Top 5 Dalit news: कभी कोई दलित या पिछड़ी जाति से बड़ी उपलब्धि प्राप्त करता है तो वो उपलब्धि केवल उसकी या उसकी जाति की नहीं होती..बल्कि वो सबूत होता है कि उन्हें भी सम्मान के साथ मौका मिले तो वो तारें छू सकते है, लेकिन शायद आज भी कुछ मनुवादियों को उनका आगे बढ़ना गवांरा नहीं है। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितो के साथ होने वाली घटनाओं के बारे मे बतायेंगे जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है।
ऊना में दलित युवको पर हमला मामले में 10 साल बाद सजा
1, दलितो से जुड़ा पहला मामला गुजरात के लूना से है, जहां करीब 10 साल पहले कई दलित परिवारों पर जातिवादी आतंकियों ने गोकशी का झूठा आरोप लगा कर हमला कर दिया था… जिसे लेकर अब वेरावर के एससी एसटी अत्याचार निवारण कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए 5 आरोपियों को 5-5 साल की सजा सुनाई है तो वहीं हमला करने वाले 37 आरोपियों को निर्दोष करार देते हुए बरी कर दिया गया।
जिनमें से दो की मौत भी हो चुकी है..इतना ही नहीं इस मामले हमलावरो का साथ देने वाले 4 पुलिसकर्मियों को भी कोर्ट ने बरी कर दिया है। ये मामला गिर सोमनाथ जिले के ऊना के मोटा समढियाला गांव का है, जब 11 जुलाई 2016 को गांव के 4 दलित युवक मरी गाय की खाल उतार रहे थे, तभी तथाकथित गो रक्षक वहां पहुंच गए..और उन्हें पीटने लगे. इस घटना का एक वीडियो भी काफी वायरल हुआ था, और ये मुद्दा राष्ट्रिय मुद्दा बन गया था।
जिसे लेकर काफी बवाल भी हुआ था, इतना ही नहीं कई पुलिस कर्मियों ने सबूतो के साछ छेड़छाड़ भी की थी.. लेकिन अब आखिरकार 10 सालों के बाद फैसला आया, लेकिन फिर भी 37 बरी हो गये और केवल 5 को सजा हुई। अब देखना ये होगा कि कोर्ट के फैसले के बाद दलित संगठनो का क्या रिएक्शन होगा। वैसे आपको क्या लगता है क्या इस फैसले से आप संतुष्ट है।
एट्रोसिटी एक्ट पर महाराष्ट्र सरकार की नई चाल
2, दलितो से जुड़ा अगला मामला महाराष्ट्र से है, जहां एससी एसटी एक्ट को कमजोर करने की साजिश को लेकर हो रहे हंगामें के बाद महाराष्ट्र के सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट ने दलितो को साधने के लिए सफाई पेश की है। उन्होंने कहा कि जानबूझ कर ऐसे भ्रम फैलाये जा रहे है, कि कानून कमजोर होने वाला है, जबकि कानून में कोई बदलाव नहीं होगा।
बता दें कि अभी हाल ही में एट्रोसिटी एक्ट को लेकर महाराष्ट्र में सरकार कुछ बदलाव करने की योजना बना रही थी, जिसे लेकर ये भी खबरें आ रही थी कि सरकार ने फैसला किया है कि अब से दलित उत्पीड़न के मामले एफआईआर के तुरंत बाद गिरफ्तारी करने के बजाये पहले जांच की जायेगी, फिर गिरफ्तारी होगी… जिसकी जानकारी भी खुद शिंदे गुट के नेता संजय शिरसाट ने ही दी थी, जहां उन्होंने ये घोषणा की थी कि सामाजिक न्याय के लिए इस कानून में बदलाव किया गया था।
जिसके तहत 2015 में एट्रोसिटी में तुरंत गिरफ्तारी करने के प्रावधान में बदलाव करने की घोषणा कर दी गई थी। लेकिन जब इस मामले को लेकर दलित संगठनों ने हंगामा कर दिया तो शिरसाट अपने बयान से मुकर गए है। बता दें कि महाराष्ट्र में भी आये दिन दलित अत्याचार के मामले सामने आते रहते है, लेकिन फेक केसेस को रोकने के लिए ये कदम उठाया गया था..मगर विरोध के बाद वापिस ले लिया गया.. अब सरकार के इस रवैये के बाद ये तो साफ हो गया है कि दलित वोटबैंक बचाने के लिए ये चाल चली गई है लेकिन क्या गारंटी है कि दलितों के कानून को कमजोर करने की साजिश फिर नहीं होगी।
राजकोट में दलित छात्र ने की आत्महत्या
3, दलितो से जुड़ा अगला मामला गुजरात के राजकोट से है, जहां एक और दलित छात्र जातिवादी मानसिकता की बलि चढ़ गया है। दरअसल राजकोट AIIMS में MBBS फाइनल ईयर के छात्र रतन कुमार मेघवाल ने चलती ट्रेन से कूद कर जान दे दी है। रतन फलसूंड, जैसलमेर का रहने वाला था, और राजकोट में मेडीकल की पढ़ाई कर रहा था।
लेकिन मरने से पहले उसने 17 पन्नो का एक सुसाइड नोट छोड़ा है, जिसमें उसने अपने साथ राजकोट AIIMS में पिछले कई सालों से होने वाले जातिगत उत्पीड़न का सारा दर्द बयां किया है। रतन ने अस्मित शर्मा और उसके चार साथियों पर लगातार प्रताड़ना और मानसिक उत्पीड़न करने का खुलासा किया है। शैक्षणिक संस्थानों में जातिगत भेदभाव और छात्र छात्रों के साथ होने वाले उत्पीड़न कर अक्सर संस्थान भी मूक दर्शक बन जाता है।
लेकिन सुसाइड नोट ने रतन के साथ होने वाले अपराध का कच्चा चिट्ठा खोल दिया और राजकोट पुलिस ने पांचो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, फिलहाल पांचो से पूछताछ जारी है, लेकिन सवाल ये है कि आखिर कब तक दलितो के होनहार बच्चे जातिगत भेदभाव की भेंट चढ़ते रहेंगे.. ऐसे में क्या यूजीसी के नए गाइडलाइंस लागू नहीं होने चाहिए…जवाब आप हमें कमेंट करके जरूर बतायें।
कानपूर में छेड़छाड़ से तंग आकर दलित महिलाओ का एक्शन
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के कानपुर से है, जहां दलितों और पिछड़ी जाति की महिलाओं को अपनी बपौती समझने वाले जातिवादि दबंगो को दलित महिलाओं ने सबक सिखाया। ये मामला कानपुर के जरौली गांव का है, जहां रोजाना कि छेड़छाड़ और अश्लील हरकतो से तंग आकर आखिरकार दलित महिलाओं ने मिलकर आरोपी विकास पंडित की चप्पलों और थप्पड़ों से जमकर धुनाई की।
इस पूरी घटना का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है। जिसमें महिलाएं आरोपी को पीटती नजर आ रही है। आरोपी की रोज रोज प्रताड़ना से तंग आकर पीड़ित महिलाओं ने उसके खिलाफ पुलिस कंप्लेन भी लिखवाई, जिसके बाद पुलिस ने आरोपी पर SC/ST Act और छेड़छाड़ के आरोपों में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यूपी में दलित महिलाओ को अपनी जागीर समझने वालों के साथ अब हिसाब दलित महिलाओ को ही करना होगा..क्योंकि न्याय के इंतजार में तो सालों बीत जाते है।
तेलंगाना में कलेक्टर की दादागिरी
5, दलितों से जुड़ा अगला मामला तेलंगाना के हैदराबाद से है, जहां दो दलित महिलाओं ने कलेक्टरेट के बाहर चाय की दुकान क्या खोली, पहले तो उन्हें दुकान हटाने को लिए परेशान किया गया, लेकिन जब पीड़िता नही मानी तो उसकी दुकान पर क्रेन चलवा दिया गया..जबकि दुकान खोलने की परमिशन उन्हें पूर्व कलेक्टर ने दी थी। पीड़िता पालामकुला चिन्ना मंजुला और पोटकानुरी विजयलक्ष्मी ने बताया कि वो जनगांव जिले के येरागोलापद गांव की रहने वाली है।
और इंदिरा महिला शक्ति स्कीम के तहत डिस्ट्रिक्ट रूरल डेवलपमेंट एजेंसी (DRDA) की तरफ से जनगांव कलेक्टर ऑफिस कॉम्प्लेक्स में चाय की दुकान लगाने की परमिशन पिछले कलेक्टर, शेख रिजवान पाशा ने दी थी, लेकिन वर्तमान डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर, संदीप कुमार झा ने बिना किसी नोटिस के दुकान को तोड़ने का आदेश दिया.. पहले उसकी दुकान की बत्ती काट दी, जिससे उसका सारा सामान खराब हो गया. और फिर क्रेन से दुकान गिरा दी।
दोनो पीड़ित महिलाओं ने तेलंगाना हाइकोर्ट में पीआईएल फाइल करके न्याय की गुहार लगाई है। हैरानी की बात है कि परमिशन होने के बाद भी जातिगत मानसिकता के काऱण दलित महिलाओ की दुकान को ध्वस्त करवा दिया गया..जबकि महिला पर दुकान खोलने के कारण 3 लाख का कर्ज है.. वो अब न्याय के लिए दर दर भटक रही है.. ये पूरी तरह से गैरकानूनी है.. ऐसे में देखना ये होगा कि कोर्ट पीड़ित परिवार को कब तक न्याय दिला पायेगा।



