Karnataka News: इस मंदिर में आखिर क्यों बैन थी दलितों की एंट्री? 2 साल के कड़े संघर्ष के बाद मिली बड़ी जीत

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Karnataka News: हाल ही में कर्नाटक के मांड्या ज़िले से एक ख़बर सामने आई है, जहाँ दलितों ने मंदिर में प्रवेश पाने के अपने संघर्ष में आखिरकार जीत हासिल कर ली है। इतना ही नहीं दलित परिवारों के बीच ख़ुशी का माहौल है।

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दलित परिवार ने 2 सालो तक कानूनी लड़ाई

हालाँकि अक्सर यह कहा जाता है कि आज समाज में सभी के साथ समान व्यवहार किया जाता है, फिर भी कुछ ऐसे गाँव हैं जहाँ दलितों को भेदभाव का सामना करना पड़ता है और उन्हें मंदिरों में प्रवेश से वंचित रखा जाता है। जी हाँ, ऐसा ही एक मामला कर्नाटक (Karnataka) के मंड्या जिले (Mandya District) से है, जहां एक दलित परिवार ने 2 सालो तक कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद आखिरकार मंदिर में प्रवेश करने की लड़ाई जीत ही ली। दरअसल, मंड्या जिले के मडदूर ताल्लुक (Maddur Taluk) के हुलिकेरे गांव  (Hulikere village) का है। जहां दो साल पहले गांव के  बसवेश्वर मंदिर में अपने बेटे का मुंडन कराने आए सतीश और उनकी पत्नी श्वेता को दलित होने के कारण पुजारी ने मंदिर में प्रवेश ही नहीं करने दिया था।

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गांव से कोई मदद नहीं मिली

लेकिन इस घटना से आहत होने के बजाये सतीश ने कानूनी लड़ाई लड़ी.. सतीश को उसके ही गांव से कोई मदद नहीं मिली तो उसने  समाज कल्याण विभाग, मानव अधिकार आयोग, नागरिक अधिकार विभाग और पुलिस का सहारा लिया जिसका नतीजा ये हुआ कि दो सालों के बाद उसे न्याय मिला और पुलिस और तहसीलदार की उपस्थिति में सतीश ने मंदिर में प्रवेश किया और मुंडन संस्कार भी पूरा किया। सतीश का ये कदम बताता है कि दलितो को आज भी देश की कानून व्यवस्था पर भरोसा है.. कि उन्हें भी आज नहीं तो कल न्याय जरूर मिलेगा। वैसे क्या आपको कानून पर भरोसा है।

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