Top 5 Dalit News: बिहार के एक गांव में जातीय विवाद, FIR के बाद पुलिस ने 12 लोगों को किया अरेस्ट

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Top 5 Dalit News: आज लोगों की मानसिकता दलितों के प्रति इतनी ज्यादा विकृत हो चुकी है कि हर मुद्दे को जातिगत रंग देकर उन्हें प्रताड़ित करने का कोई मौका नहीं छोड़ा जाता है। चाहे वो मुद्दा किसी गरीब दलित से ही क्यों न जुड़ा हो। जहां मनुवादियों की मानसिकता चलती है वहां दलित कभी न्याय नहीं पा सकता है। तो चलिए आपको इस लेख में  पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में बताते है जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है।

दरभंगा में पूरे ब्राह्मण समाज पर केस

1, दलितों से जुड़ा पहला मामला बिहार के दरभंगा से है, जहां एक दलित परिवार ने गांव के पूरे ब्राह्मण समाज पर संगीन आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया है। ये घटना दरभंगा के कुशेश्वरस्थान थाना क्षेत्र के हरिनगर गांव का है। गांव में दलितों की स्थिति ऐसी है कि ब्राह्मण समाज के लोग उन्हें उनकी मेहनत की कमाई देने के नाम पर भी उत्पीड़न करने से बाज नहीं आते। इसी कड़ी में कैलाश पासवान  नाम के एक शख्स ने पुलिस को तहरीर देखी गांव की ब्राह्मण समाज ने भरी पंचायत में उसके और उसके परिवार के साथ मारपीट की थी जबकि मामला सिर्फ पैसों के लेने का था।

कैलाश ने बताया कि उसने हेमकांत झा के मकान निर्माण का काम किया थे, जिसमें 2 लाख 47 हजार रुपया अभी भी बकाया था। उसने कई बार उसे पैसे देने की अपील की थी लेकिन वो पल्ला झाड़ रहा था। इसीलिए 30 जनवरी को जब हेमकांत झा के बहन बहनोई उसके घर के पास से गुजर रहे थे तो उसने उनसे पैसे देने की अपील की थी। मगर इस बात से हेमकांत झा भड़क गया, उसने पंचायत बिठा दी। इतना ही नहीं भरी पंचायत में उसे जातिसूचक गालियां दी गई।

वहीं जब पीड़ित ने इसका विरोध किया तो उस जातिगत मुद्दा बना कर पूरे ब्राह्मण समाज के लोगों ने उसे प्रताड़ित किया। पीड़ित ने 220 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। वहीं दरभंगा से एसएसपी जगन्नाथ रेड्डी ने खुद इस मामले का संज्ञान लिया है और अब तक 12 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं इस मामले की जांच अभी भी जारी है। और जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी।

गुजरात में दलित छात्र ने की आत्महत्या

2, दलितों से जुड़ा अगला मामला गुजरात के खेड़ा जिले से है, जहां एक 19 साल की दलित छात्र ने गलत आरोपो और कॉलेज प्रशासन की कार्यवाई से तंग आकर खुदकुशी कर ली। ये घटना नाडियाड के दिनशा पटेल नर्सिंग कॉलेज का है, जहां फर्स्ट ईयर में पढ़ने वाले जय विजयकुमार पाटिल ने डिप्रेशन के कारण खुदकुशी कर ली। पुलिस के मुताबिक छात्र ने एक सुसाइड नोट भी छोड़ा था जिसमें लिखा था “मैडम बिना सबूत के मुझ पर इल्ज़ाम लगा रही हैं.. बता दें कि कुछ दिनों पहले ही छात्र के माता पिता को कॉलेज बुलाया गया था, जहां छात्र पर टीजर के साथ बदतमिजी करने का संगीन आरोप लगाया गया था।

साथ ही छात्र को निलंबित करने की भी चेतावनी दी गई थी। पीड़ित छात्र इस घटना से काफी परेशान रहता था, आत्महत्या करने से पहले उसने नोट के आधार पर संस्थान के प्रिंसिपल और तीन टीचर प्रकृति मैडम, शेरिन मैडम और स्मित नाम के एक व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। साथ ही जातिगत भेदभाव का एंगल सामने आने के बाद अब ये मामला SC-ST सेल के डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस को सौंप दिया गया है।

वहीं दलित छात्र के पिता ने कहा कि उनके बच्चे को जानबूझ कर दलित होने के कारण गैंग बनाकर बिना सबूत आरोप लगाये गए.. उन्हें केवल अपने बच्चे के लिए न्याय चाहिए। वैसे शैक्षणिक संस्थानों में जातिगत भेदभाव के मामलों में बढ़ती तेजी से अब शिक्षा भी टेढ़ी खीर लगने लगी है।

AIMIM प्रमुख ओवैसी का पीएम मोदी पर हमला

3, दलितों से जुड़ा अगला मामला तेलंगाना से है, जहां यूजीसी के नए नियमों और दलितो के साथ जातिगत भेदभाव को न रोक पाने में असफल रही बीजेपी सरकार को लेकर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने पीएम मोदी पर जमकर निशाना साधा है। औवेसी ने बीजेपी सरकार को दलितों के साथ बढ़ते उत्पीड़न और उच्च शिक्षा में दलित पिछड़े छात्रो के साथ होने वाले प्रताड़ना के लिए जिम्मेदार ठहराया है।

औवेसी ने कहा कि कि पीएम वैसे तो खुद को “सबसे बड़ा पिछड़ा वर्ग नेता” बताते हैं, लेकिन जब दलितों के मुद्दे पर जवाबदेही की बात होती है तो वो चुप क्यों हो जाते है। दिखावे के लिए यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन रेगुलेशन, 2026 के नियम बनाये गए, फिर सुप्रीम कोर्ट ने रोक भी लगा दी, और सरकार ने कोई पक्ष नहीं रखा… अगर सरकार दलित पिछड़ो की वाकई में हितैषी है तो वो अभी तक ये जवाब क्यों नहीं दे पाई कि रोहित वेमुला की मौत क्यों हुई, महाराष्ट्र में एक आदिवासी डॉक्टर की मौत क्यों हुई।”

बता दें कि तेलंगाना के नगर पालिका के चुनाव है और औवेसी ने बीजेपी और कांग्रेस के गुपचुप सांठगांठ का भी आरोपी लगाया है, उन्होंने कहा कि ये सभी एक ही थाली के चट्टे बट्टे है। दलितों और पिछड़ो के मुद्दों से उन्हें कुछ लेना देना नहीं है। उन्हें केवल भेदभाव की राजनीति करना आता है। हालांकि ये पहली बार हुआ है जब दलित संगठन के अलावा भी किसी बड़ी पार्टी की तरफ से यूजीसी के नियमों को लेकर खुद कर बात की गई है, अब देखना ये होगा कि दलित संगठनों के हंगामे के बाद सरकार का क्या रूख  होती है। वैसे आपको क्या लगता है क्या ये स्टे कभी हटेगा भी या नहीं।

बेलगावी में दलित महिला के साथ हुई थी प्रताड़ना

4, दलितों से जुड़ा अगला मामला कर्नाटक के बेलगावी से है, जहां एक दलित महिला के साथ अभ्रद व्यावहार करने के मामले में एक कोर्ट ने 12 लोगो को 5 सालों की सजा सुनाई है। ये घटना बेलगावी जिले के वंटामुरी गांव की है, जहां 42 साल की एक दलित महिला के साथ 10 दिसंबर 2023 को गांव के ही उंची जाति के कुछ लोगो ने जबरन उसे घर से निकाला, उसे नंगा करके पूरे गांव में घुमाया था, और फिर से उसे खंबे में बांद कर पीटा गया।

पीड़िता ने पुलिस को बताया था कि उसके बेटे पर आरोप लगा था कि वो गांव की उंची जाति की एक लड़की को लेकर भाग गया है, जिससे गुस्साएं लोगो ने बदला लेने के लिए पीड़िता के साथ ये अमानवीय व्यावहार किया था। पुलिस को जब इस घटना की खबर लगी तो उन्होंने जाकर बीच बचाव किया..और तब से ये मामला कोर्ट में लंबित था, लेकिन कर्नाटक हाई कोर्ट की एक डिवीजन बेंच के तत्कालीन चीफ जस्टिस पी.बी. वराले और जस्टिस कृष्णा एस. दीक्षित ने मामले की सुनवाई करते हुए 12 लोगो को दोषी करार देते हुए 5-5 सालों की सजा सुनाई साथ ही 1-1 हजार रूपय का जुर्माना भी लगाया। वहीं पीड़िता को 2 एकड़ जमीन भी मदद के रूप में दी गई है।  कोर्ट ने उन पुलिसवालो की भी तारीफ की जिन्होंने तुरंत मौके पर पहुंच कर महिला की जान बचाई थी।

भीम आर्मी चीफ का एक और वीडियो वायरल

5, दलितों से जुड़ा अगला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद की कथित प्रेमिका रोहिणी घावरी को लेकर है, घावरी आजाद को किसी भी हाल में 2027 के चुनावों में शांति से बैठने देने के इरादे में नहीं है। रोहिणी ने फिर से आजाद का एक वीडियो जारी कर उन्हें 2027 में करारी शिकस्त की चेतावनी दे दी है।

घावरी ने आजाद का मजाक उड़ाया कि ये उनके साथ के कारण ही यूपी के सासंद बन पाये, वर्ना तो बाकि राज्यों में अपना हाल देख सकते है। अब घावरी भी इस बार आजाद के खिलाफ है तो यूपी में भी 2027 विधानसभा चुनाव में क्या हश्र होगा, उसके लिए अभी से तैयार रहे। बता दें कि घावरी लगातार आजाद पर हमलावर रही है, और वो 2022 में आजाद की जीत का क्रेडिट भी खुद को देती रही है, ऐसे में अगर कर 2027 में वाकई में रिजल्ट में कुछ भी बदलाव होता है तो रोहिणी घावरी के आरोपो का वजन और ज्यादा बढ़ जायेगी.. वैसे आपको क्या लगता है क्या वाकई में आजाद की जीत के लिए घावरी जिम्मेदार थी।

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