295 BNS in Hindi: भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 295 बच्चों को अश्लील कंटेट से बचाने से संबंधित है, तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस (BNS) में इसके के बारे में क्या कहा गया है।
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धारा 295 क्या कहती है? BNS Section 295 in Hindi
जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस (BNS) की धारा 293 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 293… धारा 295 को बच्चों की नैतिकता की रक्षा करने के मकसद से बनाया गया एक बहुत ही महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधान है। वही यह धारा खास तौर पर “युवा लोगों” की नैतिकता को भ्रष्ट होने से रोकने के लिए बनाई गई है। जो किसी भी व्यक्ति को बच्चे को ऐसी सामग्री बेचने, देने, बांटने, दिखाने या बढ़ावा देने से रोकता है।
BNS 295 Important Points
- इस सेक्शन का मुख्य मकसद बच्चों और youth को ऐसी चीज़ों के संपर्क में आने से रोकना है जो उनके दिमाग और character पर बुरा असर डाल सकती हैं।
- इसके अलवा आपको बता दें, चाइल्ड पोर्नोग्राफ़ी से जुड़े मामलों में, POCSO एक्ट और IT एक्ट की धाराएं भी लागू होती हैं, जिनमें और भी कड़ी सज़ा का प्रावधान है।
बीएनएस धारा 295 का उदहारण
For Example: यह सेक्शन किसी भी ऐसे व्यक्ति पर लागू होता है जो बच्चों को अश्लील किताबें, तस्वीरें, वीडियो, या कोई भी दूसरा ऑडियो-विज़ुअल कंटेंट दिखता है। जिसके कारण मानिसक तनाव होता है। तो फिर अपराधी पर यह धारा लागू होती है।
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बीएनएस धारा 295 की और सजा
इसके अतिरिक्त, बीएनएस (BNS) की धारा 295 के तहत, यदि किसी व्यक्ति को दोषी (Guilty) ठहराया जाता है, तो उसके लिए सजा निर्धारित की गई है। यह तब लागू होता है जब कोई व्यक्ति लापरवाही से ऐसा कुछ करता है जिससे बीमारी फैलने, या चोट लगाने की संभावना हो। इस सेक्शन के तहत पहला अपराध करने पर अपराधी को 3 साल तक की जेल और ₹2,000 तक का जुर्माना तक का जुर्माना हो सकता है। वही दूसरी बार अपराध करने पर 7 साल तक की जेल और ₹5,000 तक का जुर्माना अगर यह मामला नाबालिगों से जुड़ा हो। इसके अलवा आपको बता दें, यह एक गैर-संज्ञेय (non-cognizable) अपराध है, इसलिए पुलिस को जाँच के लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति चाहिए होती है।



