Buddha unanswered questions: बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त करने के बाद जब पहली बार सारनाथ में अपने पांच शिष्यों को ज्ञान दिया था, तब उन्होंने 4 आर्य सत्य और 8 आष्टांगिक मार्ग के बारे में बताया था, जिस पर चल कर ही कोई सच्चा बौद्ध भिक्षु हो सकता है, ज्ञान को पा सकता है। बुद्ध के ज्ञान से अंगुलीमाल जैसे हत्यारे ने भी अहिंसा का मार्ग चुन लिया तो वहीं अशोक सम्राट ने भी हिंसा और कत्लेआम छोड़ कर बौद्ध धर्म अपनाया..अशोक को बुद्ध का मार्ग की एकमात्र ऐसा मार्ग लगा जो उन्हें मानसिक शांति दे सकता था..अशोक ने तो भारत से बाहर तक बौद्ध धर्म का प्रचार प्रसार किया था..वहीं बुद्द के प्रभाव से आम्रपाली जैसी नगरवधू भी साध्वी बन गई थी।
बुद्ध की कहानियों में आपको ऐसे कई कहानियां मिलेगी जिसमें बुद्ध ने लोगो को उनके दुखो से उबारने के लिए उनका मार्गदर्शन किया है। उन्हें मुक्ति का मार्ग बताया था, लेकिन वहीं मुक्ति के मार्गदाता कहलाने वाले बुद्ध ने ऐसे 14 सवालो के जवाब अधूरे छोड़ दिये जिसके बारे में उन्होंने कहा था कि ये सवाल असल में व्यक्ति को मुक्ति के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा होती है.. अपने इस वीडियो में हम उन 14 सवालों को जानेंगे जिसका जवाब बुद्ध ने नहीं दिया है।
कौन से थे वो 14 सवाल
गौतम बुद्ध ने ब्राह्मांड को लेकर, आत्मा के अस्तित्व को लेकर और मृत्यु के बाद के अस्तित्व को लेकर किये जाने वाले सवालों को अव्याकत यानि की अनुत्तरित माना था। ये 14 सवाल संसार के अनंत होने को लेकर थे जिसमें क्या संसार शास्वत है, क्या संसार अशास्वत है, या फिर संसार दोनो ही है, या फिर संसार दोनो में से कोई नहीं है, जैसै सवाल शामिल थे, इसके अलावा संसार की सीमाओं को लेकर सवाल थे, जिसमें क्या संसार सिमित है, क्या संसार असिमित है, क्या संसाद सिमित या असिमित दोनो है या फि दोनो में से कोई नहीं है।
ब्रह्मांड की प्रकृति (The Nature of the Universe)
वहीं शरीर और आत्मा के संबध में सवाल था, जिसमें क्या आत्मा और शरीर एक ही है और क्या आत्मा और शरीर अलग अलग है, वहीं बुद्ध की मृत्यु के बाद को लेकर सवाल था, जिसमें क्या तथागत बुद्ध मृत्यु के बाद भी विद्यामान यानि की रहते है, या फिर वो विद्यमान नहीं करते, या फिर वो विद्यामान है भी औऱ नहीं भी, या फिर मृत्यु के बाद भी वो विद्यामान रहते भी है और नहीं भी रहते है।
ये 14 सवालो के जवाब बुद्ध ने कभी नहीं दिए थे, उनका मानना था कि ये सवाल असल में एक भ्रम जाल की तरह है, जो व्यक्ति को ज्ञान के सही प्रकाश से भटकाता है। उन्होंने माना कि ये वो प्रश्न है जिनके उत्तर जानने की कोई अवश्यकता नहीं है, क्योकि इसका निर्वाण और मुक्ति से कोई लेना देना नहीं है, जबकि व्यक्ति का सारा ध्यान मुक्ति के मार्ग पर पैदा होने वाले सवालों पर हल करने पर ही होना चाहिए।
आत्मा और शरीर का संबंध (The Soul and the Body)
बुद्ध ने कहा कि व्यक्ति को मुक्ति के मार्ग पर केवल 4 आर्यसत्य और 8 अष्टांगिक मार्ग पर चलकर ही प्रशस्त हो सकता है, इसलिए व्यर्थ के संसारिक बातों में फंस कर मुक्ति से मार्ग से भटकने के बजाये इस मार्ग पर ही चलना सही है। ये सवाल व्यक्ति के मन में उलझने पैदा करती है, जिसका हल असल में कभी नहीं निकलने वाला है। इसलिए बुद्ध ने इन प्रश्नों का उत्तर देने के बजाये मौन रहना पसंद किया था। हालांकि कुछ बुद्दिजिवियो के मतों के अनुसार सनातन धर्म में इन सवालो के जवाब दिये गए है जिसके कारण ही जब बौद्ध धर्म का प्रचार प्रसार बढ़ा तो कूटनीति और इन सवालों को ढाल बना कर सनातन को श्रैष्ठ बता कर उसे ही मुक्ति का धर्म बताने की चाल चली गई। जिससे सनातन का प्रभाव फिर से बढ़ गया।
हालांकि बुद्ध ने हमेशा ये ही ज्ञान दिया कि व्यर्थ की बातों में समय बर्बाद करने से बेहतर है हमें उन चीजो पर ध्यान देना चाहिए, जो वाकई में मुक्ति की राह प्रशस्त करें, लेकिन संसार संसारिक लोभ और मोह में फंस कर खुद ही मुक्ति से दुख हो जाता है, वो व्यर्थ की बातों में फंसा रहता है, व्यर्थ के सवालों में घिरा रहता है। और इसी तरह के 14 व्यर्थ सवालों से बुद्ध ने व्यक्ति को बचने की सलाह दी है।



