेदभाव नहीं है, वहां कोई आपको जाति के आधार पर जज नहीं करता, इसीलिए बाबा साहब ने ईसाई धर्म को जानने के लिए एक पादरी से भी दोस्ती की। वो रेगुलर चर्च जाते थे, वो ईसाई बनना चाहते थे, लेकिन धीरे धीरे उन्होंने समझा कि जो ईसाई धर्म अपना रहे है, उन्हें केवल कुछ आर्थिक मदद तो मिल जाती है लेकिन ईसाई बनने के बाद भी जो भेदभाव उन्हें समाज में सहना पड़ता है उसके खिलाफ ईसाई मिशनरी कोई कदम नहीं उठाती और न ही उनके लिए खड़ी होती थी, बाबा साहब समझ गए थे कि ईसाई बनने के बाद भी वो भेदभाव से निकल नहीं पाएंगे।

बाबा साहब ने सिख धर्म को जाना – Ambedkar’s research on Sikhism

इसके बाबा साहब का ध्यान भारत के एक और प्रमुख धर्म सिख धर्म की तरफ गया। बाबा साहब ने सिख धर्म पर भी अपनी खोजबीन शुरू की। बाबा साहब ने जाना कि सिख गुरुओं ने जातिगत भेदभाव को दूर करने और समानता वाले समाज को स्थापित किया जो कि उन्होंने किसी और धर्म में नहीं पाया था लेकिन साथ ही उन्होंने ये भी जाना कि जो दलित और पिछड़े सिख धर्म में आए उन्हें असल में न तो जातिगत भेदभाव से मुक्ति मिली और न ही उनके नेतृत्व को बाकी सिख समाज स्वीकार करता है। उन्होंने जाना कि सिख बनने के बाद भी वो दलित ही रहेंगे, जैसा कि सिख धर्म में अलग अलग कम्युनिटी बंटी है। जिसी सिख धर्म में जातिगत भेदभाव काफी प्रभावशाली बना हुआ है। और उन्होंने सिख धर्म अपनाने का विचार त्याग दिया।

इस्लाम को लेकर बाबा साहब के विचार – Ambedkar’s thoughts on Islam

बाबा साहब ने इस्लाम धर्म का भी अध्ययन किया था। केवल एक ईश्वर को मानने और उसमें भेदभाव न करने की उनकी सोच की सराहना करते थे। लेकिन उन्होंने पाया कि इस्लाम धर्म में की सोच केवल एक दायरे तक ही सीमित है, जो सामाजिक तौर पर उत्थान और विकास को मान्यता नहीं देते। बाबा साहब ने इस्लाम को एक बंद और कैद धार्मिक व्यवस्था माना, जो कहीं न कहीं आजादी को छीन लेती है।

इसके बाद बाबा साहब ने पारसी धर्म का भी अध्ययन किया। लेकिन इन सब में उन्होंने पाया कि केवल बौद्ध धर्म ही ऐसा धर्म है जो उन्हें अपने सिद्धांतों को नए तरीके से रखने और नैतिक सिद्धांतों के साथ चलता है, जिसमें तर्क करने की शक्ति दी जाती है, और सभी को सामान समझा जाता है। जिस कारण उन्होंने बौद्ध धर्म को चुना। बाबा साहब का बौद्ध धर्म को चुनना कोई जल्दबाजी में लिया गया फैसला नहीं था बल्कि उन्होंने बहुत सोच विचार कर ये फैसला लिया था, जो दलितों को बराबरी और सम्मान से जीने का हक देने के लिए उठाया गया कदम था। बाबा साहब का ज्ञान बताता है कि क्यों बौद्ध धर्म इतना महान है। बाबा साहब के इन अध्ययनों को लेकर आपकी क्या राय है।

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