BNS Section 151 in Hindi: भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 151 को लेकर कुछ भ्रम हो सकता है क्योंकि भारतीय दंड संहिता (IPC) और दंड प्रक्रिया संहिता (CRPC) में भी धारा 151 है जिसके प्रावधान अलग-अलग हैं। चूंकि भारतीय न्याय संहिता (BNS) एक नया कानून है जो 1 जुलाई, 2024 से लागू होगा, इसलिए हम बीएनएस (BNS) की धारा 151 पर ध्यान केंद्रित करेंगे। तो चलिए जानते हैं ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस में व्यभिचार के बारे में क्या कहा गया है।
धारा 151 क्या कहती है? BNS Section 151 in Hindi
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 151 मुख्य रूप से “सरकार के खिलाफ अपराध” से संबंधित है, खासकर राष्ट्रपति या राज्यपाल पर दबाव डालकर। हालांकि, कुछ स्रोतों का यह भी उल्लेख है कि बीएनएस में धारा 151 सार्वजनिक उपद्रव को रोकने की प्रक्रिया से भी संबंधित हो सकती है, जैसा कि पहले सीआरपीसी (CRPC) में था। लेकिन, बीएनएस के आधिकारिक मसौदे और प्रमुख कानूनी विश्लेषणों के अनुसार, बीएनएस की धारा 151 का मुख्य फोकस सरकार के खिलाफ अपराधों पर है।
आपको बता दें, यह धारा राष्ट्रपति या राज्यपाल (President or Governor) पर किसी भी अवैध तरीके से दबाव डालने के कृत्यों से संबंधित है। इस धारा के तहत, यदि कोई व्यक्ति आपराधिक बल (Criminal force) का प्रयोग करता है या आपराधिक बल का प्रयोग करने की धमकी देता है या भारत के राष्ट्रपति (President) या किसी राज्य के राज्यपाल (Governor) पर अपनी वैध शक्तियों का प्रयोग करने या प्रयोग करने से परहेज करने के लिए कोई अवैध दबाव डालता है, तो वह अपराध करता है।
बीएनएस धारा 151 की मुख्य बातें
- बीएनएस आईपीसी और सीआरपीसी जैसे पुराने कानूनों की जगह ले रहा है।
- इसलिए, पुराने कानूनों की धाराओं और नए कानूनों की धाराओं के बीच अंतर को समझना महत्वपूर्ण है।
- कानूनी सलाह: यह जानकारी केवल सामान्य उद्देश्यों के लिए है। किसी भी कानूनी मामले के लिए, हमेशा एक योग्य वकील से सलाह लेना महत्वपूर्ण है।
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बीएनएस धारा 151 उदाहरण
बीएनएस (BNS) धारा 151 उदाहरण कुछ इस तरह से है कि…उदाहरण 1 – यदि कोई व्यक्ति किसी प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रपति के काफिले पर हमला करता है, और उन्हें किसी विशेष विधेयक पर हस्ताक्षर करने से रोकने की कोशिश करता है, तो उसे बीएनएस धारा 151 के तहत दोषी ठहराया जा सकता है।
आपको बता दें कि धारा 151 के तहत दोषी पाए जाने पर सजा का प्रावधान है कि इस धारा के तहत दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को कैद और जुर्माना हो सकता है।



