Top 5 Dalit news: दलितों की स्थिति पर जब भी चर्चा की जाती है तो उन्हें 1950 में मिले आरक्षण की ढाल पर प्रताड़ित किया जाता है। जैसे उन्हें आरक्षण न मिला हो, कोई जिन्न का चिराग मिला हो..लेकिन सच्चाई तो ये है कि भले ही दलितों और पिछड़ो को मजबूत करने के लिए कितनी भी कोशिशे कर ली जायें, लेकिन जब तक जातिवादी मानसिकता रहेगी.. दलितों के लिए कोई उपाय काम नहीं करने वाला। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितो के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में बतायेंगे जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है।
गैस की किल्लत पर आजाद ने सरकार को घेरा
1, दलितो से जुड़ा पहला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद को लेकर है, जिन्होंने देश में फैले डर के माहौल और नेताओं की उदासिनता पर तीखा प्रहार किया है। दुनिया में हो रहे युद्ध के कारण चल रही गैस की क्राइसेस से इस वक्त पूरा देश परेशान है तो वहीं कई नेता कह रहे है कि गैस की किल्लत नहीं है, जिसका जवाब खुद आजाद ने विधानसभा में दिया है। आजाद ने भाजपा सांसद जगदम्बिका पाल को जवाब देते हुए कहा कि- “यह बात सच है कि नेताओं के यहां गैस की किल्लत नहीं है।
लेकिन आम जनता के यहां गैस की किल्लत है,जब हम जाकर देखेंगे ग्रामीण क्षेत्रों में तब हमें इस बात का एहसास होगा” सरकार दावा करती है अर्थव्यवस्था मजबूत है, अगर ऐसा है तो युवा बेरोजगार क्यों है, किसान कर्ज में क्यों है। ऐसे कई सवाल है जिनके जवाब बीजेपी सरकार को देने चाहिए..लेकिन सरकार में बैठे लोगो को कोई समस्या ही दिखाई नहीं देती है। हैरानी की बात है कि सरकार की गाइडलाइंस के बाद भी लोगों के पास गैस की किल्लत है। उनकी आपूर्ति नहीं हो रही है लेकिन सरकारी नेताओं को कोई किल्लत ही नहीं दिखती..तो भला ये आम जनता की समस्या क्या ही देंखेंगे।
जयपुर में 250 लोगों ने बौद्ध धर्म अपनाया
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला राजस्थान के जयपुर से है, जहां जातिवादी आतंकियों के आतंक और उनकी मारपीट से तंग आकर 12 दलित युवकों बौद्ध धर्म अपना लिया है। ये घटना जयपुर के बारां छवड़ा जिले के भूलोन गांव की है। दरअसल इस मुद्दे पर पीड़ितो ने बताया कि अक्टूबर महीने में वो लोग माता की आरती करने के कारण गांव के सरपंच और कुछ लोगो ने मिलकर उन्हें बुरी तरह से पीटा था, जब पुलिस से शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की तो पुलिस का रवैया भी काफी लचर रहा..जिसके बाद बारां जिला बैरवा महासभा युवामोर्चा से अपील की गई।
काफी कोशिशों के बाद भी जब आरोपियों के खिलाफ कोई कार्यवाई नहीं हुई तो पीड़ितों के परिवार के 12 सदस्यों ने बौद्ध धर्म अपनाते हुए सभी देवी देवताओ की मूर्ति को नदी में बहा दिया। धर्म परिवर्तन का मामला सामने आने के बाद पुलिस नींद से जागी और उन लोगो ने आरोपी लालचंद लोढ़ा को गिरफ्तार कर जांच शुरु कर दी है… वहीं जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न से तंग आकर अब तक इस गांव में 250 दलितो के बौद्ध धर्म अपनाने की खबर ने सनसनी फैला दी है। अब देखना ये होगा कि इस मुद्दे पर सरकार का क्या रिएक्शन आता है।
अमेठी में दलित युवक को बुरी तरह से पीटा
3, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के अमेठी से है, जहां एक दलित की बकरी ठाकुरों के खेत में चली गई थी तो उन लोगो ने न केवल दलित युवक को बुरी तरह के पीटा बल्कि रात के अंधेरे में उसका गला भी दबा दिया। ये घटना अमेठी के थाना जामों क्षेत्र के बंधवा मजरे रेसी गांव की है। पीड़ित परिवार ने बताया कि दलित युवक चन्द्रशेखर सरोज मवेशियों को चराने गए गुए थे, और गलती से उनकी मवेशी ठाकुरो के खेतों में चली गई थी.. जिससे नाराज ठाकुरो ने सरोज को बुरी तरह से पीटा और उसकी गला दबा कर हत्या करने की कोशिश की।
वहीं जब वो लोग सफल नहीं हो पाये तो रात को करीब डेढ़ बजे दबंगो ने पीड़ितों का घर जला दिया, पूरे परिवार ने किसी तरह से अपनी जान बचाई..वहीं इस घटना को लेकर भीम आर्मी चीफ ने अपना रोष जताते हुए कहा कि इस मामले में आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्यवाई होनी चाहिए, साथ ही परिवार को सुरक्षा दी जाये औऱ मुआवजा मिलना चाहिए। अब देखना ये होगा कि किसी का घर जलाने के बदले सरकार क्या एक्शन लेती है, या दलित होने के कारण इस मामले को भी यू हीं जाने दिया जायेगा।
झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा प्रमुख निशाने पर
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला झारखंड के धनबाद से है, जहां पूरी तरह से संपन्न सूड़ी समाज को अनूसूचित जाति में शामिल करने की मांग डुमरी के विधायक जयराम महतो पर काफी भारी पड़ रही है। झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा प्रमुख जयराम महतो ने कहा था कि पश्चिम बंगाल में सूड़ी समाज को अनुसूचित जाति में शामिल किया गया है तो झारखंड में क्यों नहीं। लेकिन महतो की इस मांग पर दलित समाज काफी नाराज हो गया है, और धनबाद के रणधीर वर्मा चौक पर भारी विरोध प्रदर्शन किया गया। उनका पुतला फूंका गया।
दलित समाज का कहना है कि सूड़ी समाज पूरी तरह से संपन्न है, उन्हें कभी उत्पीड़न नहीं झेलना पड़ा, अगर वो एससी समुदाय में शामिल होंगे तो उससे सही मायने में जो वंचित है पिछड़े है उनके अधिकारों को छीना जायेगा जो पूरी तरह से असंवैधानिक और अन्याय होगा। दलित समाज ने विधायक से इस तरह के बयानबाजी करने पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है,,नहीं तो ये प्रदर्शन ऐसे ही जारी रहेगा। हैरानी की बात है कि तमाम कोशिशों के बाद भी गरीब वंचितो के अधिकारों को हड़पने वालों की भी कोई कमी नहीं है।
विजयवाड़ा में सामाजिक सौहार्द का नया रूप
5, दलितों से जुड़ा अगला मामला आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा से है, जहां जातिगत सौहार्द के प्रतीक के रूप में मंदिर में एक दलित पुजारी की न केवल सेवा स्वीकार की गई बल्कि रामनवमी के पूजा की तैयारियों में जमकर हिस्सेदारी भी दी गई। ये खबर विजयवाड़ा के पश्चिम NTR ज़िले की है.. यहां मैलावराम और तिरुवुरु विधानसभा क्षेत्रों के कई गांवो में बने मंदिरों में दलित पुजारियों के होने की बात सामने आई है।
गांवों में दलित पुजारियों का सम्मान और उनकी सेवा को स्वीकार करना सामाजिक सद्भाव और समानता को दर्शाता है… ये बताता है कि कैसे दलितों के प्रति लोगो की सोच इन गांवो में बदल रही है, यहां आने वाले भक्त और बाहरी लोग भी गांव वालों की इस भावना को सलाम करते है, उनकी तारीफ करते है। ये बेहद ही राहत देने वाली बात है कि जहां आज भी दलितों को मंदिरों में प्रवेश नहीं दिया जाता है वहीं आंध्रप्रदेश के इन मंदिरों में सालों से दलित पुजारी सेवा दे रहे है।



