MP News: खरगोन में दलित जोड़े को मंदिर जाने से रोका, विरोध करने पर परिवार का दाना-पानी बंद!

Khargone news, Caste discrimination with Dalit Couple
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Khargone news: मध्य प्रदेश के खरगोन ज़िले से इंसानियत को शर्मशार करने वाली एक खबर सामने आई है। जहाँ एक दलित दंपति को मंदिर में प्रवेश क्या कर लिया की ये मनुवादी मानसिकता रखने वालो को पसंद नहीं आया और उन्होंने दलित couple को प्रवेश करने से रोक दिया गया और उसके बाद उनके परिवार का सामाजिक बहिष्कार किया गया। इसके बाद से कानूनी और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा चुका है।

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खरगोन में दलित परिवार का हुक्का पानी बंद

जैसे-जैसे समय बीत रहा है, अनगिनत बदलाव हो रहे हैं और अनेक नए नियम लागू किए जा रहे हैं; फिर भी, आज भी दलित समानता हासिल करने में असमर्थ हैं। उन्हें लगातार भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है और वे सामाजिक बहिष्कार झेलने को विवश हैं। जी हाँ, हालिया मामला मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) से खरगोन (Khargone) से है, जहां पहले तो दलित युवक को मंदिर में प्रवेश करने से रोका गया और जब पुलिस ने उसकी मदद की तो गांव वालों ने उसके पूरे परिवार का हुक्का पानी ही बंद कर दिया।

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पुलिस से मांगी मदद तो भरना पड़ा हरजाना

दरअसल, ये घटना खरगोन जिले (Khargone district) के गोगावां थाना क्षेत्र (Gogawan Police Station Area) के पाडल्या गवली गांव (Padalya Gawali Village) की है। पीड़ित निर्मल कनाडे ने खुद एक वीडियो जारी करके सोशल मीडिया पर अपनी आपबीती सुनाई।  पीड़ित ने बताया कि वो एक छोटा सा किसान है और खेतीबाड़ी के अलावा ढोलक बजाने का काम करता है। अभी हाल ही में उसकी शादी हुई है और जब वो अपनी पत्नी के साथ गांव के हनुमान मंदिर में दर्शन करने गया था तो दलित होने के कारण उसे मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया गया.. जिसके बाद उसने पुलिस से मदद मांगी, पुलिस वालो ने वहां आकर अपनी निगरानी में दंपत्ति को दर्शन तो करा दिये लेकिन इसका नतीजा ये हुआ कि पंचायत ने हमारे परिवार और हमसे जुड़े दो अन्य परिवारों का सामाजिक बहिष्कार करने का फैसला कर दिया।

मंदिर में प्रवेश करने पर बहिष्कार

वहीं पुलिस ने भी अपनी सफाई पेश कर दी है कि पंचायत को शिकायत मिली थी कि दलित समाज के कुछ लोगो ने बीते शुक्रवार को गाली गलौच की थी, इसलिए उनको काम न देने का फैसला किया है..वहीं वीडियो के वायरल होने के बाद पुलिस ने जांच शुरु की तो गांव वालो के सुर फिर बदल गए औऱ बहिष्कार खत्म कर दिया गया। लेकिन सवाल ये उठता है कि केवल मंदिर में प्रवेश करने पर बहिष्कार किया जाना कहां तक और कब तक उचित होगा, और हर मुद्दे पर आखिर कब तक प्रशासन को आगे आना पड़ेगा। इसके अलवा आपको बता दें, यह घटना सामाजिक भेदभाव की कड़वी सच्चाई को उजागर करती है।

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