Mysterious Buddhist Monasterie: भारत की धरती वो पवित्र धरती है जिसने दुनिया भर में शांति और मुक्ति का ज्ञान बांटने वाले बुद्ध की धरती कही जाती है..भारत में बौद्ध धर्म की उत्पत्ति हुई और एशिया के कोने कोने में आज के समय में एक महान और महात्वपूर्ण धर्म बन गया.. लेकिन दुख की बात ये है आज भारत में ही बौद्ध धर्म का पतन हो गया..इसका विस्तार खत्म हो गया और आज बौद्ध धर्म की स्थिति भारत में काफी कमजोर है।
लेकिन बावजूद इसके बौद्ध धर्म के अवशेष और उससे जुड़े कई ऐतिहासिक धरोहर आज भी भारत में बौद्ध धर्म के महान इतिहास का प्रतीक बन कर खड़े है। कभी नालंदा, तक्षशिला, विक्रमशिला जैसे महान सैकड़ो बौद्ध विहार हुआ करते थे लेकिन समय के साथ इसका पतन हो गया लेकिन आज भी कई बौद्ध मठ है, जिनका काफी महत्व है। अपने इस वीडियो में हम 5 प्रमुख बौद्ध मठों के बारे में जानेंगे जो काफी रहस्यमई भी है।
भारत के 5 रहस्यमई बौद्ध मठ
तवांग मठ – Tawang Monastery
आपने नालंदा विश्वविद्यालय की 9 मंजिला लाइब्रेरी धर्मगंज के बारे में तो सुना या पढ़ा ही होगा, जिसमें आग लगने के बाद 6 महीनों तक जलती रही थी.. कहा जाता है कि इस लाइब्रेरी में 90 लाख से भी ज्यादा किताबें थी। नालंदा एक बौद्ध मठ भी थी, लेकिन वो खत्म हो चुका है मगर अरूणाचल प्रदेश के तवांग नदी की तवांग चू घाटी में तवांग कस्बे के पास बना हुआ है, जिसे 1680 में मेराक लामा लोद्रे ग्यास्तो ने बनवाया था। तवांग मठ तिबब्त के ल्हासा के पोताला महल के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मठ है। समुद्र तल से करीब 10,000 फुट की ऊँचाई पर बना ये मठ बौद्ध भिक्षुओ के लिए सबसे ऐतिहासिक धरोहरो में से एक है।
तीन मंजिला तवांग मठ
इसके मुख्य द्वार को काकालिंग कहा जाता है। इसका पूरा नाम तवांग गालदान नामग्ये ल्हात्से है.. वहीं तिब्बती भाषा में ‘गाडेन नामग्याल ल्हात्से’ कहा जाता है, जिसका मतलब है “पूर्ण विजय का दिव्य स्वर्ग। तवांग मठ को 5वें दलाई लामा, न्गावांग लोबसांग ग्यात्सो के आदेश पर बनाया गया था। तवांग मठ वज्रयान परंपरा का बड़ा केंद्र है जो कि ‘गेलुग’ संप्रदाय से संबंध रखता है। तवांग मठ एक तीन मंजिला इमारत है, जिसके चारोतरफ 925 फीट की लंबी दीवार बनाई गई है। इस मठ में एक प्रमुख और पड़ा पुस्तकालय है, जिसमें करीब 17 हजार किताबें है, जिनमें मुख्य रूप से ‘कांग्युर’ और ‘तेंग्युर’ जैसे महान बौद्ध किताबे भी शामिल है।
इसकी स्थापना को लेकर किवंदतियां कहीं जाती है.. तवांग मठ पाल्डेन ल्हामो देवी को समर्पित कर बनाया गया है जो कि मठ की रक्षक देवी कहलाती है। तवांग में इस वक्त करीब 600 भिक्षु रहते है। तवांग मठ के मुख्य मंदिर को दुखांग कहा जाता है जहां बुद्ध की 18 फीट सोने की प्रतीमा स्थापित की गई है। हर साल जनवरी-फरवरी में तवांग महोत्सव होता है, जिसमें पारंपरिक नृत्य और संगीत के कार्यक्रम आयोजित होते हैं। तवांग अपने शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है।
किन्नौर मठ – Kinnaur Monastery
उत्तर भारत का हिमाचल प्रदेश एक ऐसा राज्य है जहां बौद्ध धर्म का प्रभाव काफी दिखता है। उन्हीं में से एक है किन्नौर जिले में स्थित किन्नौर मठ। किन्नौर बौद्ध और हिंदू धर्म के धार्मिक संस्कृति के मामले में काफी अहम हैष। किन्नौर मठ एक बौद्ध मठ है जिसे 19वी सदी में बनवाया गया था। किन्नौर के कनम मठ को ईश्वर की धरती के रूप में पूजा जाता है, बौद्धो के लिए किन्नौर को ईश्वर की धरती पर साधना करने का साधन बताया गया, जिससे मोक्ष जल्द प्राप्त किया जा सकता है। यह समुद्र तल से 3,600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, यहां पर भी धार्मिक पुस्तकालय मौजूद है जिसमें 2500 के करीब बौद्ध धर्म से जुड़ी किताबे है। जो तिब्बती और बौद्ध संस्कृति के बारे में बताते है। हर साल सितंबर-अक्टूबर में हेमिस महोत्सव होता है, जिसमें तिबब्त समेत कई देशों से बौद्ध भिक्षु आते है।
युकसोम मठ- Yuksom Monastery
अब करते है युकसोम मठ के बारे में..नॉर्थ ईस्ट के राज्य सिक्किम में स्थित युकसोम मठ बौद्ध धर्म के मजबूत प्रतीक के रूप में स्थापित है। इसकी स्थापना 1701 में ल्हात्खुन नामखा जिग्मे द्वारा की गई थी। यह समुद्र तल से करीब 1,780 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इस पठ में पढ़ने वाले छात्र को फरवरी मार्च महीने में ही प्रवेश की अनुमति है। सिक्किम के खूबसूरत शहरो में से एय युकसोम 1642 से पहले सिक्किम की राजधानी थी, युकसोम का मतलब होता है जहां तीन लामाओ का मिलन हुआ हो… युकसोम के सुरम्य पहाड़ी न्यिंगमा संप्रदाय द्वारा बनाया गया एक दो मंजिला पत्थर से बना हुआ मठ है। इसकी छत पर एक सोने का बड़ा घंटा है जिसे ग्यालत्सेन कहा जाता है। मठ के अंतर तीन लामाओं की भी प्रतिमा है, जिनके कारण युक्सोम मठ की स्थापना हुई थी, जिसे असल में दुहडी मठ भी कहा जाता है।
रोरिक मठ – Roerich Monastery
4, रोरिक मठ- हिमाचल प्रदेश के ही एक खूबसूरत बर्फ की चादर से ढके शहर कुल्लु मनाली में स्थित है रोरिक मठ। इस मठ की स्थापना रूसी चित्रकार निकोलस रोरिक और उनके बेटे जॉर्ज रोरिक ने अपनी भारत यात्रा के दौरान साल 1928 में की थी। ये असल में एक सांस्कृति और शैक्षणिक केंद्र है, जो बौद्ध संस्कृति और परंपरा का अध्ययन कराता है। यहां निकोलस रोरिक की कई बनाई हुई महान और विशेष पेंटिंग और मूर्तियां भी रखी गई है जो सबसे ज्यादा आकर्शण का केंद्र है।
स्पीती मठ – Spiti Monastery
5, अब बात करेंगे हिमाचल प्रदेश के ही स्पीती घाटी में मौजूद की मठ के बारे में..भारत के पुराने बौद्ध मठों में से एक की मठ 11 वी सदी में स्थापित किया गया मठ है। यह समुद्र तल से 4,166 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इस मठ का नाम की गोप्पा है, जिसमें करीब 300 लामा रहते है। ये बौद्ध धर्म का एक प्रमुख बौद्ध मठ है..यहां मौजूद में पुस्कालय में करीब 3500 किताबें है, जो धार्मिक संस्कृति का प्रतीक है। ये वो भारत के ऐतिहासिक मठ है जिन्होंने बौद्ध धर्म को वाकई में भारत में जीवित रखा है..क्या आपने इस मठों में किसी मठ का भ्रमण किया है।



