Hapur news: विडंबना देखिए कि मनुष्य योनी में जन्म लेने के बाद भी मनुष्य अपनी ‘मनुष्यता’ ही भूल बैठा है। यदि हम धर्म और जाति की बेड़ियों से ऊपर उठकर थोड़ी सी भी इंसानियत दिखाएं, तो नफरत का व्यापार करने वाले ये ‘ठेकेदार’ अपने मंसूबों में कभी कामयाब न हों। लेकिन शायद, इंसान की पहचान अब उसके कर्मों से नहीं, बल्कि उन विभाजनों से होने लगी है जो समाज को खोखला कर रहे हैं। इसका ताजा और दुर्भाग्यपूर्ण उदाहरण हापुड़ के सिंभावली क्षेत्र के अचपलगढ़ी गांव में देखने को मिला, जहां होलिका दहन के पावन अवसर पर एक युवक पर हमला किया गया। इस हिंसक कृत्य ने न केवल इंसानियत को शर्मसार किया है, बल्कि समाज के सौहार्द पर भी प्रहार किया है। पीड़ित युवक अनुसूचित जाति से है, जिसने अब न्याय की गुहार लगाते हुए आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
आरोपियों के खिलाफ तहरीर
मीडिया द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक बताया जा रही है कि अचपलगढ़ी गांव के निवासी ओमवीर कोरी ने कोतवाली पहुंचकर पुलिस को लिखित शिकायत दी है। अपनी तहरीर में उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि होलिका दहन के दौरान दो युवकों और दो महिलाओं समेत कुछ अन्य लोगों ने उन पर जानलेवा हमला किया। इस घटना के बाद पीड़ित पक्ष ने पुलिस प्रशासन से सुरक्षा और आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है।
पीड़ित ओमवीर कोरी का कहना है कि सोमवार को गांव में होलिका दहन के दौरान अचानक विवाद खड़ा हो गया। आरोप है कि वहां मौजूद दो युवकों ने उनके समाज को लेकर अति-आपत्तिजनक और जातिसूचक टिप्पणियां कीं। जब ओमवीर ने अपनी गरिमा के लिए इसका विरोध किया, तो आरोपियों ने संयम खो दिया और विवाद हिंसक झड़प में बदल गया।
धारदार हथियार से जानलेवा हमला
ओमवीर के मुताबिक, विरोध करने पर दोनों युवकों ने अपने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर उन पर धावा बोल दिया। आरोप है कि हमलावरों ने उनके सिर पर धारदार वस्तु से वार किया, जिससे वह लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़े। पीड़ित का साफ तौर पर कहना है कि यह हमला महज इत्तेफाक नहीं, बल्कि उनकी जान लेने की नियत से किया गया था।
सीसीटीवी में कैद हुई वारदात
पीड़ित ओमवीर कोरी का दावा है कि यह पूरी बर्बरता पास में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है, जो आरोपियों के खिलाफ सबसे बड़ा सबूत है। उन्होंने कोतवाली पुलिस से फुटेज को कब्जे में लेकर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गुहार लगाई है। साथ ही, उन्होंने मांग की है कि इस मामले को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Act) के तहत दर्ज कर उन्हें न्याय दिलाया जाए।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और तहरीर के आधार पर आगे की कार्रवाई की बात कही जा रही है।



