Mayawati Statement: UGC यानी (University Grant Commision) के नए नियमों को लेकर सियासी गलियारों में भी हड़कंप मचा हुआ है… और चारों ओर से विरोध की आवाजें गूंज रही हैं इन गूंज में एक और आवाज अब शामिल हो गई है, हम बात कर रहे है आवाज बसपा प्रमुख की मायावती ने अपने सोशल मीडिया पर एक लंबा चौड़ा पोस्ट किया.. जिसमें उन्होंने चेतावनी तक दें डाली…जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.. तो चलिए इस लेख में बताते है कि बसपा मुखिया मायावती ने क्या कहा?
मायावती का सोशल मीडिया पोस्ट
बसपा सुप्रीमो मायावती ने उच्च शिक्षण संस्थानों में ‘इक्विटी कमेटी’ (समता समिति) के गठन को अनिवार्य बनाने वाले UGC के नए नियमों का समर्थन किया है. उनका कहना है कि सामान्य वर्ग के कुछ लोगों द्वारा इन नियमों का विरोध करना उचित नहीं है… हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे नियमों को लागू करने से पहले व्यापक स्तर पर चर्चा और सहमति बनाई जानी चाहिए थी, ताकि सामाजिक तनाव की स्थिति न बने.
अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मायावती ने लिखा कि कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जाति आधारित भेदभाव को खत्म करने के उद्देश्य से लाए गए UGC के ‘समानता को बढ़ावा देने वाले नियम 2026’ को कुछ ‘जातिवादी मानसिकता’ वाले लोग गलत तरीके से भेदभावपूर्ण बता रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी और निजी दोनों तरह के उच्च शिक्षण संस्थानों में इक्विटी कमेटियों का गठन भेदभाव के मामलों को सुलझाने के लिए जरूरी कदम है. साथ ही मायावती ने यह भी कहा कि इन नियमों के कुछ प्रावधानों का विरोध वही लोग कर रहे हैं जो इन्हें साजिश और पक्षपातपूर्ण बताकर गलत संदेश फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने सरकार और संस्थानों को सलाह दी कि ऐसे कदम उठाते समय सभी वर्गों को विश्वास में लेना चाहिए, ताकि समाज में तनाव की स्थिति न बने.
मायावती ने दलित समाज से अपील की
बसपा प्रमुख ने दलितों और पिछड़े वर्गों से अपील की कि वे भड़काऊ बयानों से प्रभावित न हों और अपने नाम पर राजनीति करने वालों से सतर्क रहें. उनके मुताबिक, कुछ स्वार्थी और अवसरवादी नेता इन वर्गों को भड़काकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश करते हैं…और जो लोग इसका विरोध कर रहे है वह जातिवादी मानसिकता की सोच रखते है. UGC ने 13 जनवरी को इन नए नियमों की अधिसूचना जारी की है, जिसके तहत सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव से जुड़ी शिकायतों की सुनवाई और समावेशी माहौल सुनिश्चित करने के लिए इक्विटी कमेटियों का गठन अनिवार्य किया गया है… इन कमेटियों में OBC, SC, ST, दिव्यांग और महिलाओं का प्रतिनिधित्व जरूरी होगा.
सोशल मीडिया पर कविता के माध्यम विरोध जताया
आपको बता दें, ये नियम 2012 के पुराने इक्विटी दिशानिर्देशों की जगह ले रहे हैं, जो मुख्यतः सलाहकारी थे.. नए नियमों को लेकर उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में छात्र संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया है. आलोचकों का कहना है कि इनका दुरुपयोग हो सकता है. इन आशंकाओं पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्ट किया कि नए ढांचे के तहत किसी के साथ अन्याय या भेदभाव नहीं होगा और किसी को भी नियमों का गलत इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी. वहीं, कवि कुमार विश्वास ने सोशल मीडिया पर कविता के माध्यम से इन नियमों का विरोध जताया है और इन्हें वापस लेने की मांग की है… कुछ संगठनों, जैसे करणी सेना, ने भी इन नियमों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है.
सामान्य वर्ग के कुछ लोगों का तर्क है कि ये नियम एकतरफा हैं और उनके खिलाफ इस्तेमाल किए जा सकते हैं. इसी संदर्भ में पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने इन नियमों को ‘ब्राह्मण विरोधी’ बताते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया है… वहीं, दूसरी ओर कई लोग इन नियमों को ऐतिहासिक भेदभाव को दूर करने और उच्च शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में एक जरूरी कदम मान रहे हैं. कुल मिलाकर UGC के ये नए नियम उच्च शिक्षण संस्थानों में SC, ST, OBC और अन्य वंचित वर्गों के खिलाफ भेदभाव रोकने के उद्देश्य से लाए गए हैं, जिनके तहत हर कॉलेज और विश्वविद्यालय में ‘इक्विटी कमेटी’ बनाना अनिवार्य होगा.



