BNS Section 229 in Hindi: भारतीय दंड संहिता (BNS) की धारा 229 झूठे गवाहों के खिलाफ दंड का प्रावधान से संबंधित है। तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस (Bhaarateey dand sanhita) में व्यभिचार के बारे में क्या कहा गया है।
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धारा 229 क्या कहती है? BNS Section 229 in Hindi
जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस की धारा 229 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 229 झूठी गवाही देने या बनाए जाने के लिए दंड का प्रावधान करता है। दंड की गंभीरता इस पर निर्भर करती है कि अपराध न्यायिक प्रक्रिया में हुआ है।
उदहारण के लिए…जैसे ‘A’ का एक मित्र ‘B’ है। ‘B’ जानता है कि चोरी की रात ‘A’ उसी शहर में था और उसने चोरी की थी। लेकिन जब ‘B’ को गवाह के रूप में अदालत में बुलाया जाता है, तो वह ‘A’ की बेगुनाही साबित करने के लिए जानबूझकर शपथ (कानूनी रूप से शपथ से बंधा हुआ) के तहत झूठी गवाही देता है, जिसमें वह कहता है कि चोरी की रात ‘A’ दूसरे शहर में एक धार्मिक समारोह में उसके साथ था। मतलब कि ‘B’ ने न्यायिक कार्यवाही में जानबूझकर और जानबूझकर झूठी गवाही दी। इसलिए, ‘B’ दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 229(1) के तहत दोषी है, जिसके लिए सात साल तक की कैद और जुर्माने की सजा हो सकती है।
बीएनएस धारा 229 की महतवपूर्ण बातें
इस धारा के तहत किसी कृत्य को दंडनीय बनाने के लिए, व्यक्ति का अदालत या कानूनी अधिकारियों को गुमराह करने का इरादा होना आवश्यक है।
- झूठे साक्ष्य में झूठी गवाही देना, फर्जी दस्तावेज तैयार करना, या किसी सबूत को जानबूझकर गलत तरीके से पेश करना शामिल है।
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बीएनएस धारा 229 की और सजा
इसके अलवा आपको बता दें कि BNS की धारा (Section) 229 के तहत दोषी पाए जाने पर सजा का प्रावधान है कि, यदि कोई व्यक्ति न्यायिक प्रक्रिया के किसी भी चरण में जानबूझकर झूठी गवाही देता है या उसे झूठी कहानी बताता है, तो उसे सात वर्ष तक की कारावास की सजा और जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।
यदि यह गंभीर परिस्थितियों में किया गया है और यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी अन्य मामले (जो न्यायिक प्रक्रिया से अलग है) में झूठी गवाही देता है या उसे गढ़ता है, तो उसे तीन वर्ष तक की सजा हो सकती है।



