भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब से भारत के पीएम पद को संभाला है, उनके कई फैसले ऐतिहासिक रूप से बड़े बदलाव लेकर आए है। उन्होंने सदैव सबका साथ मांगा और सबका विकास करने का वादा किया। जिसमें हर जाति हर धर्म के लोगों को शामिल किया जाता है। लेकिन सबसे ज्यादा उन्होंने उन्हें सम्मानित किया उस शख्सियत को जिन्होंने भारत में दलितों और पिछड़ों के लिए बराबरी और सम्मान की लड़ाई लड़ी थी, जिन्होंने संविधान लिखा था।
समाज में महिलाओं और पुरुषों को एक समानता देने की कोशिश की थी, लेकिन समय के साथ भुला दिए जा रहे थे मगर पीएम मोदी ने उन्हें फिर से चर्चा का विषय बना दिया। जी हां हम बात कर रहे हैं दलितों के मसीहा बाबा साहब डॉ भीम राव आंबेडकर के बारे में। 14 अप्रैल को उनके जन्मदिन को एक त्यौहार की तरह मनाने की प्रेरणा पीएम मोदी के कारण ही मिली। अपने इस लेख में हम जानेंगे कि बाबा साहब के जन्मदिन के अवसर पर पीएम मोदी के 5 ऐसे फैसले, जिसके कारण बाबा साहब को प्रसिद्धि और बढ़ गई।
1. अंबेडकर स्टार्टअप नेशनल फंड
पूंजी और व्यापार का स्वामी बनाने के लिए दलित युवाओ को 50 लाख तक का लॉन देने की योजना बनाई जा रही है, जिसके लिए 1 लाख करोड़ रूपय की योजना दलित युवाओं को शसक्त बनाने के लिए शुरु किया जायेगा। पीएम मोदी ने ऐलान किया है कि अब समय आ गया है कि दलित युवा केवल श्रम तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि वो अपना व्यापार करें, पूंजीपति बने। इस योजना के जरिए वो दलित युवा जो फंड के अभाव में व्यापार करने की काबिलियत होते हुए भी नहीं कर पाते है, उनके अंदर छिपी प्रतीभा को वैश्विक मंच तक लाया जायेगा, ताकि दलित समाज के टैलेंटेड और मेधावी युवाओं को आगे बढ़ने का मौका मिले। इस योजना के लागू होने के बाद दलित युवा जो अपने स्टार्टअप प्लान लेकर बैंक के पास जाते है तो उन्हें 50 लाख तक की रकम बिना किसी गारंटी के दी जायेगी, जबकि पहले बिना गारंटी के कोई लॉन नहीं दिया जाता था।
सौ इंक्यूबेशन सेंटर खोले जायेंगे
ये भारत सरकार की जिम्मेदारी होगी। इसी के साथ कई सौ इंक्यूबेशन सेंटर खोले जायेंगे, जहां प्रतीभाशील दलित युवाओं को ट्रेनिंग दी जायेगी आधुनिक टेक्नोलॉजी की और बाजार की स्थिति को समझने की। इस योजना से आने वाले 5 सालों में 10000 दलित उधमियों को खड़ा किया जाने का लक्ष्य है ताकि वो दलितों औऱ पिछड़ो के लिए ज्यादा से ज्यादा रोजगार उत्पन्न कर सकें।
ये योजना भारत के हर जिले में पहुंचे उसके लिए हर जिले में अंबेडकर व्यापार केंद्र स्थापित करने की प्लानिंग की जा रही है, और सभी बैंको को आदेश दिये जायेंगे कि जिनका आवेदन पहले आया है, उनकी प्राथमिकता के आधार पर ही उनकी हर संभव आर्थिक मदद की जायें.. जिस पर सीधा केंद्र सरकार नजर रखेगी.. वहीं इन नए स्टार्टअप के वस्तुओं को सीधा सरकार ही खरीदेगी.. इससे समाजिक असमानता को दूर करने के लिए दलितों को आर्थिक रूप से मजबूत करेगी।
2. विद्यांजलि अंतरर्राष्ट्रीय छात्रवृत्ति योजना
ये योजना हर उस मेधावी छात्र को विदेश में पढ़ने का मौका देगी, जो पैसों के अभाव में अच्छे शैक्षणिक संस्थानों में दाखिला नहीं पाते है। सरकार ने दावा किया है कि अगर भारत के दलित छात्र जो दुनिया के किसी 100 टॉप विश्वविद्यालय के प्रवेश परिक्षा को पास कर लेते है तो विद्यांजलि अंतरर्राष्ट्रीय छात्रवृत्ति योजना के तहत उस छात्र या छात्रा के पढाई के खर्चे से लेकर उस देश में रहने, खाने पीने और उसकी बाकी के शोध कार्यों के लिए सरकार ही खर्च वहन करेगी। इसका कोई सीमित बजट तय नहीं किया गया। साथ ही सरकार देश में भी बाबा साहब भीम राव अंबेडकर के नाम से एक यूनिवर्सिटी शुरू करने की योजना बना रही है जिसमें दुनिया के बड़े शैक्षणिक संस्थानों को टक्कर दे सकें। यहां 70 प्रतिशत सीट एससी एसटी कैटेगरी के बच्चों को दी जायेगी।
दलितो के व्यक्तिगत विकास के लिए जरूरी है कि वो खुद को बड़े और उंचे स्तर पर प्रेजेंट करें, ताकि दलितों का सम्मान बढ़े और उनका आत्मविश्वास रिस्क लेने से न डरे। छात्रवृत्ति के आवेदन के लिए डीजिटल पोर्टल बनाने की तैयारी की जा रही है, जो बिचौलियों को दूर रखेगा। इस योजना के तहत लक्ष्य रखा गया है कि कम से कम 1 लाख युवा उच्च शिक्षा प्राप्त करें और आने वाले 10 सालों मे देश के विकास में अभूतपूर्व योगदान दें। दलितों को भविष्य में पूर्ण आत्मनिर्भर बनाने के लिए पीएम मोदी का ये कदम क्रांतिकारी है।
3. पंचतीर्थ स्रकिट का कायाकल्पलेख
बाबा साहब के जन्म से लेकर मृत्यु तक के पांच मुख्य स्थानों के कायाकल्प के लिए योजना की शुरुआत की है, जिसमें बाबा साहब की जन्मभूमि जो कि मध्य प्रदेश के महू में स्थित है लंदन की उनकी शिक्षा भूमि, नागपुर में बौद्ध अपनाने वाली दीक्षा भूमि, दिल्ली में उनकी महापरिनिर्वाण भूमि और मुंबई में जहां अंतिम संस्कार हुई, वो चैत्य भूमि शामिल है। इन पांचों स्थानो को प्राथमिकता देकर जीर्णोंधार करने का एक मात्र लक्ष्य है।
कि बाबा साहब की धरोहरो को सहेजा जाये ताकि दुनिया को बाबा साहब के संघर्षों का पता चले और बाबा साहब के बारे में सही जानकारी मिले इसके पांच तीर्थस्थलों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर के संग्रहालय और डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित करने की प्लानिंग की गई। वहीं यूनेस्कों से साथ इन पांचो स्थानों को विश्व धरोहर सूचि में भी शामिल कराया जायेगा। इसी के साथ गरीब परिवार को आर्थिक मदद दी जायेगी ताकि वो इन स्थानो का भ्रमण कर सकें। जो भविष्य में दलितो के योगदान का प्रतीक होने वाला है।
पीएम मोदी ने अनुसूचित जाति के उध्मियों
4, पीएम मोदी ने अनुसूचित जाति के उध्मियों के लिए सरकारी अधिग्रहण और निजी क्षेत्र की आपूर्ति श्रृंखला में 25 प्रतिशत का य़ोगदान अनिवार्य कर दिया है। यानि कि अब से सभी सरकारी योजनाओं में लगने वाले वस्तुओं में से 25 प्रतिशत दलित उद्धमियों से खरीदना अनिवार्य होगा। इससे दलित समाज के बिजनसमैन जो भेदभाव और आर्थिक कमजोरी के कारण बड़े टेंडर हासिल नहीं कर पाते है उन्हें भी अब ये योगदान करने का मौका मिलेगा।
इसके तहत एक डिजिटल पोर्टल के तहत बड़े उद्धमियों को दलित उद्धमियों से जोड़ा जायेगा, जो सीधा व्यापार कर सकेंगे..इस योजना के तहत 50 हजार लघु उद्योग खुले जिसका संचालन दलित उद्धमी ही करें.. जिससे दलित समाज को नौकरी और नए अवसर मिलेंगें। .ये कार्य सुचारू रूप से चले इसके लिए विशेष सेल का निर्माण होगा, जो इस पर नजर रखेंगे कि 25 प्रतिशत काम दलित उदधिमों को ही मिले।
5. न्याय को समाज के सबसे गरीब और वंचित तक पहुंचाना
पीएम मोदी ने पांचवा ऐलान न्याय को समाज के सबसे गरीब और वंचित तक पहुंचाने के लिए है। इसके तहत संविधान मित्र योजना और राष्ट्रीय कानूनी सहायता मिशन को और तिव्रता से काम करने की योजना पर कार्य करना का ऐलान किया है, इसके तहत ग्राम पंचायत और शहरी वार्ड शिक्षित दलित को संविधान मित्र के तौर पर नियुक्त किया जायेगा, जो उस क्षेत्र के दलित और पिछड़े समाज के लोगो को उनके संवैधानिक अधिकारों के बारे में जागरूक करेगा औऱ सरकार के तरफ से उन्हें जो भी लाभ मिलते है उसके बारे में बतायेगा। इससे जानकारी न होने के कारण सरकारी लाभों से वंचित रहने वाले करोड़ो दलितों को सीधा लाभ मिल सकेगा।
वहीं न्याय पालिका के अंदर भी एक विशेष विभाग बनाया जायेगा, जहां दलित और पिछड़ी जाति के मामलों को तेजी होने की देखरेख की जायेगी, ताकि उनके मामले कई कई सालों तक लंबित न रहे। वहीं दलित छात्रों को सीधा जज बनाने के लिए अखिल भारतीय न्यायिक सेवा का भी गठन करने की योजना चल रही है। इससे दलित जज बढ़ेंगे जिससे न्याय व्यवस्था में भी बराबरी होगी। पीएम मोदी के ये ऐलान दलित समाज को आने वाले समय में आर्थिक, सामाजिक और वैश्विक स्तर पर सशक्त बनाने और भारत के विकास में उनके योगदान को बढ़ाने के लिए किया गया है।



