Barabanki news: उत्तर प्रदेश (UP) के बाराबंकी (Barabanki) से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। भीम आर्मी (Bheem army) के एक पदाधिकारी का शव संदिग्ध परिस्थितियों में बरामद होने से बाराबंकी पुलिस (Barabanki Police) की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं और मृतक के परिवार में कोहराम मचा हुआ है। तो चलिए आपको इस लेख में पूरे मामले के बारे में विस्तार से बताते हैं।
और पढ़े: बहादुरगढ़ में दलित समुदाय निशाने पर दूसरे संप्रदाय के युवकों ने किया हमला, जमकर हुई पत्थरबाजी
भीम आर्मी पदाधिकारी ने फांसी लगाकर आत्महत्या
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में भीम आर्मी के एक स्थानीय पदाधिकारी का शव फंदे से लटका हुआ मिला। दरअसल, यूपी के बाराबंकी से है, एक तहसील न्याय पंचायत अध्यक्ष के पद पर आसीत दलित शख्स को पुलिस ने एक झूठे केस में फंसाया और उसे छोड़ने के बदले 75 हजार रूपय की रिश्वत की मांग की, लेकिन रिश्वत न देने की सूरत में इतना प्रताड़ित किया गया कि उन्होंने खुद फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। दरअसल, यह घटना बाराबंकी ज़िले के जैदपुर थाना के मऊथरी गांव का है।
पुलिस ने दी धमकी
जहां 45 वर्षीय अशोक कुमार नाम के शख्स जो कि भीम आर्मी में तहसील न्याय पंचायत अध्यक्ष के पद पर कार्यरत थे, उन्हें एक झूठे मामले में फंसा दिया गया था, और उस मामले से निकालने के लिए उनसे 75 हजार रूपय की रिश्वत मांगी गई। मेहनत मजदूरी करके अपना घर चलाने वाले अशोक कुमार ने पुलिस की धमकी से डर कर ज़मीन बेचने की कोशिश भी की लेकिन कोई सही खरीददार नहीं मिला। पुलिस ने धमकी दी कि अगर रिश्वत नहीं दी तो NDPS एक्ट जैसे गंभीर मुकदमें फंसा देंगे।
पीड़ित परिवार की एफआईआर नहीं
लेकिन जब कोई रास्ता नजर नहीं आया तो उन्होंने 1 अक्टूबर को एक पेड़ से फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली। अशोक कुमार ने एक सुसाईड नोट भी छोड़ा जिसमें उन्होंने अपनी मौत के लिए थाना जैदपुर के पुलिसकर्मी संतोष इंस्पेक्टर और निर्मल दरोगा सहित कई लोगो को जिम्मेदार ठहराया है। इस मामले में अभी तक पीड़ित परिवार की एफआईआर तक दर्ज नहीं की गई। पुलिस दवाब बना रही है कि वो पुलिस वालो के नाम न लें तभी एफआईआर दर्ज की जायेगी।
आपको बता दें, भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से अपील की है कि इस मामले में जो भी पुलिसवाले जिम्मेदार है उनपर कार्यवाई की जाये, उन्हें निलंबित किया जायें और पीड़ित परिवार को 50 लाख का मुआवजा और एक सदस्य को नौकरी दी जाये। और इस मामले की निष्पक्ष उच्च स्तरिय जांच की जायें।



