320 BNS in Hindi: हर रोज़, हमें अखबारों में या अपने आस-पास ऐसे लोगों के बारे में कई खबरें मिलती हैं, जिन्होंने उधार लिया हुआ पैसा चुका न पाने पर, अपनी संपत्तियों का मालिकाना हक किसी तीसरे पक्ष को चाहे गुपचुप तरीके से या औपचारिक रूप से हस्तांतरित कर दिया है; वे ऐसा खास तौर पर इसलिए करते हैं ताकि लेनदार उनकी संपत्तियों को ज़ब्त करके, उन्हें बेचकर अपने बकाया कर्ज़ की भरपाई न कर सकें। तो ऐसे मामले में BNS की कौन की धारा लगती है और ऐसे मामले में किस तरह की सज़ा होगी? तो आपको बता दें, ऐसा करने पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 320 लागू होती है। तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस (BNS) में इसके के बारे में क्या कहा गया है।
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धारा 320 क्या कहती है? BNS Section 320 in Hindi
जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस (BNS) की धारा 320 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 320 मुख्य रूप से उस व्यक्ति पर लागू होता है जो कोई भी बेईमानी से या धोखे से किसी संपत्ति को हटाता है, छिपाता है, या किसी व्यक्ति को सौंपता है, या किसी संपत्ति को बिना उचित प्रतिफल के किसी व्यक्ति को हस्तांतरित करता है या करवाता है। इस इरादे से कि उस संपत्ति का वितरण उसके लेनदारों के बीच, या किसी अन्य व्यक्ति के लेनदारों के बीच, कानून के अनुसार होने से रोका जा सके या यह जानते हुए कि ऐसा करने से वह ऐसे वितरण को रोकने की संभावना रखता है
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BNS section 320 Important points
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 320…जो पहले IPC की धारा 421 के समतुल्य थी। जिसे कुछ संशोधनों के साथ BNS में शामिल किया गया है।
BNS section 320 example
मान लीजिए मोहित नाम के किसी व्यक्ति ने कोई लोन लिया है, और उसे चुकाने से बचने के लिए, वह रातों-रात अपनी संपत्ति किसी रिश्तेदार के नाम पर ट्रांसफर कर देता है, ताकि बैंक या लेनदार उसे बेच न सकें। तो यह धारा उस इंसान पर लागू होती है।
बीएनएस धारा 320 की और सजा
इसके अलावा, BNS का सेक्शन 320 फ्रॉड पर भी लागू होता है। यह तब लागू होता है जब कोई व्यक्ति, अपने फायदे के लिए अपनी पहचान छुपाकर किसी दुसरे व्यक्ति के साथ धोखा करता है। तो इस सेक्शन के तहत दोषी पाए जाने पर आरोपी को 6 महीने तक की सज़ा जिसे बढाकर 2 साल तक किया जा सकता है या जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं। आपको बता दें, यह एक गैर-संज्ञेय (non-cognizable) अपराध है, इसलिए पुलिस को जाँच के लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति चाहिए होती है। इस अपराध में जमानत मिलना भी काफी मुश्किल हैं।



