NCRB की रिपोर्ट ने खोली पोल, दलितों के खिलाफ अपराध दर्ज तो हो रहे, पर सजा दिलाने में सरकारी तंत्र फेल।

NCRB Reports, Crime against with Dalit
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NCRB Report: हाल ही में, NCRB की ओर से एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें उत्तर प्रदेश में दलितों के खिलाफ होने वाले अत्याचारों का ज़िक्र किया गया है; इस रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे अत्याचारों में 50 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है। जो अब झूठी साबित होती नज़र आ रही है।

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अनुसूचित जनजाति के खिलाफ हिंसा

बीते कुछ दिन पहले ही राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने 2024 में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) समुदायों के खिलाफ हिंसा पर अपनी रिपोर्ट जारी की। हालाँकि, कुल आँकड़े 2023 की तुलना में SC और ST दोनों समुदायों के खिलाफ क्राइम रेट में गिरावट पाई है, फिर भी कई राज्यों में हाशिए पर पड़े समूहों के खिलाफ अपराध दर चिंताजनक रूप से उच्च बनी हुई है। जी हां, एनसीआरबी (NCRB) ने अपनी रिपॉर्ट में खुलासा किया भले ही एससी एसटी एक्ट के मामले दर्ज तो होते है लेकिन अपराध सिद्धी की दर बेहद चिंताजनक है।

भले ही एससी एसटी एक्ट (SC/ST Act) का नाम लेकर दलितों पर झूठे इल्जाम लगाये जायें, उन्हें इसका गलत इस्तेमल करने वाला कहा जायों, लेकिन अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के खिलाफ हिंसा के बाद दोषसिद्धी की जो दर , राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (NCRB) ने दी है, उसने सारे दावो की सच्चाई सामने ला दी है, जी हां, एनसीआरबी (NCRB) ने अपनी रिपॉर्ट में खुलासा किया भले ही एससी एसटी एक्ट के मामले दर्ज तो होते है लेकिन अपराध सिद्धी की दर बेहद चिंताजनक है।

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चार्जशीट दायर तो होगा लेकिन दोषसिद्धि नहीं

एनसीआरबी (NCRB) ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि भले ही बीते 3 सालों में दलितो के साथ अत्याचार के मामलो में कुछ कमी आई है लेकिन उससे ज्यादा हैरान करने वाली बात ये है कि एससी एसटी अपराधों (Crimes against SCs and STs) में आरोपियों की दोषसिद्धी में और ज्यादा कमी आई है, यानि की दलितों के साथ अपराध हुई.. ये साबित ही नहीं हो पाता, या फिर वो एससी एसटी एक्ट से दायरे में ही नहीं आता है.. रिपोर्ट बताती है कि ऐसे कई मामले में है जिसमें चार्जशीट दायर तो की जाती है लेकिन दोषसिद्धि नहीं हो पाती है। मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार आकड़े बताते है कि, अनुसूचित जाति के खिलाफ अपराधों की सबसे अधिक संख्या उत्तर प्रदेश में 14,642 पाई गई, जो 2024 में किसी भी राज्य में देखी गई सबसे अधिक संख्या है।

मध्य प्रदेश 7,765 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर, बिहार 7,549 मामलों के साथ तीसरे स्थान पर और राजस्थान 7,008 मामलों के साथ चौथे स्थान पर रहा। लेकिन मध्य प्रदेश, बिहार और राजस्थान दोषसिद्धी कर सजा की दर 50 प्रतिशत से भी कम है। वहीं यूपी में दोषसिद्धि दर 73.3 प्रतिशत दर्ज की गई। यानि की या तो मामला अभी भी कोर्ट में लंबित पड़ा है या किन्ही कारणों से दोष सिद्ध नहीं हुआ.. मगर इसका मतलब ये तो नहीं है कि अपराध नहीं हुआ.. या जब दोष सिद्ध ही नहीं होता तो अपराध दर में तो कमी आ ही जायेगी.. एनसीआरबी की रिपोर्ट ने सरकार के दावे की मिट्टी पलीत कर दी है, अब देखना ये होगा कि इस मुद्दे को कैसे चुनावों में भुनाया जाता है, और कैसे दलितो के मसीहा बनती है राज्य सरकार।

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