Top 5 Dalit news: ऐसा क्यों है कि केवल दलितों को ही जाति के नाम पर भेदभाव झेलना पड़ता है, उन्हें मलमूत्र तक पिला दिया जाता है, पिछड़ी जाति केवल एक जाति नहीं बल्कि ये लाइसेंस बन जाता है उंची जाति वालो के लिए..उन पर अत्याचार करने का। आखिर कब तक उन्हें उनकी काबिलियत से नहीं बल्कि जाति से पहचाना जायेगा। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में जानेंगे, जो सच्चाई है उस समाज की, जो दलितों को आज भी केवल सेवा मात्र की वस्तु समझते है। चाहे उनके साथ कैसा भी व्यवहार हो, बस वो सहते जाये..
बिहार के वैशाली में दलित को अगवा कर बर्बरता
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला बिहार के वैशाली से है… जहां केवल बाइक धीरे चलाने के लिए बोलना एक दलित युवक को काफी भारी पड़ गया… जातिवादियों को ये बात खल गई कि एक छोटी जाति से होकर उन्हें बाइक धीरे चलाने की सीख दे रहा है.. बस फिर क्या था, दबंगो ने उसे लाइब्रेरी से घर आते वक्त अगवा कर लिया.. उसके साथ मारपीट की और थूक तक चटवाया। ये घटना वैशाली थाना क्षेत्र के भगवानपुर रत्ती गांव की है, पीड़ित ने बताया कि ये क्रूरता उसके साथ 25 मई को घटित हुई थी। दरअसल कुछ दबंग उसके घर के बाहर बहुत तेज बाइक चला रहे थे, लेकिन जब उसने उन्हें बाइक धीरे चलाने को कहा तो वो लोग वहां से चले गए, मगर जब वो उसी शाम को लाइब्रेरी से लौट रहा था तो 8-10 लोगो ने उसे रास्ते से अगवा कर लिया।
उसके साथ मारपीट की, उससे जबरन थूक चटवाया.. इस पूरी घटना का वीडियो बनाया और जान से मारने की धमकी भी दी। पीड़ित किसी तरह से घर पहुंचा और अगले दिन से वो 5 दिनों तक को केवल मामले को दर्ज कराने के लिए भटकता रहा था, लेकिन दबंगो के प्रभाव के कारण पुलिस उसकी शिकायत तक दर्ज नही कर रही थी, जिसके बाद उसने पुलिस अधीत्रक विक्रम सिहाग से अर्जी लगाई, उनके आदेश पर 31 मई को 5 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया लेकिन जहां पुलिस ने हाई कमान के ऑर्डर के बिना मामला दर्ज तक नहीं किया था तो क्या वहां आरोपियों की गिरफ्तारी हो सकेंगी.. वैसे पुलिस ने जांच तो शुरु कर ही दी है.. कार्यवाई होती है या नहीं..वो तो कुछ समय में उजागर हो ही जायेगा।
मामला मध्य प्रदेश के विदिशा दलित को मंदिर में प्रवेश से रोका
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला मध्य प्रदेश के विदिशा से है, जहां मनुवादियों ने फिर से कानून को अपने हाथो की कठपुतली बना कर दलितों को मंदिर में प्रवेश करने से रोका.. यहां तक कि जब भंडारा हुआ तो भी पीड़ित को सबसे अलग बिठाया गया। ये मामला विदिशा जिले के चिड़ोरिया गांव का है, पीड़ित वीर सिंह अहिरवार ने पुलिस की लापरवाही और लचर रवैये को देखते हुए तहसीलदार को आवेदन दिया है, उसने बताया कि गांव में हनुमान मंदिर में भागवत कथा और भंडारा किया जा रहा था। पीड़ित भी वहां शामिल होने गया था, लेकिन जब वो भंडारे में पहुंचा तो उसकी जाति के कारण सबसे अलग बिठाया गया।
इतना ही नहीं जब वो मंदिर में दर्शन के लिए जाने लगा तो पंडित समेत कुछ लोगो ने उसे रोक दिया और उसे जातिसूचक शब्द कहते हुए मंदिर में न आने लायक कहा.. पीड़ित ने जब इसका विरोध किया तो उसके साथ अभद्रता की गई.. इस भेदभाव के खिलाफ जब पीड़ित ने पुलिस से मदद की गुहार लगाई तो उन लोगों ने भी उसे भगा दिया.. जिसके बाद उसे थक हार कर तहसीलदार से मदद लेनी पड़ी। इस मुद्दे पर तहसीलदार ने आश्वासन दिया है कि वो इसकी निष्पक्ष जांच करेंगे, और जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ सख्त कार्यवाई होगी। हैरानी की बात है कि कानून तोड़ा जाता है, लेकिन कानून के रक्षक ही नींद से जागने को तैयार नहीं है।
वाराणसी में दलित नाबालिग का 20 दिनों तक बंधक बना दुष्कर्म
3, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के वाराणसी से है, जहां फिर से एक दलित नाबालिक बच्ची के साथ 20 दिनों तक बंधक बना कर सामूहिक दुष्कर्म किया गया लेकिन पुलिस की उदासीनता ने पूरे परिवार को तोड़ दिया है.. ये मामला वाराणसी के चौबेपुर थाना क्षेत्र के एक गांव की है, जहां 11 मई को स्कूल के लिए निकली 14 साल की दलित बच्ची का अपहरण किया गया था, बच्ची की मां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की तो पुलिस ने टालमटोल करके उसे भगा दिया,.. बच्ची की मां पूरी रात बच्ची को खोजती रही लेकिन बच्ची का कुछ पता नही चला.. जिसके बाद उसने फिर से पुलिस ने गुहार लगाई।
पुलिस की नाकामी पर सवाल
मामले बिगड़ता देख कर पुलिस ने खोजबीन शुरु तो की लेकिन 20 दिन बीत गए मगर बच्ची लापता ही रही.. परिवार को जिन पर शक था उनके नाम भी लिये थे, मगर पुलिस ने कोई पूछताछ नहीं की, लेकिन परिवार बच्ची की तलाश अब भी कर रहा था, तभी खबर मिली की बच्ची को गांव के बाहर पुराने मकान में लाया गया है, पीड़ित परिवार ने तुरंत पुलिस को जानकारी दी, और जब पुलिस और परिवार वाले वहां पहुंचे तो सच में बच्ची उन्ही लोगो के पास थी जिनके नाम परिवार वालो ने पहले ही लिये थे, बच्ची को बरामद कर लिया गया और साथ ही 2 आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया गया.. लेकिन पुलिस की नाकामी यहीं खत्म नहीं हुई.. अब वो अपना नाकामी छिपाने के लिए परिवार पर ही दवाब बना रहे है।
कि केस वापिस ले लें.. बच्ची का वीडियो बना कर उसे ही धमकी दे रहे है..वीडियो में जबरन बच्ची से कहलवाया कि उसकी मां की मानसिक हालात ठीक नहीं हैं, वो सबसे झगड़ा करती रहती हैं, और बच्ची का भी कोई अपहरण नहीं हुआ था। तो जरा सोचियें, ऐसे में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठेंगे या नहीं.. आखिर पुलिस काम किसके लिए कर रही है। अगर वक्त रहते परिवार वालों के शक के आधार पर जांच की जाती तो बच्ची कब का बरामद हो जाती.. लेकिन दलित होने के कारण जानबूझ कर पुलिस लापरवाही करती रही। अब देखना ये होगा कि मीडिया में आने के बाद बच्ची को न्याय मिलता है या नहीं।
भीम आर्मी चीफ की 4 जून से सत्ता परिवर्तन यात्रा
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद को लेकर है, जिनकी 4 जून से होने वाले सच्चा परिवर्तन यात्रा में भारी जनसैलाब बिजनौर की सड़को पर सरकार की नीतियों के खिलाफ उतरने की तैयारी में है। पिछले कुछ महीनों से आजाद की बढ़ती लोकप्रियता के कारण कई विपक्षी पहले ही आसपा का दामन थाम चुके है, ऐसे में ये सत्ता परिवर्तन यात्रा आगामी यूपी विधानसभा चुनावो में मौजूदा सरकार का पूरा समीकरण बदलने के लिए काफी है।
यात्रा के शुरु होने से पहले ही भारी संख्यों में कार्यकर्ता जमीन पर उतरकर जमकर प्रचार-प्रसार कर रहे हैं… सड़को पर नीले रंग का झंडा नजर आ रहा है, जिससे पूरा माहौल बाबा साहब के रंग में रंगा हुआ लग रहा है। वहीं आजाद की रैलियों में जमा होने वाली भीड़ ने कहीं न कहीं को विपक्षियों को जरूर डरा दिया है.. ऐसे में अब सवाल ये उठता है कि क्या सत्ता परिवर्तन यात्रा वाकई में सत्ता में बड़ा परिवर्तन ले कर आयेगी। वैसे हम आपसे पूछते है कि क्या आजाद अगले सीएम हो सकते है।
कर्नाटक में राजनीतिक उथलपुथल
5, दलितों से जुड़ा अगला मामला कर्नाटक से है, जहां ऐसा लगता है कि दलित समाज औऱ दलित नेता इस बार दलित सीएम से कम में मानने वाले नहीं है। लगातार राजनीतिक उथलपुथल के बीच दलित समुदायों के अलावा लिंगायत समुदाय ने भी सीएम के अलावा दलित डिप्टी सीएम की मांग की है। एक तरफ डीके शिवकुमार को सीएम बनाये जाने की मांग तेज हो चुकी है तो वहीं अब बैंगलौर में विधायक दल की बैठक में पहुंचे कांग्रेस प्रभारी रणदीप सुरजेवाला के सामने दलित समुदाय के नेताओं ने पूर्व मंत्री केएच मुनियप्पा को डिप्टी सीएम बनाने की मांग की है।
मुनियप्पा भी दलित जाति से आते है। इस मुद्दे को लेकर बैंगलुरू हवाई अड्डे के बाहर ही मडिगा समुदाय के लोगो ने प्रदर्शन करना शुरु कर दिया था, वहीं लिंगायत समुदाय ने वरिष्ठ नेता ईश्वर खंड्रे को डिप्टी सीएम बनाये जाने की मांग की है। सत्तारूढ़ कांग्रेस का हाल अभी सांप छुछुंदर वाला हो चुका है.. जहां भी जाये, केवल नुकसान ही है.. और कर्नाटक के दलित समुदाय अब दलित सीएम ही नहीं दलित डिप्टी सीएम भी बना कर मानेंगे..वर्ना तो कांग्रेस का कर्नाटक में रहना मुश्किल हो जायेगा.. ऐसे में देखना ये होगा कि दलित विरोधी छवि को सुधारने के लिए कांग्रेस का इस पर क्या फैसला होगा.. ये देखना वाकई में दिलचस्प होने वाला है।



