Top 5 Dalit news: आज लोगों की मानसिकता इस तरह की हो चुकी है कि अगर किसी अपराध में किसी पिछड़े दलित का नाम सामने आ गया तो मतलब साफ है कि बिना सबूत गवाह के ही वो अपराधी बना दिये जाते है भले ही चाहे वो बेगुनाह ही क्यों न हो। कानून के दायरे में जाने से पहले ही मनुवादी आतंकियों द्वारा उन्हें सजा दे दी जाती है। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में बतायेंगे, जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी वायरल है।
साक्षी महाराज ने सवर्णों को दी चुनौती
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला मध्य प्रदेश के विवादित वकील अनिल मिश्रा को लेकर है। अब तक हिंदूवाद का गुण गाने वाले अनिल मिश्रा अब खुद ही एक हिंदूवादी संत और भाजपा सांसद साक्षी महाराज के खिलाफ हो गए हैं। जिसका कारण है साक्षी महाराज का वह बयान जिसमें उन्होंने खुले तौर पर स्वर्ण को शांत रहने की बात कही है। अनिल मिश्रा ने कहा कि साक्षी महाराज का बयान पूरी तरह राजनीतिक धमकी है, कुछ नेता समाज का प्रतिनिधि नहीं करते बल्कि जातिगत तौर पर बांटने के लिए जातिवादी ठेकेदार बन चुके है।
साक्षी महाराज की चुनौती समाज का अपमान नहीं लोकतांत्रिक मर्यादा को ललकारने की कोशिश है। बता दे कि साक्षी महाराज ने खुले तौर पर सवर्णों को शांत रहने के लिए कहा था , साथ ही उन्होंने कहा कि सवर्ण केवल 10% है और एसीसी एसटी OBC की संख्या 90% है, अगर बहुजन समाज चाह जाए तो कोई भी सवर्ण कभी भी विधायक या सांसद नहीं बन पाएगा, यानि की एसीसी एसटी OBC के बिना सवर्णों की भी कोई बड़ी पहचान नहीं है। साक्षी महाराज के बयान से तिलमिलाए अनिल मिश्रा ने साक्षी महाराज को ही घेरने की कोशिश की है, लेकिन आप अपनी राय बताइए कि साक्षी महाराज की बात कहां तक गलत है।
यूपी में बीडीओ ऑफिस में बीजेपी नेता की दादागिरी
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के संत कबीरनगर से है, जहां न केवल महिला BDO श्वेता वर्मा के ऑफिस में घुसकर उनके साथ अभद्रता की गई बल्कि दलित सचिव रमाकांत को जातिसूचक गालियां देकर डंडे से दौड़ा दौड़ा कर पीटा गया। ये घटना संत कबीर नगर जिले के पौली विकास खंड की है, जहां एक बीजेपी नेता बीजेपी नेता अरविंद सिंह की दबंगई देखने को मिली।
लेकिन हैरानी की बात है कि एक बीडीओ ऑफिस में इतनी बड़ी घटना होती है लेकिन पुलिस 24 घंटे बीत जाने के बाद भी कोई कार्यवाई नहीं करती, ऊपर से बीडीओ और सचिव को मामले में में समझौता करके रफा दफा करने के भी कोशिश की जा रही है, इस घटना पर पुलिस की लचरता के कारण ग्राम पंचायत अधिकारी संघ के जिलाध्यक्ष क्षितिज चौधरी ने रोष जताते हुए कहा कि जब तक बीजेपी नेता के खिलाफ कार्यवाई नहीं होती तब तक कई ब्लॉक में तालाबंदी कर दी गई है, और काम बंद रहेंगे। जिसके बाद पुलिस नींद से जागी है औऱ जल्द से जल्द कार्यवाई का आश्वासन दिया है। अब जरूरत है कि दलितों और ऐसे ही एकजुट होना पड़ेगा तभी जातिवादियों को मुंह तोड़ जवाब मिलेगा।
अलीगढ़ में दलितों के साथ मारपीट
3, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से है, जहां केवल दलित समुदाय के एक युवक ने दूसरे समुदाय के घर जाकर अपनी बकरी के बारे में क्या पूछा, उल्टा दबंगों ने उसे ही चोर बता कर पहले तो उसे बुरी तरह से पीटा और फिर पुलिस भी बुला ली। ये घटना अलीगढ़ के बरला कस्बे के कोलिया नगला की है। पीड़ित नवाब सिंह ने बताया कि उनकी बकरी गायब हो गई थी, जिसे वो उनकी पत्नी, उसकी मां और उसका भाई भीमराज कई घंटो तक खोज रहे थे लेकिन रात को करीब 9 बजे उन्होंने करीब 100 मीटर की दूरी पर दानिश, विकार, नाजिम के घर पर बकरी को देखा था।
जिसके बाद वो लोग अपनी बकरी लेने गए तो उल्टा आरोपियो ने उन्हें जातिसूचक गालियां देना शुरु कर दिया और फिर चोर बता कर पिटाई कर दी, इतना ही नहीं आरोपियो ने उन्हे चोर साबित करने के लिए पुलिस तक बुला ली, हालांकि पुलिस ने जांच की तो सबकुछ सामने आ गया, जिसके बाद पुलिस ने चारों आरोपियो के खिलाफ मामला दर्ज कर तीन को गिरफ्तार भी कर लिया है, और चौथे आरोपी की तलाश जारी है। हैरानी की बात है जिसका नुकसान हुआ उसे ही प्रताड़ना भी सहनी पड़ी, केवल इसीलिए कि वो दलित समुदाय से है।
यूजीसी के नए नियमों को लेकर जयपुर में प्रदर्शन
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला यूजीसी के नए नियमों को फिर से लागू कराने की मांग की लड़ाई को लेकर है। देशभर में दलित संगठन आंदोलन कर रहे है लेकिन सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है, जिसके बाद अब गुस्सायें लोगो ने राजस्थान के जयपुर में बिल को लेकर सीएम आवास के सामने प्रदर्शन शुरु कर दिया है। इस प्रदर्शन में UGC के समर्थन में भीम आर्मी व आजाद समाज पार्टी के करार्यकर्ता भी शामिल हुए है। हैरानी की बात है कि भीम आर्मी चीफ लगातार इस मामले को उठा रहे है।
भारी संख्या में बहुजन संगठन नियमो को फिर से लागू करने की मांग कर रही है, लेकिन जिस सुप्रीम कोर्ट ने कुछ मिनटो में इस पर स्टे लगा दिया था, वो इतने दिन होने के बाद इस पर दुबारा सुनवाई तक नहीं कर रही है, वहीं सरकार ने भी कोई सफाई पेश करने के बजाये चुप्पी साध ली है, ऐसे में अगर कोई ये आरोप लगा रहा है कि न्यायपालिका भी केवल सवर्णों के इशाके पर चलती है तो क्या इसमें कुछ गलत है, वहीं ये नए नियम भी केवल दलितों को साधने की एकमात्र चाल ही प्रतीत होती है। जवाब आप खुद जानते है।
मैंगलुरु में 14 साल के दलित बच्चे के साथ मारपीट
5, दलितों से जुड़ा अगला मामला कर्नाटक के मैंगलुरु से है, जहां दलितों को दोस्त बनाना और उनके साथ घूमना फिरना भी जातिवादी आतंकियों को गंवारा नही है। ताजा मामला मैंगलुरु शहर के बाबूगुड्डे का है, जहां 14 साल का दलित नाबालिक बच्चा रेलवे किनारे अपनी एक दोस्त से बातें कर रहा था, लेकिन तभी वहां एक पिता पुत्र ने आकर न केवल उसे जातिसूचक गालियां दी बल्कि उसका वीडियो बना कर सोशल मीडिया पर अपलोड करने की भी धमकी दी। नाबालिक बच्चे के पिता ने आरोपी स्टीवन मोनथेरो और उसके बेटे एविल के खिलाफ मोरल पुलिसिंग स्टेशन में शिकायत दर्ज कराते हुए कहा कि 23 फरवरी को उनका बेटा अपने दोस्त के बैठा था।
लेकिन आरोपियो ने आकर न केवल उसे परेशान किया बल्कि बीच सड़क पर ले जा कर उसे जातिसूचक गालियां देते हुए मारपीट शुरु कर दी। वहीं दुबारा इस इलाके में न आने की धमकी दी, जिसके बाद उसका वीडियो whatsapp पर शेयर भी किया गया है। पीड़ित बच्चा इस घटना से काफी आहत है, उन्हें डर है कि कहीं उनका बच्चा कोई गलत कदम न उठा लें। इस घटना के सामने आने के बाद पुलिस ने तुरंत कार्यवाई करते हुए आरोपियो के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरु कर दी है।



