BNS Section 232 in Hindi: भारतीय दंड संहिता (BNS) की धारा 232 का संबंध मुख्य रूप से किसी व्यक्ति को झूठा साक्ष्य देने के लिए मजबूर करने से है। यह प्रावधान न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालने से रोकता है और गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है। तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस (Bhaarateey dand sanhita) में व्यभिचार के बारे में क्या कहा गया है।
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धारा 232 क्या कहती है? BNS Section 232 in Hindi
जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस की धारा 231 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 232 झूठी गवाही देने के लिए किसी को डराने–धमकाने से जुड़ा है। यह धमकी व्यक्तिगत नुकसान, सम्मान को ठेस पहुँचाने, या संपत्ति को क्षति पहुँचाने के रूप में सामने आ सकती है। इस धारा में प्रावधान का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी व्यक्ति झूठे साक्ष्य प्रस्तुत करने या गवाही देने के लिए विवश्य न हो।
बीएनएस धारा 232 की महतवपूर्ण बातें
धारा 232(1) – अगर कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति को झूठे साक्ष्य देने के लिए मजबूर या धमकी देता है, तो उसे सात साल तक की कैद, जुर्माना, या इन दोनों से दंडित किया जा सकता है।
गंभीर परिणामों की स्थिति में धारा 232(2) का प्रवधान कुछ इस तरह है कि यदि इस झूठे साक्ष्य के कारण किसी निर्दोष व्यक्ति को मौत की सजा या सात साल से अधिक की सजा पाने वाले अपराध का दोषी ठहराया जाता है, तो धमकी देने वाले को भी उसी तरह की दंड और सजा का सामना करना होगा।
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बीएनएस धारा 232 की और सजा
इसके अलवा आपको बता दें कि BNS की धारा (Section) 232 के तहत दोषी पाए जाने पर सजा का प्रावधान है कि, दोषी व्यक्ति को सात वर्ष तक के कारावास और जुर्माने से दंडित किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, आरोपी को पचास हजार रुपये तक का जुर्माना भी भरना पड़ सकता है। वही यदि झूठे साक्ष्य के कारण निर्दोष व्यक्ति को फाँसी दी जाती है, तो इसके परिणामस्वरूप दंड और भी अधिक गंभीर हो जाता है।



