Karnataka news: कर्नाटक के बेंगलुरु से एक ताज़ा खबर सामने आई है, जहाँ कुछ समय से मुख्यमंत्री सिद्धारमैया (Chief Minister Siddaramaiah) की जगह किसी दलित मुख्यमंत्री (Dalit Chief Minister) को बनाने की मांग हो रही थी। हालांकि, हाल के घटनाक्रम इन मांगों के बिल्कुल उलट हैं और इन्होंने राजनीतिक माहौल को एक नया मोड़ दे दिया है। जी हाँ, सिद्धारमैया सरकार का बड़ा फैसला लेते हुए दलित और पिछड़ा वर्ग के मठों को 255 करोड़ की मंजूरी दी है।
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कर्नाटक कैबिनेट का बड़ा फैसला
राजनीतिक गलियारों में अक्सर हलचल रहती है, कभी किसी एक मुद्दे पर तो कभी किसी बड़े विवाद पर। कर्नाटक में भी काफी समय से ऐसी ही राजनीतिक उथल-पुथल चल रही है। जहां की दलित राजनीति ने नया मोड़ ले लिया है, जिससे अब शायद दलित समाज भी कन्फ्यूज हो जाए कि किसे चुने। दरअसल पिछले कुछ महीनों से लगातार दलित समाज सीएम सिद्धारमैया को पद से हटाकर दलित मुख्यमंत्री की मांग कर रहे थे, क्योंकि उनका आरोप था कि मौजूदा सरकार दलितों के लिए कुछ नहीं कर रही है, लेकिन सीएम ने दलितों और पिछड़े समाज के लिए बड़ा कदम उठाते हुए बंगलूरू में 22 दलित और ओबीसी मठों को 255 करोड़ रुपये की जमीन देने पर मजूरी दे दी है।
करोड़ो की जमीन को मिली मंजूरी
दरअसल, कर्नाटक कैबिनेट ने 22 अलग-अलग मठों को बेंगलुरु उत्तर के दासनपुरा होबली (Dasanapura Hobli) में रावुथनहल्ली गांव (Ravuthanahalli village)के सर्वेक्षण संख्या 57 और 58 में 40 एकड़ भूमि के आवंटन को मंजूरी दे दी है। लेकिन हैरानी की बात है कि अब सरकारी महकमें के लोग सरकार के इस कदम का विरोध कर रहे है। अधिकारियों का कहना है कि दान की गई जमीन गोमाला जमीन है और शहरी क्षेत्र के अंतर्गत आती है, इसीलिए ये जमीनी निजी कामों के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकते है।
इसलिए वो कानूनी शिकंजे में फंस सकते है। आपको बता दे कि पिछले साल को शुरुआत में ही दलित और पिछड़े समाज के लिए संतों ने अपने सामाजिक कार्यों और संस्थानों को चलाने के लिए सरकार से जमीन मांगी थी। अब देखना ये होगा कि दलितों को लुभाने के लिए उठाया गया कांग्रेस सरकार का ये कदम कहीं उनपर ही तो भारी नहीं पड़ने वाला है, या जमीन देने की बात केवल विरोध को दबाने के लिए किया गया दिखावा मात्र ही था।



