BNS Section 301: अब शवो के अंतिम संस्कार में बाधा डालना, दंडनीय अपराध

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301 BNS in Hindi: कभी-कभी हम अपने आस-पास ऐसे मामले देखते हैं, जहाँ किसी की मौत के बाद, कुछ लोग शव को जलाने से रोकते हैं या जानबूझकर जलाने के बजाय दफना देते हैं, जिससे उस धर्म के लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचती है। लेकिन क्या आप जानते है ऐसे मामले में किस तरह की सज़ा होगी? तो आपको बता दें, ऐसा करने पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 301 लागू होती है। तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस (BNS) में इसके के बारे में क्या कहा गया है।

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धारा 301 क्या कहती है? BNS Section 301 in Hindi

जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस (BNS) की धारा 301 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 301…श्मशान घाटों, कब्रिस्तानों और पूजा स्थलों की पवित्रता सुनिश्चित करता है। यह धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना, लाशों का अपमान करना, या अंतिम संस्कार समारोहों में बाधा डालना दंडनीय अपराध बनाता है।

BNS 301 Important Points

  • यह कानून यह सुनिश्चित करता है कि कब्रिस्तान, श्मशान घाट और दफन स्थलों पर शवों का अनादर न हो, और इन जगहों पर शांति बनी रहे। कई बार हम अपने आस पास ऐसी खबरे देखते और सुनते है, जहाँ पर शवो का अनदार किया गया हो।
  • यह धारा पहले भारतीय दंड संहिता (IPC) की पुरानी धारा 297 का आधुनिक स्वरूप है। अब  इसे बदलकर BNS की धारा 301 कर दिया हैं।

बीएनएस धारा 301 का उदहारण 

For Example: मान लीजिए कि ‘राम ‘ और ‘शाम’ के बीच ज़मीन के एक टुकड़े को लेकर लंबे समय से झगड़ा चल रहा है। ‘शाम ‘ के परिवार में किसी की मौत हो जाती है, और वे अपने पारंपरिक कब्रिस्तान या श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे हैं। लेकिन राम का परिवार उन्हें अंतिम संस्कार करने में मुश्किलें पैदा करता है जिससे उनकी धार्मिक भावना आहात होती है तो यह धारा लागू होती है।

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बीएनएस धारा 301 की और सजा

इसके अतिरिक्त, बीएनएस (BNS) की धारा 301 के तहत, यदि किसी व्यक्ति को दोषी (Guilty) ठहराया जाता है, तो उसके लिए सजा निर्धारित की गई है। यह तब लागू होता है जब कोई व्यक्ति लापरवाही से किसी की धार्मिक भावना को नुकसान पहुँचता है या फिर किसी की मौत हो जाने पर अंतिम संस्कार में मुश्किले पैदा करता है तो इस सेक्शन के तहत अपराधी को साधारण दंड और1 साल की सजा के साथ जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलवा आपको बता दें, यह एक गैर-संज्ञेय (non-cognizable) अपराध है, इसलिए पुलिस को जाँच के लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति चाहिए होती है।

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